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ऑनलाइन के मकड़ जाल में फंसी शिक्षा व्यवस्था, मानसिक अवसाद से जूझ रहे शिक्षक

ऑनलाइन के मकड़ जाल में फंसी शिक्षा व्यवस्था, मानसिक अवसाद से जूझ रहे शिक्षक

देहरादून। उत्तराखंड की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में विभागीय एवं समग्र शिक्षा परियोजना के विभिन्न कार्यों के नाम से मांगी जा रही ऑनलाइन सूचनाओं की फीडिंग में लगभग जकड़ सी चुकी है, जिससे बाहर आने का कोई रास्ता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है जिसे लेकर शिक्षक भयंकर मानसिक अवसाद की स्थितियों से गुजर रहे हैं, इसके चलते जहां एक और प्रदेश की पठन-पाठन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है शिक्षक तनाव की स्थितियों से गुजर रहे हैं वहीं दूसरी ओर साइबर कैफे और कंप्यूटर संचालकों की बाछे खिली हुई है, क्योंकि जो शिक्षक कंप्यूटर की दक्षता पूरी तरह नहीं रखते हैं वह इन कंप्यूटर संचालकों पर इन ऑनलाइन फीडिंग के लिए पूर्णतया निर्भर बने हुए हैं और उनकी चांदी हो रही है।

उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी मनोज तिवारी ने इस इस कार्य में आ रही कठिनाई एवं उसके समाधान का पत्र शिक्षा मंत्री को भेज कर शीघ्र ही इसका हल निकालने की मांग की है। उन्होंने कहा की 26 नवंबर को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली संगठन की बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में विभाग के अंतर्गत ऑनलाइन कार्यों में भारत सरकार द्वारा संचालित पोर्टल यू डाइस, राज्य सरकार द्वारा संचालित एजुकेशन पोर्टल, परख कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के गृह कार्य की साप्ताहिक फीडिंग, स्विफ्ट चैट के अंतर्गत शिक्षकों एवं बच्चों की नियमित उपस्थिति भेजने की प्रक्रिया, एवं अपार यूनिक आईडी बनाने का जटिल कार्य सहित मध्यान भोजन योजना के दैनिक एसएमएस सहित अन्य अनेक स्रोतों से मांगी जा रही सभी सूचनाओं को विभिन्न पोर्टलो पर सीधे ऑनलाइन फीडिंग करवाई जा रही है जिसमें पूरा तंत्र उलझा हुआ है।

तिवारी ने कहा की इसके साथ-साथ ही वर्तमान में एफएलएन (बुनियादी शिक्षा एवं संख्यात्मक ज्ञान) सहित अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी बहुलता के साथ चलाए जा रहे हैं जिससे अधिकांश एकल शिक्षकीय एवं दो शिक्षकों वाले तथा व्यवस्था से संचालित शिक्षक विहीन विद्यालयो में शिक्षण व्यवस्था के साथ-साथ इन विद्यालय को संचालित करने में भारी कठिनाइयां उत्पन्न हो रही है। क्योंकि वर्तमान में राज्य स्तर पर स्थापित आईटी तंत्र की विभिन्न इकाइयां जैसे विद्या समीक्षा केंद्र, आईएफएमएस, एमडीएम प्रकोष्ठ, यू डाइस प्लस पोर्टल, एजुकेशन पोर्टल आदि जो सभी अपने-अपने तरीके से विद्यालयों से डाटा मांग रहे हैं और इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है की इन कार्यों को समय पर पूरा नहीं होने की स्थिति में शिक्षकों का वेतन रोकने एवं उनके विरुद्ध अन्य विभाग की कार्रवाई लाने के फरमान जारी हो रहे हैं जिसके फलस्वरुप भय का वातावरण बना हुआ है, और शिक्षक मानसिक तनाव की स्थितियों से गुजर रहे हैं, श्री तिवारी ने कहा की राज्य स्तर पर मानवीय एवं भौतिक संसाधन पर्याप्त स्थिति में है यदि सूचना मांगने वाली इन विभिन्न इकाइयों का राज्य स्तर पर ही आपस में समन्वयन कर दिया जाए तो विद्यालयों से केवल एक बार ही सूचना देनी पड़ेगी, उन्होंने कहा कि वह इस इस हेतु राज्य स्तर पर पुरजोर पैरवी करेंगे।

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