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देहरादून : उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय ने 9 अक्टूबर को विद्यालयी शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत विद्यार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से धनराशि भेजी जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव हीरा सिंह बसेड़ा की ओर से विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर शासनादेश जारी करने को कहा गया है। साथ ही, इसकी जानकारी जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घोषणा पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा सके।

 

 

विद्यार्थियों से संवाद के दौरान की थी घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रदेशभर से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से संवाद किया था। इस दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिजिटल संसाधनों की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों के 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की घोषणा की थी।

 

बैंक खातों में आएगी रकम, राशि का इंतजार

योजना के तहत विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए सीधे बैंक खाते में धनराशि दी जाएगी। हालांकि, प्रति विद्यार्थी मिलने वाली सहायता राशि, कुल लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। इनका विवरण शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले शासनादेश या दिशा-निर्देशों में सामने आने की उम्मीद है।

 

डिजिटल पढ़ाई में मिलेगी मदद

टैबलेट से विद्यार्थियों को ऑनलाइन लेक्चर, डिजिटल नोट्स और अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र में घोषणा संख्या 955/2026 का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि सचिव वित्त, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भी भेजी गई है। अब योजना को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई और शासनादेश जारी होने का इंतजार है।

 

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देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता है। मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित पहले कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस श्रेणी में सिल्वर मेडल हासिल किया। महज 11 साल की उम्र में मिली इस उपलब्धि से देहरादून सहित पूरे उत्तराखण्ड में खुशी का माहौल है।

देहरादून के सीजेएम स्कूल में पढ़ने वाली काया ने 5 अक्टूबर को रैपिड चेस के मुकाबले संपन्न होने के बाद यह पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में कॉमनवेल्थ देशों के स्कूली खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा ले रहे हैं। काया ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा के दम पर अंडर-11 गर्ल्स वर्ग में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया।

काया की इस सफलता की खास बात यह है कि वह पढ़ाई और शतरंज दोनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। कम उम्र में खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में भी उत्साह है।

अब क्लासिकल चेस में दिखाएंगी दम

रैपिड चेस में पदक जीतने के बाद काया की अगली चुनौती क्लासिकल चेस चैंपियनशिप है। टूर्नामेंट में क्लासिकल मुकाबलों की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है, जिसमें वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। रैपिड चेस की तुलना में क्लासिकल प्रारूप में खिलाड़ियों को अधिक समय मिलता है। इसमें गहरी रणनीति, धैर्य और सोच-समझकर चाल चलना अहम होता है।

काया के पिता पंकज ध्यानी के अनुसार, रैपिड चेस में सिल्वर मेडल जीतने के बाद काया का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी कोशिश क्लासिकल चेस में भी अच्छा प्रदर्शन करने की होगी।

काया ध्यानी की यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। 11 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। अब सभी की नजरें क्लासिकल चेस में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री धामी शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखण्ड-2026’ कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद कर रहे थे ।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखण्ड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखण्ड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखण्ड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

कंटेंट क्रिएटर्स ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, कानून व्यवस्था, रिवर्स माइग्रेशन, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सभी सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उत्तराखण्ड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने संबंधी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। 

मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखण्ड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कंटेंट क्रिएटर्स के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।

हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

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पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से कीवी के उत्पादन सहित सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू, माल्टा सहित विभिन्न फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है।

दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई। वर्तमान में फार्म में कीवी के लगभग 250 पौधे हैं, जबकि सेब के 400 और नींबू-माल्टा के करीब 150 पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अन्य फल भी उगाए जा रहे हैं। दीपक ने बताया कि फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है। बागवानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई है।

दीपक नौटियाल का प्रयास केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फार्म में उत्पादित कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से उत्पाद निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार करने में योगदान देती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। महिला समूह बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद भी तैयार करते हैं। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से आती है। इसके अलावा कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन, महिला समूहों के माध्यम से उत्पाद तैयार करने और दिल्ली में पैकेजिंग के बाद बाजार तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।

दीपक नौटियाल बताते हैं कि फार्म में सामान्य दिनों में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को काम मिलता है। उनका कहना है कि खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिला समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन ने सिमल्ट गांव में चार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। 4 अक्टूबर को हुए भूस्खलन में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से चार परिवार बेघर हो गए हैं। गांव के पास भूस्खलन के चलते अन्य परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आपदा की इस घड़ी में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की चमोली शाखा ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

रेडक्रॉस की टीम सिमल्ट गांव पहुंची और प्रभावित परिवारों को तिरपाल, किचन सेट तथा कंबल वितरित किए। मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। राहत सामग्री से उन्हें मुश्किल हालात में कुछ सहारा मिला है।

प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए टेंट सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों का हालचाल जान रहे हैं और मदद कर रहे हैं, वहीं गांव के समीप भूस्खलन से अन्य परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

रेडक्रॉस की ओर से राहत सामग्री प्राप्त करने वालों में मुन्नालाल, कमला देवी, रीना देवी और विमला देवी शामिल रहे। इस दौरान ओम प्रकाश भट्ट, सचिव सुरेंद्र रावत, प्रदीप रावत, देव सिंह और शंकर बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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  • घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा
  • बंदरों के हमले में महिला घायल
  • बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में भालू और बाघ की दहशत के बीच अब बंदरों का आतंक भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आबादी में घुस रहे बंदर घरों से सामान उठा रहे हैं और लोगों पर झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग के स्तर पर कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

रविवार को कर्णप्रयाग के गांधीनगर निवासी उषा देवी पर बंदर ने झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर दिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। घरों के आसपास और रास्तों में बंदरों की मौजूदगी के कारण लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को लेकर है। अभिभावकों को डर है कि रास्ते में बंदरों के हमले से बच्चे चोटिल हो सकते हैं।

वन विभाग की सक्रियता पर निगाहें

भालू और बाघ की सक्रियता के बीच बंदरों का आतंक बढ़ने से वन विभाग के सामने चुनौती और बढ़ गई है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर बंदरों को पकड़ने या आबादी से दूर करने के लिए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करेगा। साथ ही स्कूलों के आसपास और आवाजाही वाले रास्तों पर खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सिर्फ चेतावनी नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय निवासी योगेंद्र बिष्ट, मुकुल बिष्ट, अनीता देवी आदि का कहना है कि वन्यजीवों से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। हमलों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और जनसुरक्षा के उपाय जरूरी हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग बंदरों के आतंक से परेशान लोगों, खासकर स्कूली बच्चों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव हीरा सिंह बसेड़ा की ओर से विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर शासनादेश जारी करने को कहा गया है। साथ ही, इसकी जानकारी जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घोषणा पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा सके।

 

 

विद्यार्थियों से संवाद के दौरान की थी घोषणा

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बैंक खातों में आएगी रकम, राशि का इंतजार

योजना के तहत विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए सीधे बैंक खाते में धनराशि दी जाएगी। हालांकि, प्रति विद्यार्थी मिलने वाली सहायता राशि, कुल लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। इनका विवरण शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले शासनादेश या दिशा-निर्देशों में सामने आने की उम्मीद है।

 

डिजिटल पढ़ाई में मिलेगी मदद

टैबलेट से विद्यार्थियों को ऑनलाइन लेक्चर, डिजिटल नोट्स और अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र में घोषणा संख्या 955/2026 का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि सचिव वित्त, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भी भेजी गई है। अब योजना को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई और शासनादेश जारी होने का इंतजार है।

 

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देहरादून के सीजेएम स्कूल में पढ़ने वाली काया ने 5 अक्टूबर को रैपिड चेस के मुकाबले संपन्न होने के बाद यह पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में कॉमनवेल्थ देशों के स्कूली खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा ले रहे हैं। काया ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा के दम पर अंडर-11 गर्ल्स वर्ग में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया।

काया की इस सफलता की खास बात यह है कि वह पढ़ाई और शतरंज दोनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। कम उम्र में खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में भी उत्साह है।

अब क्लासिकल चेस में दिखाएंगी दम

रैपिड चेस में पदक जीतने के बाद काया की अगली चुनौती क्लासिकल चेस चैंपियनशिप है। टूर्नामेंट में क्लासिकल मुकाबलों की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है, जिसमें वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। रैपिड चेस की तुलना में क्लासिकल प्रारूप में खिलाड़ियों को अधिक समय मिलता है। इसमें गहरी रणनीति, धैर्य और सोच-समझकर चाल चलना अहम होता है।

काया के पिता पंकज ध्यानी के अनुसार, रैपिड चेस में सिल्वर मेडल जीतने के बाद काया का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी कोशिश क्लासिकल चेस में भी अच्छा प्रदर्शन करने की होगी।

काया ध्यानी की यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। 11 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। अब सभी की नजरें क्लासिकल चेस में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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कार्यक्रम में उत्तराखण्ड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखण्ड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखण्ड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखण्ड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

कंटेंट क्रिएटर्स ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, कानून व्यवस्था, रिवर्स माइग्रेशन, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सभी सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उत्तराखण्ड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने संबंधी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। 

मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखण्ड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कंटेंट क्रिएटर्स के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।

हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड…
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पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से कीवी के उत्पादन सहित सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू, माल्टा सहित विभिन्न फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है।

दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई। वर्तमान में फार्म में कीवी के लगभग 250 पौधे हैं, जबकि सेब के 400 और नींबू-माल्टा के करीब 150 पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अन्य फल भी उगाए जा रहे हैं। दीपक ने बताया कि फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है। बागवानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई है।

दीपक नौटियाल का प्रयास केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फार्म में उत्पादित कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से उत्पाद निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार करने में योगदान देती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। महिला समूह बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद भी तैयार करते हैं। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से आती है। इसके अलावा कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन, महिला समूहों के माध्यम से उत्पाद तैयार करने और दिल्ली में पैकेजिंग के बाद बाजार तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।

दीपक नौटियाल बताते हैं कि फार्म में सामान्य दिनों में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को काम मिलता है। उनका कहना है कि खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिला समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए…
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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन ने सिमल्ट गांव में चार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। 4 अक्टूबर को हुए भूस्खलन में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से चार परिवार बेघर हो गए हैं। गांव के पास भूस्खलन के चलते अन्य परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आपदा की इस घड़ी में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की चमोली शाखा ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

रेडक्रॉस की टीम सिमल्ट गांव पहुंची और प्रभावित परिवारों को तिरपाल, किचन सेट तथा कंबल वितरित किए। मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। राहत सामग्री से उन्हें मुश्किल हालात में कुछ सहारा मिला है।

प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए टेंट सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों का हालचाल जान रहे हैं और मदद कर रहे हैं, वहीं गांव के समीप भूस्खलन से अन्य परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

रेडक्रॉस की ओर से राहत सामग्री प्राप्त करने वालों में मुन्नालाल, कमला देवी, रीना देवी और विमला देवी शामिल रहे। इस दौरान ओम प्रकाश भट्ट, सचिव सुरेंद्र रावत, प्रदीप रावत, देव सिंह और शंकर बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन…
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  • घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा
  • बंदरों के हमले में महिला घायल
  • बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में भालू और बाघ की दहशत के बीच अब बंदरों का आतंक भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आबादी में घुस रहे बंदर घरों से सामान उठा रहे हैं और लोगों पर झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग के स्तर पर कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

रविवार को कर्णप्रयाग के गांधीनगर निवासी उषा देवी पर बंदर ने झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर दिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। घरों के आसपास और रास्तों में बंदरों की मौजूदगी के कारण लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को लेकर है। अभिभावकों को डर है कि रास्ते में बंदरों के हमले से बच्चे चोटिल हो सकते हैं।

वन विभाग की सक्रियता पर निगाहें

भालू और बाघ की सक्रियता के बीच बंदरों का आतंक बढ़ने से वन विभाग के सामने चुनौती और बढ़ गई है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर बंदरों को पकड़ने या आबादी से दूर करने के लिए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करेगा। साथ ही स्कूलों के आसपास और आवाजाही वाले रास्तों पर खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सिर्फ चेतावनी नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय निवासी योगेंद्र बिष्ट, मुकुल बिष्ट, अनीता देवी आदि का कहना है कि वन्यजीवों से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। हमलों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और जनसुरक्षा के उपाय जरूरी हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग बंदरों के आतंक से परेशान लोगों, खासकर स्कूली बच्चों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा बंदरों के हमले…
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  • नौ दिन तक गूंजेंगे दुर्गा सप्तशती के मंत्र,
  • माता उर्वशी और नवदुर्गा की होगी विशेष पूजा-अर्चना

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम में शारदीय नवरात्र का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने मंदिर परिसर में घट स्थापना कर मां भगवती का अभिषेक किया। नौ दिनों तक यहां दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ माता उर्वशी और नवदुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना होगी।

नवरात्र के पहले दिन धाम के नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी ने मां भगवती का अभिषेक किया। आचार्य विजय प्रसाद पाण्डेय, मंत्री प्रसाद थपलियाल और शशांक चमोली ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने मां भगवती के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

आचार्य विजय प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि नौ दिवसीय अनुष्ठान में राष्ट्र कल्याण, ऐश्वर्य वृद्धि, बाधाओं के निवारण और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की जाएगी। विजयदशमी पर हवन-यज्ञ के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का समापन होगा।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और विजय कप्रवाण ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर धाम के प्रभारी अधिकारी राजन नैथानी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, संदीप कपरवाण, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़, विपिन डिमरी, दिनेश डिमरी मौजूद रहे।

नौ दिन तक गूंजेंगे दुर्गा सप्तशती के मंत्र, माता उर्वशी…
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शारदीय नवरात्रि में पूरण सिंह भंडारी ने राज्य शहीदों के सपने पूरा करने का माँ भगवती से मांगा आशीर्वाद – badhtauttarakhand

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देहरादून : उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय ने 9 अक्टूबर को विद्यालयी शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत विद्यार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से धनराशि भेजी जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव हीरा सिंह बसेड़ा की ओर से विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर शासनादेश जारी करने को कहा गया है। साथ ही, इसकी जानकारी जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घोषणा पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा सके।

 

 

विद्यार्थियों से संवाद के दौरान की थी घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रदेशभर से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से संवाद किया था। इस दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिजिटल संसाधनों की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों के 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की घोषणा की थी।

 

बैंक खातों में आएगी रकम, राशि का इंतजार

योजना के तहत विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए सीधे बैंक खाते में धनराशि दी जाएगी। हालांकि, प्रति विद्यार्थी मिलने वाली सहायता राशि, कुल लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। इनका विवरण शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले शासनादेश या दिशा-निर्देशों में सामने आने की उम्मीद है।

 

डिजिटल पढ़ाई में मिलेगी मदद

टैबलेट से विद्यार्थियों को ऑनलाइन लेक्चर, डिजिटल नोट्स और अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र में घोषणा संख्या 955/2026 का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि सचिव वित्त, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भी भेजी गई है। अब योजना को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई और शासनादेश जारी होने का इंतजार है।

 

देहरादून : उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय ने 9 अक्टूबर को विद्यालयी शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई करने के…

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देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता है। मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित पहले कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस श्रेणी में सिल्वर मेडल हासिल किया। महज 11 साल की उम्र में मिली इस उपलब्धि से देहरादून सहित पूरे उत्तराखण्ड में खुशी का माहौल है।

देहरादून के सीजेएम स्कूल में पढ़ने वाली काया ने 5 अक्टूबर को रैपिड चेस के मुकाबले संपन्न होने के बाद यह पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में कॉमनवेल्थ देशों के स्कूली खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा ले रहे हैं। काया ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा के दम पर अंडर-11 गर्ल्स वर्ग में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया।

काया की इस सफलता की खास बात यह है कि वह पढ़ाई और शतरंज दोनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। कम उम्र में खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में भी उत्साह है।

अब क्लासिकल चेस में दिखाएंगी दम

रैपिड चेस में पदक जीतने के बाद काया की अगली चुनौती क्लासिकल चेस चैंपियनशिप है। टूर्नामेंट में क्लासिकल मुकाबलों की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है, जिसमें वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। रैपिड चेस की तुलना में क्लासिकल प्रारूप में खिलाड़ियों को अधिक समय मिलता है। इसमें गहरी रणनीति, धैर्य और सोच-समझकर चाल चलना अहम होता है।

काया के पिता पंकज ध्यानी के अनुसार, रैपिड चेस में सिल्वर मेडल जीतने के बाद काया का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी कोशिश क्लासिकल चेस में भी अच्छा प्रदर्शन करने की होगी।

काया ध्यानी की यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। 11 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। अब सभी की नजरें क्लासिकल चेस में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता है। मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित पहले कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस श्रेणी में सिल्वर मेडल हासिल किया। महज…

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री धामी शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखण्ड-2026’ कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद कर रहे थे ।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखण्ड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखण्ड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखण्ड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

कंटेंट क्रिएटर्स ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, कानून व्यवस्था, रिवर्स माइग्रेशन, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सभी सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उत्तराखण्ड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने संबंधी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। 

मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखण्ड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कंटेंट क्रिएटर्स के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।

हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखण्ड की…

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पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से कीवी के उत्पादन सहित सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू, माल्टा सहित विभिन्न फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है।

दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई। वर्तमान में फार्म में कीवी के लगभग 250 पौधे हैं, जबकि सेब के 400 और नींबू-माल्टा के करीब 150 पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अन्य फल भी उगाए जा रहे हैं। दीपक ने बताया कि फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है। बागवानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई है।

दीपक नौटियाल का प्रयास केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फार्म में उत्पादित कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से उत्पाद निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार करने में योगदान देती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। महिला समूह बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद भी तैयार करते हैं। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से आती है। इसके अलावा कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन, महिला समूहों के माध्यम से उत्पाद तैयार करने और दिल्ली में पैकेजिंग के बाद बाजार तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।

दीपक नौटियाल बताते हैं कि फार्म में सामान्य दिनों में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को काम मिलता है। उनका कहना है कि खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिला समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर…

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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन ने सिमल्ट गांव में चार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। 4 अक्टूबर को हुए भूस्खलन में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से चार परिवार बेघर हो गए हैं। गांव के पास भूस्खलन के चलते अन्य परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आपदा की इस घड़ी में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की चमोली शाखा ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

रेडक्रॉस की टीम सिमल्ट गांव पहुंची और प्रभावित परिवारों को तिरपाल, किचन सेट तथा कंबल वितरित किए। मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। राहत सामग्री से उन्हें मुश्किल हालात में कुछ सहारा मिला है।

प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए टेंट सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों का हालचाल जान रहे हैं और मदद कर रहे हैं, वहीं गांव के समीप भूस्खलन से अन्य परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

रेडक्रॉस की ओर से राहत सामग्री प्राप्त करने वालों में मुन्नालाल, कमला देवी, रीना देवी और विमला देवी शामिल रहे। इस दौरान ओम प्रकाश भट्ट, सचिव सुरेंद्र रावत, प्रदीप रावत, देव सिंह और शंकर बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन ने सिमल्ट गांव में चार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। 4 अक्टूबर को हुए भूस्खलन में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से चार परिवार बेघर हो गए हैं। गांव के पास भूस्खलन के चलते अन्य परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आपदा की इस…

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  • घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा
  • बंदरों के हमले में महिला घायल
  • बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में भालू और बाघ की दहशत के बीच अब बंदरों का आतंक भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आबादी में घुस रहे बंदर घरों से सामान उठा रहे हैं और लोगों पर झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग के स्तर पर कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

रविवार को कर्णप्रयाग के गांधीनगर निवासी उषा देवी पर बंदर ने झपट्टा मारकर उन्हें घायल कर दिया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। घरों के आसपास और रास्तों में बंदरों की मौजूदगी के कारण लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को लेकर है। अभिभावकों को डर है कि रास्ते में बंदरों के हमले से बच्चे चोटिल हो सकते हैं।

वन विभाग की सक्रियता पर निगाहें

भालू और बाघ की सक्रियता के बीच बंदरों का आतंक बढ़ने से वन विभाग के सामने चुनौती और बढ़ गई है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन कर बंदरों को पकड़ने या आबादी से दूर करने के लिए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करेगा। साथ ही स्कूलों के आसपास और आवाजाही वाले रास्तों पर खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सिर्फ चेतावनी नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत

स्थानीय निवासी योगेंद्र बिष्ट, मुकुल बिष्ट, अनीता देवी आदि का कहना है कि वन्यजीवों से बचाव के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। हमलों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और जनसुरक्षा के उपाय जरूरी हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग बंदरों के आतंक से परेशान लोगों, खासकर स्कूली बच्चों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

घर से स्कूल के रास्तों तक खतरा बंदरों के हमले में महिला घायल बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले में भालू और बाघ की दहशत के बीच अब बंदरों का आतंक भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आबादी में घुस रहे बंदर घरों से सामान उठा रहे हैं और…

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  • नौ दिन तक गूंजेंगे दुर्गा सप्तशती के मंत्र,
  • माता उर्वशी और नवदुर्गा की होगी विशेष पूजा-अर्चना

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम में शारदीय नवरात्र का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने मंदिर परिसर में घट स्थापना कर मां भगवती का अभिषेक किया। नौ दिनों तक यहां दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ माता उर्वशी और नवदुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना होगी।

नवरात्र के पहले दिन धाम के नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी ने मां भगवती का अभिषेक किया। आचार्य विजय प्रसाद पाण्डेय, मंत्री प्रसाद थपलियाल और शशांक चमोली ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने मां भगवती के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

आचार्य विजय प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि नौ दिवसीय अनुष्ठान में राष्ट्र कल्याण, ऐश्वर्य वृद्धि, बाधाओं के निवारण और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की जाएगी। विजयदशमी पर हवन-यज्ञ के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का समापन होगा।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और विजय कप्रवाण ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर धाम के प्रभारी अधिकारी राजन नैथानी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, संदीप कपरवाण, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़, विपिन डिमरी, दिनेश डिमरी मौजूद रहे।

नौ दिन तक गूंजेंगे दुर्गा सप्तशती के मंत्र, माता उर्वशी और नवदुर्गा की होगी विशेष पूजा-अर्चना गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम में शारदीय नवरात्र का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने मंदिर परिसर में घट स्थापना कर मां भगवती का अभिषेक किया।…

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  • मां चंडिका की पूजा-अर्चना के बाद आंदोलन का शंखनाद
  • 20 अक्टूबर को सीएम कार्यालय के घेराव का ऐलान

कर्णप्रयाग (चमोली)। चमोली जिले के सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने और शासनादेश जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। मांग पूरी नहीं होने से नाराज क्षेत्रीय जनता ने रविवार को शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां चंडिका के दरबार में पहुंचे और पूजा-अर्चना कर सरकार की बुद्धि-शुद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद सिमली से देहरादून के लिए पदयात्रा शुरू कर दी गई। आंदोलनकारियों ने 20 अक्टूबर को देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है।

ढोल-दमाऊ और मशकबीन की धुन के साथ शुरू हुई पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। यात्रा का पहला पड़ाव 17 किलोमीटर दूर गौचर निर्धारित किया गया है। पदयात्रा कर्णप्रयाग पहुंची तो स्थानीय महिलाओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल बनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन शासनादेश जारी नहीं होने से क्षेत्र की जनता में नाराजगी बढ़ रही है। अब इस मांग को लेकर देहरादून तक आवाज उठाई जाएगी।

बेस अस्पताल संघर्ष समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, बूंगा की संतोषी कनवासी, कपीरी संघर्ष समिति के अध्यक्ष खिलदेव रावत और डिम्मर की ग्राम प्रधान विनीता डिमरी ने कहा कि अस्पताल की मांग क्षेत्र की जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी है। इस पर निर्णय नहीं होने से लोगों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

मां चंडिका के दरबार में सरकार की बुद्धि-शुद्धि की प्रार्थना

नवरात्र के पहले दिन सिमली स्थित श्री राजराजेश्वरी चंडिका मंदिर में कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और गैरसैंण ब्लॉक से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां चंडिका की पूजा-अर्चना कर अस्पताल की मांग पूरी होने की कामना की। पदयात्रा पर निकलने से पहले मातृशक्ति और क्षेत्रीय लोगों ने मंदिर में हाजिरी लगाई तथा सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

नवरात्र में रामलीला मंचन भी स्थगित

सिमली में अस्पताल की मांग को लेकर बढ़ते आक्रोश का असर धार्मिक आयोजन पर भी पड़ा है। क्षेत्र में वर्षों से आयोजित होने वाली श्री राजराजेश्वरी चंडिका रामलीला का मंचन इस बार स्थगित कर दिया गया है। आंदोलनकारियों ने कहा कि नवरात्र के दौरान जहां घरों और मंदिरों में धार्मिक आयोजन होते हैं, वहीं अस्पताल की मांग को लेकर मातृशक्ति को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने इसे क्षेत्र की नाराजगी का संकेत बताया।

20 अक्टूबर को देहरादून में जुटेंगे आंदोलनकारी

पदयात्रा के जरिए आंदोलनकारी शासन तक अपनी मांग पहुंचाने की तैयारी में हैं। 20 अक्टूबर को देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव प्रस्तावित है। आंदोलनकारियों की मांग है कि सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने के संबंध में शासनादेश जल्द जारी किया जाए।

मां चंडिका की पूजा-अर्चना के बाद आंदोलन का शंखनाद 20 अक्टूबर को सीएम कार्यालय के घेराव का ऐलान कर्णप्रयाग (चमोली)। चमोली जिले के सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने और शासनादेश जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। मांग पूरी नहीं होने से नाराज क्षेत्रीय जनता ने…

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कोटद्वार : नवरात्रि का प्रथम दिन, राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में शिक्षक संतोष सिंह नेगी द्वारा अपने विद्यालय में पढ़ने वाली दो मेधावी बालिकाओं को साइकिल प्रदान की गई।

संतोष सिंह नेगी ने बताया कि नवरात्रि का पर्व बालिकाओं के अलग-अलग रूपों को पूजने का पर्व है और यह एक मौका है, जब मेधावी बालिकाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस कारण उन्होंने अपने विद्यालय में क्लास 6 में पढ़ने वाली वैष्णवी और क्लास 9 में पढ़ने वाली वैशाली को नई साइकिल प्रदान की।

संतोष सिंह नेगी ने बताया कि अगर बालिकाओं को साइकिल प्रदान की जाए, तो प्रतिदिन ₹20 की बचत को हम आधार मानें, तो महीने में ₹500 और सालाना ₹6000 की बचत उस परिवार को होती है। और इस वजह से परिवार बालिकाओं की शिक्षा के अन्य आयामों पर खर्च कर सकता है।

संतोष सिंह नेगी ने बताया कि उनकी एमएड की सहपाठी रही जसवीर बजाज, जो कि वर्तमान में दुबई में कार्यरत हैं, के द्वारा यह सहयोग प्रदान किया गया है। पूर्व में गौरतलब है कि संतोष सिंह नेगी द्वारा जन सहयोग से अब तक ₹300000 मूल्य से ज्यादा की साइकिल मेधावी और जरूरतमंद बच्चों को प्रदान की जा चुकी हैं।

वर्ष 2016 से संतोष नेगी ने साइकिल देने का अभियान शुरू किया था और आज खुद से और जन सहयोग एवं अपने से सहयोग के कारण लगभग 3 लाख रुपये, तीन लाख से ज्यादा मूल्य की साइकिल प्रदान की जा चुकी हैं।

संतोष सिंह नेगी द्वारा अपनी शादी के अवसर पर भी ₹50000 मूल्य की साइकिलें 10 बालिकाओं को 2019 में प्रदान की जा चुकी हैं।

उन्होंने इसके साथ क्षेत्र की जनता एवं अन्य लोगों से अपील की है कि कई बालिकाएं और भी हैं, जिन्हें साइकिल की जरूरत है। अगर किसी नवरात्रि के शुभ अवसर पर कोई सज्जन सहयोग करना चाहे, तो उनसे संपर्क कर सकता है।

कोटद्वार : नवरात्रि का प्रथम दिन, राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में शिक्षक संतोष सिंह नेगी द्वारा अपने विद्यालय में पढ़ने वाली दो मेधावी बालिकाओं को साइकिल प्रदान की गई। संतोष सिंह नेगी ने बताया कि नवरात्रि का पर्व बालिकाओं के अलग-अलग रूपों को पूजने का पर्व है और यह एक मौका है, जब मेधावी बालिकाओं…

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देहरादून : उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय ने 9 अक्टूबर को विद्यालयी शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत विद्यार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से धनराशि भेजी जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव हीरा सिंह बसेड़ा की ओर से विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर शासनादेश जारी करने को कहा गया है। साथ ही, इसकी जानकारी जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घोषणा पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा सके।

 

 

विद्यार्थियों से संवाद के दौरान की थी घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रदेशभर से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से संवाद किया था। इस दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिजिटल संसाधनों की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों के 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की घोषणा की थी।

 

बैंक खातों में आएगी रकम, राशि का इंतजार

योजना के तहत विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए सीधे बैंक खाते में धनराशि दी जाएगी। हालांकि, प्रति विद्यार्थी मिलने वाली सहायता राशि, कुल लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। इनका विवरण शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले शासनादेश या दिशा-निर्देशों में सामने आने की उम्मीद है।

 

डिजिटल पढ़ाई में मिलेगी मदद

टैबलेट से विद्यार्थियों को ऑनलाइन लेक्चर, डिजिटल नोट्स और अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र में घोषणा संख्या 955/2026 का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि सचिव वित्त, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भी भेजी गई है। अब योजना को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई और शासनादेश जारी होने का इंतजार है।

 

देहरादून : उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और…
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देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता है। मलेशिया में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित पहले कॉमनवेल्थ स्कूल चेस टूर्नामेंट 2026 में काया ने अंडर-11 गर्ल्स रैपिड चेस श्रेणी में सिल्वर मेडल हासिल किया। महज 11 साल की उम्र में मिली इस उपलब्धि से देहरादून सहित पूरे उत्तराखण्ड में खुशी का माहौल है।

देहरादून के सीजेएम स्कूल में पढ़ने वाली काया ने 5 अक्टूबर को रैपिड चेस के मुकाबले संपन्न होने के बाद यह पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में कॉमनवेल्थ देशों के स्कूली खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में हिस्सा ले रहे हैं। काया ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा के दम पर अंडर-11 गर्ल्स वर्ग में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाया।

काया की इस सफलता की खास बात यह है कि वह पढ़ाई और शतरंज दोनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। कम उम्र में खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में भी उत्साह है।

अब क्लासिकल चेस में दिखाएंगी दम

रैपिड चेस में पदक जीतने के बाद काया की अगली चुनौती क्लासिकल चेस चैंपियनशिप है। टूर्नामेंट में क्लासिकल मुकाबलों की शुरुआत 6 अक्टूबर से हो रही है, जिसमें वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। रैपिड चेस की तुलना में क्लासिकल प्रारूप में खिलाड़ियों को अधिक समय मिलता है। इसमें गहरी रणनीति, धैर्य और सोच-समझकर चाल चलना अहम होता है।

काया के पिता पंकज ध्यानी के अनुसार, रैपिड चेस में सिल्वर मेडल जीतने के बाद काया का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी कोशिश क्लासिकल चेस में भी अच्छा प्रदर्शन करने की होगी।

काया ध्यानी की यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। 11 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। अब सभी की नजरें क्लासिकल चेस में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं।

देहरादून : उत्तराखण्ड की होनहार युवा शतरंज खिलाड़ी काया ध्यानी…
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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखण्ड की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री धामी शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखण्ड-2026’ कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद कर रहे थे ।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखण्ड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखण्ड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखण्ड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

कंटेंट क्रिएटर्स ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, कानून व्यवस्था, रिवर्स माइग्रेशन, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सभी सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उत्तराखण्ड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने संबंधी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखण्ड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। 

मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखण्ड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कंटेंट क्रिएटर्स के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।

हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड…
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पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया। इसमें उन्होंने मुख्य रूप से कीवी के उत्पादन सहित सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू, माल्टा सहित विभिन्न फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है।

दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई। वर्तमान में फार्म में कीवी के लगभग 250 पौधे हैं, जबकि सेब के 400 और नींबू-माल्टा के करीब 150 पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अन्य फल भी उगाए जा रहे हैं। दीपक ने बताया कि फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है। बागवानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई है।

दीपक नौटियाल का प्रयास केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फार्म में उत्पादित कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से उत्पाद निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार करने में योगदान देती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। महिला समूह बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद भी तैयार करते हैं। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से आती है। इसके अलावा कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन, महिला समूहों के माध्यम से उत्पाद तैयार करने और दिल्ली में पैकेजिंग के बाद बाजार तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।

दीपक नौटियाल बताते हैं कि फार्म में सामान्य दिनों में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को काम मिलता है। उनका कहना है कि खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिला समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पौड़ी : पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए…
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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन ने सिमल्ट गांव में चार परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। 4 अक्टूबर को हुए भूस्खलन में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से चार परिवार बेघर हो गए हैं। गांव के पास भूस्खलन के चलते अन्य परिवारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। आपदा की इस घड़ी में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की चमोली शाखा ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।

रेडक्रॉस की टीम सिमल्ट गांव पहुंची और प्रभावित परिवारों को तिरपाल, किचन सेट तथा कंबल वितरित किए। मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। राहत सामग्री से उन्हें मुश्किल हालात में कुछ सहारा मिला है।

प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए टेंट सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों का हालचाल जान रहे हैं और मदद कर रहे हैं, वहीं गांव के समीप भूस्खलन से अन्य परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

रेडक्रॉस की ओर से राहत सामग्री प्राप्त करने वालों में मुन्नालाल, कमला देवी, रीना देवी और विमला देवी शामिल रहे। इस दौरान ओम प्रकाश भट्ट, सचिव सुरेंद्र रावत, प्रदीप रावत, देव सिंह और शंकर बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकास खंड के भूस्खलन…