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चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस पर्यटन सीजन के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। हिमालय की गोद में स्थित इस अद्वितीय घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। करीब पांच महीने तक खुली रहने वाली घाटी में इस सीजन रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक पहुंचे, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।

वन क्षेत्राधिकारी आशीष जिरवान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सीजन फूलों की घाटी का दीदार करने वाले कुल 35,261 पर्यटकों में 34,996 भारतीय और 265 विदेशी सैलानी शामिल रहे। भारतीय पर्यटकों में 21,306 पुरुष, 8,604 महिलाएं, 18 वर्ष से अधिक आयु के 4,431 विद्यार्थी एवं शोधकर्ता तथा 12 वर्ष से अधिक आयु के 124 बच्चे रहे। इसके अलावा 531 वृद्ध पर्यटकों ने भी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। विदेशी पर्यटकों में 127 पुरुष और 138 महिलाएं शामिल थीं।

पर्यटकों की इस आवाजाही से वन विभाग को कुल 67 लाख 7 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को अत्यधिक बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए घाटी को एक दिन के लिए एहतियातन बंद रखा गया था। इसके बावजूद इस सीजन पर्यटकों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

फूलों की घाटी अपनी रंग-बिरंगी फूलों की सैकड़ों प्रजातियों, दुर्लभ वनस्पतियों, समृद्ध जैव विविधता और विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस वर्ष रिकॉर्ड पर्यटक आवक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर घाटी की लोकप्रियता और आकर्षण को रेखांकित किया है।

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का औपचारिक अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस की पहचान को नया स्वरूप देना मात्र प्रतीकों और वर्दी का बदलाव नहीं, बल्कि पुलिस बल की गौरवशाली परंपराओं, शौर्य, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल आदर्शों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नए प्रतीक गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी एहसास कराते हैं। इस नई पहचान का असली सम्मान तभी होगा जब हर नागरिक को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। उत्तराखण्ड पुलिस को भी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, अधिक प्रशिक्षित, दक्ष और सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है। हर अधिकारी और जवान को इन आदर्शों को अपने आचरण में अपनाना होगा। वर्दी का सम्मान आचरण से और जनता का विश्वास सेवा से मजबूत होता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इन गौरव चिह्नों का अनावरण विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री और राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। यह अवसर राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि आगामी 6 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से अलंकृत किया जाएगा। इस मौके पर पुलिस जवान नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड पुलिस अपनी नई पहचान के साथ जनसेवा, अनुशासन, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के नए मानक स्थापित करेगी।

नए गौरव चिह्नों की विशेषताएं

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। ये राष्ट्रीय गौरव, सत्य, न्याय, उत्कृष्टता और उत्तराखण्ड की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं।

पूर्व में प्रचलित तीन रंगों वाले क्षैतिज ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसमें मध्य में नया पुलिस प्रतीक चिह्न तथा लाल और स्वर्णिम किनारे शामिल हैं।

फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नए प्रतीक चिह्न के अनुरूप बदला गया है। पारंपरिक खाकी परिधान के साथ बहुरंगी सेरेमोनियल सैश, अलंकरण और विशिष्ट परेड साज-सज्जा को जोड़कर सेरेमोनियल वर्दी को नया रूप दिया गया है।

उत्तराखण्ड पुलिस का ध्वज पहले 4 अप्रैल 2008 को अनावरण किया गया था। बदलती चुनौतियों और बढ़ते दायित्वों को ध्यान में रखते हुए नए गौरव चिह्नों को तैयार किया गया, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को अनुमोदन दिया था।

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  • संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी किताबों के बजाय धरातल पर तलाश रहे हैं। भूगर्भ विज्ञान विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का दल इन दिनों चमोली से जोशीमठ के बीच विभिन्न संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर हिमालय की भूगर्भीय संरचना और पर्वत निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहा है।

फील्ड स्टडी के दौरान विद्यार्थी चट्टानों की बनावट, पर्वतों की संरचना और भूगर्भीय बदलावों का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में धरती के भीतर होने वाली हलचलों और उनके प्रभावों को समझना अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भूगर्भीय गतिविधियां पहाड़ों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं। स्थलीय निरीक्षण से उन्हें शोध के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल रही हैं।

छात्रा मीनाक्षी के अनुसार, कक्षाओं में पढ़े गए सिद्धांतों को पहाड़ों और चट्टानों के बीच प्रत्यक्ष देखना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे हिमालय की संरचना और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल रही है।

भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि भूगर्भ विज्ञान को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए फील्ड विजिट और स्थलीय निरीक्षण जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर हिमालय के निर्माण और उसकी भूगर्भीय संरचना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव, उनकी गति और उससे पैदा होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को समझाया जा रहा है। साथ ही इन प्रक्रियाओं का पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कराया जा रहा है।

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  • प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर हुई चर्चा
  • कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष का संकल्प

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अनुसूचित जाति/जनजाति इम्प्लाइज फेडरेशन की जिला शाखा चमोली की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। रविवार को अंबेडकर भवन गोपेश्वर में पौड़ी गढ़वाल मंडल के मंडलीय अध्यक्ष मांगे राम मौर्य की देखरेख में आयोजित बैठक में भरत कोठियाल को फेडरेशन का जिलाध्यक्ष और कुंवर सिंह रावत को महासचिव चुना गया।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, आउटसोर्सिंग, रोस्टर प्रणाली और निजीकरण के मुद्दे उठाते हुए कहा कि इन व्यवस्थाओं के चलते कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई।

सर्वसम्मति से गठित नई कार्यकारिणी में हरीश टम्टा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मीना आगरी और प्रकाश टम्टा को उपाध्यक्ष, बद्री कोहली को कोषाध्यक्ष, सुरेश राज को मीडिया प्रभारी और जगत राम को संगठन सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष भरत कोठियाल ने सभी सदस्यों का आभार जताते हुए कर्मचारी हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत बनाने तथा संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

इस दौरान दिनेश शाह, रोमेश शाह, पीएल बैछवाल, जीएल आर्य, जगदीश टम्टा, हरीश कुमार, कैलाश चन्द्रवाल, धनी आगरी, बलवंत राम शिवानी, जेएस रडवाल समेत जनपद के शिक्षक, कर्मचारी एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कई घंटे चले संयुक्त अभियान के बाद रेस्क्यू टीमों ने सभी शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद सभी पार्थिव शरीरों को हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया।

हादसे के बाद से ही घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया जा रहा था। दुर्घटनास्थल ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रेस्क्यू टीमों को शवों तक पहुंचने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्तों की कठिन बनावट और विषम परिस्थितियों के बावजूद बचाव दलों ने अभियान जारी रखा। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी रहीं।

रेस्क्यू टीमों के जवान पैदल ही कठिन पहाड़ी रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचे। इसके बाद सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया। यहां से शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जोशीमठ लाया गया। अस्पताल में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी हेलीपैड पहुंचाया गया। एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से सभी छह पार्थिव शरीरों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेज दिया गया है। वहां आगे की आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

इस हादसे के बाद दुर्गम क्षेत्र में चलाया गया रेस्क्यू अभियान सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। सेना से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अभियान को अंजाम दिया। सभी छह शवों को घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग और फिर हवाई मार्ग से ऋषिकेश पहुंचाने के साथ बचाव अभियान का यह महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

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  • कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई
  • मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

गोपेश्वर (चमोली)। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल गोपेश्वर परिसर में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेडक्रॉस के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल पहुंचने वाले अन्य लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व रेडक्रॉस शाखा के कार्यक्रम सचिव सुरेंद्र रावत और कोषाध्यक्ष चरण सिंह नेगी ने किया। अभियान के तहत सदस्यों ने अस्पताल परिसर के विभिन्न स्थानों पर सफाई की। परिसर में फैले कूड़े और गंदगी को हटाने के साथ लोगों से स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की गई।

इस मौके पर रेडक्रॉस सदस्यों ने कहा कि अस्पताल ऐसा सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना बेहद जरूरी है। गंदगी से संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष दिवस या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाना, कूड़ेदान का उपयोग करना और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल हैं। सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकती है।

रेडक्रॉस की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और सार्वजनिक संस्थानों में साफ-सफाई के महत्व को रेखांकित करना रहा। अभियान में सुनील बिष्ट, उषा रावत, महेंद्र सिंह नेगी, शंकर बिष्ट, रेखा नेगी, जयंती  रावत समेत रेडक्रॉस शाखा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

 

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  • राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी
  • उक्रांद ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर शुरू की चुनावी तैयारी

गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अभी प्रत्याशियों के चयन पर मंथन में जुटी हैं, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से अपना चुनावी दांव चल दिया है। पार्टी ने युवा नेता आशीष नेगी को प्रत्याशी घोषित कर जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक पर चुनावी तैयारी का आगाज कर दिया है। प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 16 पर पहली सूची जारी कर उक्रांद ने राष्ट्रीय दलों से पहले मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई है।

कर्णप्रयाग सीट को लेकर उक्रांद की यह पहल केवल प्रत्याशी घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी ने राष्ट्रीय दलों से पहले चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास किया है। अब आशीष नेगी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए काफी समय मिलेगा। वे क्षेत्र में जनसंपर्क, संगठन विस्तार और स्थानीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाने पर काम कर सकते हैं। उक्रांद नेतृत्व ने भी घोषित प्रत्याशियों को घर-घर जाकर पार्टी के एजेंडे से मतदाताओं को अवगत कराने की अपील की है।

हालांकि कर्णप्रयाग में भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा के अनिल नौटियाल को 28,911 और कांग्रेस के मुकेश नेगी को 22,196 वोट मिले थे, वहीं उक्रांद के प्रत्याशी उमेश खंडूड़ी को महज 464 वोट मिले। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी सीमित चुनावी मौजूदगी को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की होगी।

उक्रांद की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पार्टी ने चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी घोषित कर उन्हें तैयारी का समय दिया है। लेकिन केवल पहले प्रत्याशी घोषित कर देना चुनावी जमीन तैयार होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय मुद्दों पर लगातार संघर्ष जरूरी होगा। कर्णप्रयाग में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर पार्टी को अपना स्पष्ट पक्ष जनता के बीच रखना होगा।

दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के लिए भी यह घोषणा एक संकेत है कि चुनावी मुकाबला केवल दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीमित रहने की स्थिति नहीं है। उक्रांद की मौजूदगी से क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक विमर्श का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका असर किस दल के मतों पर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। यह प्रत्याशी की सक्रियता, संगठन की ताकत और चुनाव के समय बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

चमोली की बदरीनाथ और थराली सीटों पर उक्रांद ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में जिले में पार्टी की आगे की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दूसरी सूची में इन सीटों पर भी मजबूत चेहरे सामने आते हैं तो उक्रांद जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी चुनावी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल कर्णप्रयाग से आशीष नेगी की घोषणा ने चुनावी चर्चा को समय से पहले शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस के लिए अब प्रत्याशी चयन के साथ ही क्षेत्रीय दलों की सक्रियता को भी अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

 

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चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस पर्यटन सीजन के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। हिमालय की गोद में स्थित इस अद्वितीय घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। करीब पांच महीने तक खुली रहने वाली घाटी में इस सीजन रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक पहुंचे, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।

वन क्षेत्राधिकारी आशीष जिरवान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सीजन फूलों की घाटी का दीदार करने वाले कुल 35,261 पर्यटकों में 34,996 भारतीय और 265 विदेशी सैलानी शामिल रहे। भारतीय पर्यटकों में 21,306 पुरुष, 8,604 महिलाएं, 18 वर्ष से अधिक आयु के 4,431 विद्यार्थी एवं शोधकर्ता तथा 12 वर्ष से अधिक आयु के 124 बच्चे रहे। इसके अलावा 531 वृद्ध पर्यटकों ने भी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। विदेशी पर्यटकों में 127 पुरुष और 138 महिलाएं शामिल थीं।

पर्यटकों की इस आवाजाही से वन विभाग को कुल 67 लाख 7 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को अत्यधिक बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए घाटी को एक दिन के लिए एहतियातन बंद रखा गया था। इसके बावजूद इस सीजन पर्यटकों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

फूलों की घाटी अपनी रंग-बिरंगी फूलों की सैकड़ों प्रजातियों, दुर्लभ वनस्पतियों, समृद्ध जैव विविधता और विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस वर्ष रिकॉर्ड पर्यटक आवक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर घाटी की लोकप्रियता और आकर्षण को रेखांकित किया है।

चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस…
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का औपचारिक अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस की पहचान को नया स्वरूप देना मात्र प्रतीकों और वर्दी का बदलाव नहीं, बल्कि पुलिस बल की गौरवशाली परंपराओं, शौर्य, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल आदर्शों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नए प्रतीक गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी एहसास कराते हैं। इस नई पहचान का असली सम्मान तभी होगा जब हर नागरिक को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। उत्तराखण्ड पुलिस को भी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, अधिक प्रशिक्षित, दक्ष और सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है। हर अधिकारी और जवान को इन आदर्शों को अपने आचरण में अपनाना होगा। वर्दी का सम्मान आचरण से और जनता का विश्वास सेवा से मजबूत होता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इन गौरव चिह्नों का अनावरण विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री और राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। यह अवसर राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि आगामी 6 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से अलंकृत किया जाएगा। इस मौके पर पुलिस जवान नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड पुलिस अपनी नई पहचान के साथ जनसेवा, अनुशासन, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के नए मानक स्थापित करेगी।

नए गौरव चिह्नों की विशेषताएं

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। ये राष्ट्रीय गौरव, सत्य, न्याय, उत्कृष्टता और उत्तराखण्ड की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं।

पूर्व में प्रचलित तीन रंगों वाले क्षैतिज ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसमें मध्य में नया पुलिस प्रतीक चिह्न तथा लाल और स्वर्णिम किनारे शामिल हैं।

फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नए प्रतीक चिह्न के अनुरूप बदला गया है। पारंपरिक खाकी परिधान के साथ बहुरंगी सेरेमोनियल सैश, अलंकरण और विशिष्ट परेड साज-सज्जा को जोड़कर सेरेमोनियल वर्दी को नया रूप दिया गया है।

उत्तराखण्ड पुलिस का ध्वज पहले 4 अप्रैल 2008 को अनावरण किया गया था। बदलती चुनौतियों और बढ़ते दायित्वों को ध्यान में रखते हुए नए गौरव चिह्नों को तैयार किया गया, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को अनुमोदन दिया था।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास…
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  • संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी किताबों के बजाय धरातल पर तलाश रहे हैं। भूगर्भ विज्ञान विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का दल इन दिनों चमोली से जोशीमठ के बीच विभिन्न संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर हिमालय की भूगर्भीय संरचना और पर्वत निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहा है।

फील्ड स्टडी के दौरान विद्यार्थी चट्टानों की बनावट, पर्वतों की संरचना और भूगर्भीय बदलावों का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में धरती के भीतर होने वाली हलचलों और उनके प्रभावों को समझना अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भूगर्भीय गतिविधियां पहाड़ों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं। स्थलीय निरीक्षण से उन्हें शोध के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल रही हैं।

छात्रा मीनाक्षी के अनुसार, कक्षाओं में पढ़े गए सिद्धांतों को पहाड़ों और चट्टानों के बीच प्रत्यक्ष देखना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे हिमालय की संरचना और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल रही है।

भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि भूगर्भ विज्ञान को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए फील्ड विजिट और स्थलीय निरीक्षण जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर हिमालय के निर्माण और उसकी भूगर्भीय संरचना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव, उनकी गति और उससे पैदा होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को समझाया जा रहा है। साथ ही इन प्रक्रियाओं का पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कराया जा रहा है।

संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे…
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  • प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर हुई चर्चा
  • कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष का संकल्प

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अनुसूचित जाति/जनजाति इम्प्लाइज फेडरेशन की जिला शाखा चमोली की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। रविवार को अंबेडकर भवन गोपेश्वर में पौड़ी गढ़वाल मंडल के मंडलीय अध्यक्ष मांगे राम मौर्य की देखरेख में आयोजित बैठक में भरत कोठियाल को फेडरेशन का जिलाध्यक्ष और कुंवर सिंह रावत को महासचिव चुना गया।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, आउटसोर्सिंग, रोस्टर प्रणाली और निजीकरण के मुद्दे उठाते हुए कहा कि इन व्यवस्थाओं के चलते कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई।

सर्वसम्मति से गठित नई कार्यकारिणी में हरीश टम्टा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मीना आगरी और प्रकाश टम्टा को उपाध्यक्ष, बद्री कोहली को कोषाध्यक्ष, सुरेश राज को मीडिया प्रभारी और जगत राम को संगठन सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष भरत कोठियाल ने सभी सदस्यों का आभार जताते हुए कर्मचारी हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत बनाने तथा संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

इस दौरान दिनेश शाह, रोमेश शाह, पीएल बैछवाल, जीएल आर्य, जगदीश टम्टा, हरीश कुमार, कैलाश चन्द्रवाल, धनी आगरी, बलवंत राम शिवानी, जेएस रडवाल समेत जनपद के शिक्षक, कर्मचारी एवं अधिकारी मौजूद रहे।

प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर…
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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कई घंटे चले संयुक्त अभियान के बाद रेस्क्यू टीमों ने सभी शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद सभी पार्थिव शरीरों को हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया।

हादसे के बाद से ही घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया जा रहा था। दुर्घटनास्थल ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रेस्क्यू टीमों को शवों तक पहुंचने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्तों की कठिन बनावट और विषम परिस्थितियों के बावजूद बचाव दलों ने अभियान जारी रखा। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी रहीं।

रेस्क्यू टीमों के जवान पैदल ही कठिन पहाड़ी रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचे। इसके बाद सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया। यहां से शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जोशीमठ लाया गया। अस्पताल में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी हेलीपैड पहुंचाया गया। एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से सभी छह पार्थिव शरीरों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेज दिया गया है। वहां आगे की आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

इस हादसे के बाद दुर्गम क्षेत्र में चलाया गया रेस्क्यू अभियान सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। सेना से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अभियान को अंजाम दिया। सभी छह शवों को घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग और फिर हवाई मार्ग से ऋषिकेश पहुंचाने के साथ बचाव अभियान का यह महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर…
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  • कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई
  • मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

गोपेश्वर (चमोली)। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल गोपेश्वर परिसर में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेडक्रॉस के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल पहुंचने वाले अन्य लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व रेडक्रॉस शाखा के कार्यक्रम सचिव सुरेंद्र रावत और कोषाध्यक्ष चरण सिंह नेगी ने किया। अभियान के तहत सदस्यों ने अस्पताल परिसर के विभिन्न स्थानों पर सफाई की। परिसर में फैले कूड़े और गंदगी को हटाने के साथ लोगों से स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की गई।

इस मौके पर रेडक्रॉस सदस्यों ने कहा कि अस्पताल ऐसा सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना बेहद जरूरी है। गंदगी से संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष दिवस या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाना, कूड़ेदान का उपयोग करना और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल हैं। सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकती है।

रेडक्रॉस की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और सार्वजनिक संस्थानों में साफ-सफाई के महत्व को रेखांकित करना रहा। अभियान में सुनील बिष्ट, उषा रावत, महेंद्र सिंह नेगी, शंकर बिष्ट, रेखा नेगी, जयंती  रावत समेत रेडक्रॉस शाखा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

 

कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई मरीजों और…
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  • राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी
  • उक्रांद ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर शुरू की चुनावी तैयारी

गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अभी प्रत्याशियों के चयन पर मंथन में जुटी हैं, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से अपना चुनावी दांव चल दिया है। पार्टी ने युवा नेता आशीष नेगी को प्रत्याशी घोषित कर जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक पर चुनावी तैयारी का आगाज कर दिया है। प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 16 पर पहली सूची जारी कर उक्रांद ने राष्ट्रीय दलों से पहले मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई है।

कर्णप्रयाग सीट को लेकर उक्रांद की यह पहल केवल प्रत्याशी घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी ने राष्ट्रीय दलों से पहले चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास किया है। अब आशीष नेगी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए काफी समय मिलेगा। वे क्षेत्र में जनसंपर्क, संगठन विस्तार और स्थानीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाने पर काम कर सकते हैं। उक्रांद नेतृत्व ने भी घोषित प्रत्याशियों को घर-घर जाकर पार्टी के एजेंडे से मतदाताओं को अवगत कराने की अपील की है।

हालांकि कर्णप्रयाग में भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा के अनिल नौटियाल को 28,911 और कांग्रेस के मुकेश नेगी को 22,196 वोट मिले थे, वहीं उक्रांद के प्रत्याशी उमेश खंडूड़ी को महज 464 वोट मिले। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी सीमित चुनावी मौजूदगी को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की होगी।

उक्रांद की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पार्टी ने चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी घोषित कर उन्हें तैयारी का समय दिया है। लेकिन केवल पहले प्रत्याशी घोषित कर देना चुनावी जमीन तैयार होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय मुद्दों पर लगातार संघर्ष जरूरी होगा। कर्णप्रयाग में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर पार्टी को अपना स्पष्ट पक्ष जनता के बीच रखना होगा।

दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के लिए भी यह घोषणा एक संकेत है कि चुनावी मुकाबला केवल दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीमित रहने की स्थिति नहीं है। उक्रांद की मौजूदगी से क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक विमर्श का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका असर किस दल के मतों पर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। यह प्रत्याशी की सक्रियता, संगठन की ताकत और चुनाव के समय बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

चमोली की बदरीनाथ और थराली सीटों पर उक्रांद ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में जिले में पार्टी की आगे की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दूसरी सूची में इन सीटों पर भी मजबूत चेहरे सामने आते हैं तो उक्रांद जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी चुनावी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल कर्णप्रयाग से आशीष नेगी की घोषणा ने चुनावी चर्चा को समय से पहले शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस के लिए अब प्रत्याशी चयन के साथ ही क्षेत्रीय दलों की सक्रियता को भी अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

 

राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी उक्रांद ने…
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  • मुख्यमंत्री धामी ने प्रमुख संगठन सम्मेलन में की चार घोषणाएं
  • आजीविका मिशन की ब्लॉक स्तरीय समिति में भी शामिल होंगे क्षेत्र पंचायत प्रमुख

देहरादून। प्रदेश की क्षेत्र पंचायतों को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। क्षेत्र पंचायत निधि को दोबारा शुरू करने और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में ब्लॉक प्रमुख को शामिल किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को नगरीय निकायों में शामिल करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत से भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास में ब्लॉक प्रमुख और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं और स्थानीय समस्याओं तथा जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में उनकी भागीदारी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना गांवों को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने की अपील की। उन्होंने पंचायत निधि के उपयोग में पारदर्शिता, विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

सम्मेलन में प्रदेश ब्लॉक प्रमुख संगठन के अध्यक्ष राजीव कंडारी, महासचिव गणेश चंदोला, ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित प्रदेशभर के ब्लॉक प्रमुख और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रमुख संगठन सम्मेलन में की चार घोषणाएं…
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चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस पर्यटन सीजन के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। हिमालय की गोद में स्थित इस अद्वितीय घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। करीब पांच महीने तक खुली रहने वाली घाटी में इस सीजन रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक पहुंचे, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।

वन क्षेत्राधिकारी आशीष जिरवान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सीजन फूलों की घाटी का दीदार करने वाले कुल 35,261 पर्यटकों में 34,996 भारतीय और 265 विदेशी सैलानी शामिल रहे। भारतीय पर्यटकों में 21,306 पुरुष, 8,604 महिलाएं, 18 वर्ष से अधिक आयु के 4,431 विद्यार्थी एवं शोधकर्ता तथा 12 वर्ष से अधिक आयु के 124 बच्चे रहे। इसके अलावा 531 वृद्ध पर्यटकों ने भी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। विदेशी पर्यटकों में 127 पुरुष और 138 महिलाएं शामिल थीं।

पर्यटकों की इस आवाजाही से वन विभाग को कुल 67 लाख 7 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को अत्यधिक बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए घाटी को एक दिन के लिए एहतियातन बंद रखा गया था। इसके बावजूद इस सीजन पर्यटकों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

फूलों की घाटी अपनी रंग-बिरंगी फूलों की सैकड़ों प्रजातियों, दुर्लभ वनस्पतियों, समृद्ध जैव विविधता और विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस वर्ष रिकॉर्ड पर्यटक आवक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर घाटी की लोकप्रियता और आकर्षण को रेखांकित किया है।

चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस पर्यटन सीजन के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। हिमालय की गोद में स्थित इस अद्वितीय घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। करीब पांच महीने तक खुली रहने वाली घाटी में इस सीजन रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक…

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का औपचारिक अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस की पहचान को नया स्वरूप देना मात्र प्रतीकों और वर्दी का बदलाव नहीं, बल्कि पुलिस बल की गौरवशाली परंपराओं, शौर्य, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल आदर्शों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नए प्रतीक गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी एहसास कराते हैं। इस नई पहचान का असली सम्मान तभी होगा जब हर नागरिक को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। उत्तराखण्ड पुलिस को भी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, अधिक प्रशिक्षित, दक्ष और सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है। हर अधिकारी और जवान को इन आदर्शों को अपने आचरण में अपनाना होगा। वर्दी का सम्मान आचरण से और जनता का विश्वास सेवा से मजबूत होता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इन गौरव चिह्नों का अनावरण विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री और राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। यह अवसर राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि आगामी 6 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से अलंकृत किया जाएगा। इस मौके पर पुलिस जवान नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड पुलिस अपनी नई पहचान के साथ जनसेवा, अनुशासन, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के नए मानक स्थापित करेगी।

नए गौरव चिह्नों की विशेषताएं

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। ये राष्ट्रीय गौरव, सत्य, न्याय, उत्कृष्टता और उत्तराखण्ड की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं।

पूर्व में प्रचलित तीन रंगों वाले क्षैतिज ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसमें मध्य में नया पुलिस प्रतीक चिह्न तथा लाल और स्वर्णिम किनारे शामिल हैं।

फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नए प्रतीक चिह्न के अनुरूप बदला गया है। पारंपरिक खाकी परिधान के साथ बहुरंगी सेरेमोनियल सैश, अलंकरण और विशिष्ट परेड साज-सज्जा को जोड़कर सेरेमोनियल वर्दी को नया रूप दिया गया है।

उत्तराखण्ड पुलिस का ध्वज पहले 4 अप्रैल 2008 को अनावरण किया गया था। बदलती चुनौतियों और बढ़ते दायित्वों को ध्यान में रखते हुए नए गौरव चिह्नों को तैयार किया गया, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को अनुमोदन दिया था।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का औपचारिक अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए…

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  • संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी किताबों के बजाय धरातल पर तलाश रहे हैं। भूगर्भ विज्ञान विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का दल इन दिनों चमोली से जोशीमठ के बीच विभिन्न संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर हिमालय की भूगर्भीय संरचना और पर्वत निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहा है।

फील्ड स्टडी के दौरान विद्यार्थी चट्टानों की बनावट, पर्वतों की संरचना और भूगर्भीय बदलावों का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में धरती के भीतर होने वाली हलचलों और उनके प्रभावों को समझना अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भूगर्भीय गतिविधियां पहाड़ों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं। स्थलीय निरीक्षण से उन्हें शोध के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल रही हैं।

छात्रा मीनाक्षी के अनुसार, कक्षाओं में पढ़े गए सिद्धांतों को पहाड़ों और चट्टानों के बीच प्रत्यक्ष देखना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे हिमालय की संरचना और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल रही है।

भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि भूगर्भ विज्ञान को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए फील्ड विजिट और स्थलीय निरीक्षण जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर हिमालय के निर्माण और उसकी भूगर्भीय संरचना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव, उनकी गति और उससे पैदा होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को समझाया जा रहा है। साथ ही इन प्रक्रियाओं का पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कराया जा रहा है।

संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी…

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  • प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर हुई चर्चा
  • कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष का संकल्प

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अनुसूचित जाति/जनजाति इम्प्लाइज फेडरेशन की जिला शाखा चमोली की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। रविवार को अंबेडकर भवन गोपेश्वर में पौड़ी गढ़वाल मंडल के मंडलीय अध्यक्ष मांगे राम मौर्य की देखरेख में आयोजित बैठक में भरत कोठियाल को फेडरेशन का जिलाध्यक्ष और कुंवर सिंह रावत को महासचिव चुना गया।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, आउटसोर्सिंग, रोस्टर प्रणाली और निजीकरण के मुद्दे उठाते हुए कहा कि इन व्यवस्थाओं के चलते कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई।

सर्वसम्मति से गठित नई कार्यकारिणी में हरीश टम्टा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मीना आगरी और प्रकाश टम्टा को उपाध्यक्ष, बद्री कोहली को कोषाध्यक्ष, सुरेश राज को मीडिया प्रभारी और जगत राम को संगठन सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष भरत कोठियाल ने सभी सदस्यों का आभार जताते हुए कर्मचारी हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत बनाने तथा संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

इस दौरान दिनेश शाह, रोमेश शाह, पीएल बैछवाल, जीएल आर्य, जगदीश टम्टा, हरीश कुमार, कैलाश चन्द्रवाल, धनी आगरी, बलवंत राम शिवानी, जेएस रडवाल समेत जनपद के शिक्षक, कर्मचारी एवं अधिकारी मौजूद रहे।

प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर हुई चर्चा कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष का संकल्प गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अनुसूचित जाति/जनजाति इम्प्लाइज फेडरेशन की जिला शाखा चमोली की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। रविवार को अंबेडकर भवन गोपेश्वर में पौड़ी गढ़वाल मंडल के मंडलीय अध्यक्ष मांगे राम मौर्य की देखरेख…

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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कई घंटे चले संयुक्त अभियान के बाद रेस्क्यू टीमों ने सभी शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद सभी पार्थिव शरीरों को हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया।

हादसे के बाद से ही घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया जा रहा था। दुर्घटनास्थल ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रेस्क्यू टीमों को शवों तक पहुंचने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्तों की कठिन बनावट और विषम परिस्थितियों के बावजूद बचाव दलों ने अभियान जारी रखा। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी रहीं।

रेस्क्यू टीमों के जवान पैदल ही कठिन पहाड़ी रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचे। इसके बाद सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया। यहां से शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जोशीमठ लाया गया। अस्पताल में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी हेलीपैड पहुंचाया गया। एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से सभी छह पार्थिव शरीरों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेज दिया गया है। वहां आगे की आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

इस हादसे के बाद दुर्गम क्षेत्र में चलाया गया रेस्क्यू अभियान सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। सेना से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अभियान को अंजाम दिया। सभी छह शवों को घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग और फिर हवाई मार्ग से ऋषिकेश पहुंचाने के साथ बचाव अभियान का यह महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कई घंटे चले संयुक्त अभियान के बाद रेस्क्यू टीमों ने सभी शवों को सड़क मार्ग तक…

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  • कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई
  • मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

गोपेश्वर (चमोली)। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल गोपेश्वर परिसर में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेडक्रॉस के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल पहुंचने वाले अन्य लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व रेडक्रॉस शाखा के कार्यक्रम सचिव सुरेंद्र रावत और कोषाध्यक्ष चरण सिंह नेगी ने किया। अभियान के तहत सदस्यों ने अस्पताल परिसर के विभिन्न स्थानों पर सफाई की। परिसर में फैले कूड़े और गंदगी को हटाने के साथ लोगों से स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की गई।

इस मौके पर रेडक्रॉस सदस्यों ने कहा कि अस्पताल ऐसा सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना बेहद जरूरी है। गंदगी से संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष दिवस या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाना, कूड़ेदान का उपयोग करना और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल हैं। सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकती है।

रेडक्रॉस की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और सार्वजनिक संस्थानों में साफ-सफाई के महत्व को रेखांकित करना रहा। अभियान में सुनील बिष्ट, उषा रावत, महेंद्र सिंह नेगी, शंकर बिष्ट, रेखा नेगी, जयंती  रावत समेत रेडक्रॉस शाखा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

 

कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक गोपेश्वर (चमोली)। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल गोपेश्वर परिसर में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेडक्रॉस के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण…

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  • राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी
  • उक्रांद ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर शुरू की चुनावी तैयारी

गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अभी प्रत्याशियों के चयन पर मंथन में जुटी हैं, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से अपना चुनावी दांव चल दिया है। पार्टी ने युवा नेता आशीष नेगी को प्रत्याशी घोषित कर जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक पर चुनावी तैयारी का आगाज कर दिया है। प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 16 पर पहली सूची जारी कर उक्रांद ने राष्ट्रीय दलों से पहले मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई है।

कर्णप्रयाग सीट को लेकर उक्रांद की यह पहल केवल प्रत्याशी घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी ने राष्ट्रीय दलों से पहले चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास किया है। अब आशीष नेगी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए काफी समय मिलेगा। वे क्षेत्र में जनसंपर्क, संगठन विस्तार और स्थानीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाने पर काम कर सकते हैं। उक्रांद नेतृत्व ने भी घोषित प्रत्याशियों को घर-घर जाकर पार्टी के एजेंडे से मतदाताओं को अवगत कराने की अपील की है।

हालांकि कर्णप्रयाग में भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा के अनिल नौटियाल को 28,911 और कांग्रेस के मुकेश नेगी को 22,196 वोट मिले थे, वहीं उक्रांद के प्रत्याशी उमेश खंडूड़ी को महज 464 वोट मिले। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी सीमित चुनावी मौजूदगी को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की होगी।

उक्रांद की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पार्टी ने चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी घोषित कर उन्हें तैयारी का समय दिया है। लेकिन केवल पहले प्रत्याशी घोषित कर देना चुनावी जमीन तैयार होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय मुद्दों पर लगातार संघर्ष जरूरी होगा। कर्णप्रयाग में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर पार्टी को अपना स्पष्ट पक्ष जनता के बीच रखना होगा।

दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के लिए भी यह घोषणा एक संकेत है कि चुनावी मुकाबला केवल दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीमित रहने की स्थिति नहीं है। उक्रांद की मौजूदगी से क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक विमर्श का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका असर किस दल के मतों पर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। यह प्रत्याशी की सक्रियता, संगठन की ताकत और चुनाव के समय बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

चमोली की बदरीनाथ और थराली सीटों पर उक्रांद ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में जिले में पार्टी की आगे की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दूसरी सूची में इन सीटों पर भी मजबूत चेहरे सामने आते हैं तो उक्रांद जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी चुनावी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल कर्णप्रयाग से आशीष नेगी की घोषणा ने चुनावी चर्चा को समय से पहले शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस के लिए अब प्रत्याशी चयन के साथ ही क्षेत्रीय दलों की सक्रियता को भी अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

 

राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी उक्रांद ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर शुरू की चुनावी तैयारी गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अभी प्रत्याशियों के चयन पर मंथन में जुटी हैं, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से अपना चुनावी…

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  • मुख्यमंत्री धामी ने प्रमुख संगठन सम्मेलन में की चार घोषणाएं
  • आजीविका मिशन की ब्लॉक स्तरीय समिति में भी शामिल होंगे क्षेत्र पंचायत प्रमुख

देहरादून। प्रदेश की क्षेत्र पंचायतों को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। क्षेत्र पंचायत निधि को दोबारा शुरू करने और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में ब्लॉक प्रमुख को शामिल किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को नगरीय निकायों में शामिल करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत से भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास में ब्लॉक प्रमुख और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं और स्थानीय समस्याओं तथा जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में उनकी भागीदारी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना गांवों को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने की अपील की। उन्होंने पंचायत निधि के उपयोग में पारदर्शिता, विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

सम्मेलन में प्रदेश ब्लॉक प्रमुख संगठन के अध्यक्ष राजीव कंडारी, महासचिव गणेश चंदोला, ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित प्रदेशभर के ब्लॉक प्रमुख और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रमुख संगठन सम्मेलन में की चार घोषणाएं आजीविका मिशन की ब्लॉक स्तरीय समिति में भी शामिल होंगे क्षेत्र पंचायत प्रमुख देहरादून। प्रदेश की क्षेत्र पंचायतों को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। क्षेत्र पंचायत निधि को दोबारा शुरू…

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  • सात ट्रैकर्स और एक गाइड का अब तक नहीं मिला सुराग
  • बर्फबारी और खराब परिस्थितियों से सर्च अभियान में मुश्किल

देहरादून। उत्तरकाशी के केदारताल क्षेत्र में लापता सात ट्रैकर्स और एक गाइड की तलाश के लिए एसडीआरएफ का सर्च अभियान जारी है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में अत्यधिक बर्फबारी और विषम मौसम के चलते तलाशी अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में एसडीआरएफ ने हेलीकॉप्टर की मदद से केदारताल क्षेत्र की दो बार हवाई रेकी की, लेकिन लापता लोगों या उनके टेंट का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाया।

एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष पर्वतारोहण टीम को अभियान में लगाया गया है। इससे पहले एसडीआरएफ की गंगोत्री टीम के जवान केदारताल क्षेत्र में पहुंचकर रेकी कर चुके हैं, लेकिन भारी बर्फबारी और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सर्च अभियान आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

इसके बाद हेलीकॉप्टर से हवाई तलाश का निर्णय लिया गया। एसडीआरएफ के हेड कांस्टेबल रवि चौहान और कांस्टेबल दीपक पंत हेलीकॉप्टर से हर्षिल पहुंचे। यहां से हेलीकॉप्टर के जरिए केदारताल क्षेत्र की दो बार सघन हवाई रेकी की गई। हालांकि इस दौरान लापता ट्रैकर्स और गाइड के साथ ही उनके टेंट का भी कोई स्पष्ट दृश्य संकेत नहीं मिला।

एसडीआरएफ ने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए वाहिनी मुख्यालय से एक अतिरिक्त टीम आवश्यक बचाव और पर्वतारोहण उपकरणों के साथ रवाना की है। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल होने पर यह टीम सर्च अभियान में जुटेगी। फिलहाल एसडीआरएफ अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार कर रही है।

दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी के बीच आठ लोगों की तलाश चुनौती बनी हुई है। अब अभियान की अगली दिशा मौसम और क्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

सात ट्रैकर्स और एक गाइड का अब तक नहीं मिला सुराग बर्फबारी और खराब परिस्थितियों से सर्च अभियान में मुश्किल देहरादून। उत्तरकाशी के केदारताल क्षेत्र में लापता सात ट्रैकर्स और एक गाइड की तलाश के लिए एसडीआरएफ का सर्च अभियान जारी है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में अत्यधिक बर्फबारी और विषम मौसम के चलते तलाशी अभियान…

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कोटद्वार: महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रविवार को कोटद्वार स्थित बावर्ची ग्राउंड्स में आयोजित ‘शक्ति संगम’ मिनी मेला उत्साह के साथ संपन्न हुआ। ‘Empowering Women, Growing Together’ यानी महिलाओं को सशक्त बनाने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की थीम पर आयोजित इस एक दिवसीय मेले में महिला उद्यमियों ने अपने हुनर, उत्पादों और व्यवसाय का प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चले इस मेले में प्रवेश निशुल्क रखा गया था।

 

 

मेले में हैंडमेड ज्वेलरी, रेजिन आर्ट, क्रोशिया उत्पाद, सेंटेड कैंडल्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, मेकअप, सैलून सेवाओं, गार्डनिंग सहित विभिन्न रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े स्टॉल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने, नए ग्राहकों तक पहुंचने और अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

 

इस आयोजन की खासियत यह रही कि यहां केवल उत्पादों की बिक्री ही नहीं हुई, बल्कि महिलाओं ने अपने उद्यम शुरू करने के अनुभव, चुनौतियों और सफलता की कहानियां भी साझा कीं। मेले में बातचीत के दौरान तीन महिला उद्यमियों ने बताया कि किस तरह छोटे स्तर से शुरू किया गया काम धीरे-धीरे उनकी पहचान बन रहा है।

 

लंदन से सीखी शेफिंग, कोटद्वार में जापानी-गढ़वाली स्वाद का संगम

 

 

मेले में मौजूद शेफ अनिवर्ती भट्ट ने बताया कि महिलाओं को एक मंच पर लाने का विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से उन महिलाओं को अपने उत्पाद और ब्रांड लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है, जिनका कारोबार अभी तक घर या आसपास के क्षेत्र तक ही सीमित था।

 

अनिवर्ती स्वयं भी उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख चुकी हैं। उन्होंने लंदन में छह साल बिताए और वहां से शेफिंग की पढ़ाई की। अब वह कोटद्वार में जापानी थीम पर आधारित अपना कैफे ‘अमामी’ शुरू कर रही हैं। उनकी कोशिश जापानी खानपान को गढ़वाली संस्कृति के साथ जोड़ने की है। इसके तहत मेन्यू में बुरांश की आइसक्रीम, बुरांश का शरबत और जापानी डिश रामेन को शामिल किया गया है।

 

नए उद्यमियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “बस शुरुआत कर दो, चीजें धीरे-धीरे अपने आप बनती जाती हैं।”

 

500 रुपये से शुरू किया रेजिन आर्ट का सफर

 

मेले में ‘Resin by Nikita Rawat’ के नाम से अपना स्टॉल लगाने वाली निकिता रावत ने बताया कि उन्होंने कॉलेज के प्रथम वर्ष में ही अपने इस काम की शुरुआत कर दी थी। जयपुर में पढ़ाई के दौरान दूसरे लोगों को अपने व्यवसाय और कला को आगे बढ़ाते देखकर उन्हें भी अपना हुनर व्यवसाय में बदलने की प्रेरणा मिली।

 

 

निकिता ने महज 500 रुपये की पॉकेट मनी से रेजिन आर्ट का काम शुरू किया। उन्होंने इसके लिए किसी संस्थान से प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि ऑनलाइन माध्यमों और यूट्यूब वीडियो की मदद से खुद ही यह कला सीखी। वह घर से ही अपने उत्पाद तैयार करती हैं और अब सेंटेड कैंडल्स सहित विभिन्न रचनात्मक उत्पाद भी बनाती हैं।

 

निकिता के अनुसार, कोटद्वार में रेजिन आर्ट का काम अभी सीमित स्तर पर है, इसलिए लोगों के लिए उनके उत्पाद कुछ अलग और नया अनुभव लेकर आते हैं। उनके इस सफर में परिवार भी पूरा सहयोग करता है। उनके माता-पिता और बहन भी काम में हाथ बंटाते हैं। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को संदेश दिया कि किसी भी काम को शुरू करने के लिए बड़े निवेश से ज्यादा जरूरी लगन और शुरुआत करने का साहस है।

 

बच्चों के प्रोत्साहन से क्रोशिया के हुनर को मिली नई पहचान

 

मेले में स्वाति शाह ने अपने क्रोशिया से तैयार किए गए आकर्षक उत्पादों का स्टॉल लगाया। वह पर्स, मफलर, रबर बैंड, हेयर क्लिप और ईयररिंग्स सहित कई तरह की वस्तुएं तैयार करती हैं। उनकी खासियत यह है कि ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार उत्पादों को कस्टमाइज भी करवा सकते हैं।

 

 

स्वाति ने बताया कि पहले वह घर पर ही थोड़ा-बहुत क्रोशिया का काम करती थीं, लेकिन उनके बच्चों ने उन्हें अपने हुनर को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने यूट्यूब और व्हाट्सऐप स्टेटस के माध्यम से अपने काम का प्रचार शुरू किया।

 

उन्होंने बताया कि काम शुरू किए अभी केवल तीन महीने हुए हैं, लेकिन उन्हें आसपास के लोगों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। शुरुआती परेशानियों के बावजूद वह धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन घरेलू स्तर पर काम कर रही महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।

 

महिला उद्यमियों को मिला पहचान और नेटवर्किंग का अवसर

 

‘शक्ति संगम’ मिनी मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं रहा, बल्कि स्थानीय महिला उद्यमियों के लिए आपसी संपर्क, अनुभव साझा करने और अपने व्यवसाय को नई पहचान देने का अवसर भी बना। घरेलू स्तर पर काम शुरू करने वाली महिलाओं से लेकर नए स्टार्टअप की दिशा में कदम बढ़ा रही उद्यमियों तक, सभी को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला।

 

इस तरह के आयोजन स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ‘शक्ति संगम’ के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो घर की चारदीवारी से शुरू हुआ हुनर भी एक सफल व्यवसाय और पहचान का रूप ले सकता है।

कोटद्वार: महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रविवार को कोटद्वार स्थित बावर्ची ग्राउंड्स में आयोजित ‘शक्ति संगम’ मिनी मेला उत्साह के साथ संपन्न हुआ। ‘Empowering Women, Growing Together’ यानी महिलाओं को सशक्त बनाने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की थीम पर आयोजित इस एक दिवसीय मेले में महिला उद्यमियों…

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चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस पर्यटन सीजन के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया। हिमालय की गोद में स्थित इस अद्वितीय घाटी को इस वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था। करीब पांच महीने तक खुली रहने वाली घाटी में इस सीजन रिकॉर्ड 35,261 पर्यटक पहुंचे, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।

वन क्षेत्राधिकारी आशीष जिरवान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सीजन फूलों की घाटी का दीदार करने वाले कुल 35,261 पर्यटकों में 34,996 भारतीय और 265 विदेशी सैलानी शामिल रहे। भारतीय पर्यटकों में 21,306 पुरुष, 8,604 महिलाएं, 18 वर्ष से अधिक आयु के 4,431 विद्यार्थी एवं शोधकर्ता तथा 12 वर्ष से अधिक आयु के 124 बच्चे रहे। इसके अलावा 531 वृद्ध पर्यटकों ने भी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। विदेशी पर्यटकों में 127 पुरुष और 138 महिलाएं शामिल थीं।

पर्यटकों की इस आवाजाही से वन विभाग को कुल 67 लाख 7 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को अत्यधिक बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए घाटी को एक दिन के लिए एहतियातन बंद रखा गया था। इसके बावजूद इस सीजन पर्यटकों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

फूलों की घाटी अपनी रंग-बिरंगी फूलों की सैकड़ों प्रजातियों, दुर्लभ वनस्पतियों, समृद्ध जैव विविधता और विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस वर्ष रिकॉर्ड पर्यटक आवक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर घाटी की लोकप्रियता और आकर्षण को रेखांकित किया है।

चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी को शनिवार को इस…
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का औपचारिक अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि पुलिस की पहचान को नया स्वरूप देना मात्र प्रतीकों और वर्दी का बदलाव नहीं, बल्कि पुलिस बल की गौरवशाली परंपराओं, शौर्य, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल आदर्शों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नए प्रतीक गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी एहसास कराते हैं। इस नई पहचान का असली सम्मान तभी होगा जब हर नागरिक को पुलिस के व्यवहार में संवेदनशीलता, कार्यप्रणाली में दक्षता और कार्रवाई में निष्पक्षता दिखाई दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। उत्तराखण्ड पुलिस को भी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित, अधिक प्रशिक्षित, दक्ष और सक्षम बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड पुलिस का नया ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है। हर अधिकारी और जवान को इन आदर्शों को अपने आचरण में अपनाना होगा। वर्दी का सम्मान आचरण से और जनता का विश्वास सेवा से मजबूत होता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इन गौरव चिह्नों का अनावरण विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री और राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। यह अवसर राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि आगामी 6 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से अलंकृत किया जाएगा। इस मौके पर पुलिस जवान नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड पुलिस अपनी नई पहचान के साथ जनसेवा, अनुशासन, दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के नए मानक स्थापित करेगी।

नए गौरव चिह्नों की विशेषताएं

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, स्वर्णिम लॉरेल रीथ, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। ये राष्ट्रीय गौरव, सत्य, न्याय, उत्कृष्टता और उत्तराखण्ड की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं।

पूर्व में प्रचलित तीन रंगों वाले क्षैतिज ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग की पृष्ठभूमि वाला नया ध्वज अपनाया गया है। इसमें मध्य में नया पुलिस प्रतीक चिह्न तथा लाल और स्वर्णिम किनारे शामिल हैं।

फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया और क्रेस्ट को भी नए प्रतीक चिह्न के अनुरूप बदला गया है। पारंपरिक खाकी परिधान के साथ बहुरंगी सेरेमोनियल सैश, अलंकरण और विशिष्ट परेड साज-सज्जा को जोड़कर सेरेमोनियल वर्दी को नया रूप दिया गया है।

उत्तराखण्ड पुलिस का ध्वज पहले 4 अप्रैल 2008 को अनावरण किया गया था। बदलती चुनौतियों और बढ़ते दायित्वों को ध्यान में रखते हुए नए गौरव चिह्नों को तैयार किया गया, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को अनुमोदन दिया था।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास…
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  • संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी किताबों के बजाय धरातल पर तलाश रहे हैं। भूगर्भ विज्ञान विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का दल इन दिनों चमोली से जोशीमठ के बीच विभिन्न संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर हिमालय की भूगर्भीय संरचना और पर्वत निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहा है।

फील्ड स्टडी के दौरान विद्यार्थी चट्टानों की बनावट, पर्वतों की संरचना और भूगर्भीय बदलावों का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में धरती के भीतर होने वाली हलचलों और उनके प्रभावों को समझना अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भूगर्भीय गतिविधियां पहाड़ों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं। स्थलीय निरीक्षण से उन्हें शोध के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल रही हैं।

छात्रा मीनाक्षी के अनुसार, कक्षाओं में पढ़े गए सिद्धांतों को पहाड़ों और चट्टानों के बीच प्रत्यक्ष देखना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे हिमालय की संरचना और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल रही है।

भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि भूगर्भ विज्ञान को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए फील्ड विजिट और स्थलीय निरीक्षण जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर हिमालय के निर्माण और उसकी भूगर्भीय संरचना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव, उनकी गति और उससे पैदा होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को समझाया जा रहा है। साथ ही इन प्रक्रियाओं का पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कराया जा रहा है।

संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे…
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  • प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर हुई चर्चा
  • कर्मचारी हितों के लिए संघर्ष का संकल्प

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अनुसूचित जाति/जनजाति इम्प्लाइज फेडरेशन की जिला शाखा चमोली की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। रविवार को अंबेडकर भवन गोपेश्वर में पौड़ी गढ़वाल मंडल के मंडलीय अध्यक्ष मांगे राम मौर्य की देखरेख में आयोजित बैठक में भरत कोठियाल को फेडरेशन का जिलाध्यक्ष और कुंवर सिंह रावत को महासचिव चुना गया।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, आउटसोर्सिंग, रोस्टर प्रणाली और निजीकरण के मुद्दे उठाते हुए कहा कि इन व्यवस्थाओं के चलते कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई।

सर्वसम्मति से गठित नई कार्यकारिणी में हरीश टम्टा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मीना आगरी और प्रकाश टम्टा को उपाध्यक्ष, बद्री कोहली को कोषाध्यक्ष, सुरेश राज को मीडिया प्रभारी और जगत राम को संगठन सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष भरत कोठियाल ने सभी सदस्यों का आभार जताते हुए कर्मचारी हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत बनाने तथा संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

इस दौरान दिनेश शाह, रोमेश शाह, पीएल बैछवाल, जीएल आर्य, जगदीश टम्टा, हरीश कुमार, कैलाश चन्द्रवाल, धनी आगरी, बलवंत राम शिवानी, जेएस रडवाल समेत जनपद के शिक्षक, कर्मचारी एवं अधिकारी मौजूद रहे।

प्रमोशन में आरक्षण, बैकलॉग पदों और आउटसोर्सिंग के मुद्दों पर…
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गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कई घंटे चले संयुक्त अभियान के बाद रेस्क्यू टीमों ने सभी शवों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद सभी पार्थिव शरीरों को हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया।

हादसे के बाद से ही घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया जा रहा था। दुर्घटनास्थल ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रेस्क्यू टीमों को शवों तक पहुंचने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ी रास्तों की कठिन बनावट और विषम परिस्थितियों के बावजूद बचाव दलों ने अभियान जारी रखा। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी रहीं।

रेस्क्यू टीमों के जवान पैदल ही कठिन पहाड़ी रास्तों से घटनास्थल तक पहुंचे। इसके बाद सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीरों को बाहर निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया गया। यहां से शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जोशीमठ लाया गया। अस्पताल में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी हेलीपैड पहुंचाया गया। एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से सभी छह पार्थिव शरीरों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेज दिया गया है। वहां आगे की आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

इस हादसे के बाद दुर्गम क्षेत्र में चलाया गया रेस्क्यू अभियान सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। सेना से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अभियान को अंजाम दिया। सभी छह शवों को घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग और फिर हवाई मार्ग से ऋषिकेश पहुंचाने के साथ बचाव अभियान का यह महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के जोशीमठ के समीप हुए हेलीकॉप्टर…
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  • कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई
  • मरीजों और तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

गोपेश्वर (चमोली)। भारतीय रेडक्रॉस शाखा चमोली की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल गोपेश्वर परिसर में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेडक्रॉस के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल पहुंचने वाले अन्य लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व रेडक्रॉस शाखा के कार्यक्रम सचिव सुरेंद्र रावत और कोषाध्यक्ष चरण सिंह नेगी ने किया। अभियान के तहत सदस्यों ने अस्पताल परिसर के विभिन्न स्थानों पर सफाई की। परिसर में फैले कूड़े और गंदगी को हटाने के साथ लोगों से स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की गई।

इस मौके पर रेडक्रॉस सदस्यों ने कहा कि अस्पताल ऐसा सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना बेहद जरूरी है। गंदगी से संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष दिवस या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाना, कूड़ेदान का उपयोग करना और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल हैं। सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकती है।

रेडक्रॉस की ओर से कायाकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और सार्वजनिक संस्थानों में साफ-सफाई के महत्व को रेखांकित करना रहा। अभियान में सुनील बिष्ट, उषा रावत, महेंद्र सिंह नेगी, शंकर बिष्ट, रेखा नेगी, जयंती  रावत समेत रेडक्रॉस शाखा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

 

कायाकल्प अभियान के तहत परिसर में की साफ-सफाई मरीजों और…