- आज 25 अक्टुबर को 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में भव्य शुभारंभ हुआ
- वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं सतत विकास पर हुआ मंथन
देहरादून : उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से राज्य और देश की प्रमुख चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि रहे। अपने संबोधन में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्तराखंड तेजी से विकास कर रहा है. उन्होंने कहा हमें अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, अनुसंधान तथा नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति–2026 के प्रमुख उद्देश्यों तथा इसके अंतर्गत विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समन्वय, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल के बारे में जानकारी देते हुए विज्ञान एवं समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, वैज्ञानिक ज्ञान एवं उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में ऐसी पहलों की भूमिका को रेखांकित किया ।
उद्घाटन सत्र में मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, सीएसआईआर–भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून की निदेशक डॉ. दर्शना जोशी, विज्ञानशाला के निदेशक केशव आशीष तथा विज्ञान भारती के संगठन मंत्री सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (Abstract Book) का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, तकनीकी प्रगति तथा क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में उनकी उपयोगिता पर विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन के प्रथम दिवस 13 तकनीकी प्रभागों के अंतर्गत 260 से अधिक शोध-पत्र मौखिक प्रस्तुतियों एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों ने शोध निष्कर्षों के आदान-प्रदान, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन तथा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। तकनीकी सत्रों में कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी; जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान; रासायनिक विज्ञान; भू-विज्ञान; इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी; गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण; गणित एवं सांख्यिकी; कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ; चिकित्सा एवं औषध विज्ञान; भौतिक विज्ञान; ग्रामीण विज्ञान एवं विज्ञान और समाज; प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन तथा ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ (Innovator of the Year) श्रेणी को शामिल किया गया। सम्मेलन में विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास तथा हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों एवं संभावनाओं के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया। साथ ही, सतत विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर भी चर्चा की गई। उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति : विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की भावी दिशा, राज्य के विकास में अनुसंधान की भूमिका तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं प्रख्यात पत्रकारों ने भाग लिया। सत्र में विज्ञान संचार को सरल, सहज एवं जनसुलभ बनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनसंचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं नवाचार को व्यापक पहचान दिलाने तथा वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया, जिसमें माननीय कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों, विशेषकर युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि, सहभागिता एवं वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उत्साह को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से विज्ञान को अधिक संवादात्मक, रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मेलन में ‘लैब ऑन व्हील्स’ (Lab on Wheels) अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। यह पहल वैज्ञानिक प्रयोगों, गतिविधियों एवं ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विद्यार्थियों एवं आमजन में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान पहलों, तकनीकी नवाचारों, उभरते समाधानों तथा उद्यमशीलता से संबंधित प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। इसने प्रतिभागी संस्थानों, शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को अपने कार्यों और उपलब्धियों को प्रस्तुत करने, विचारों का आदान-प्रदान करने तथा संभावित सहयोग के अवसर तलाशने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया। प्रदर्शनी के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों, अनुसंधान आधारित समाधानों तथा नवाचार की संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास किया गया। 21वाँ उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह सम्मेलन अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया एवं नवाचार से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। सम्मेलन के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान, अंतर्विषयक सहयोग, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से उत्तराखंड के हिमालयी भू-भाग, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं अन्य क्षेत्रीय आवश्यकताओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया गया। यह सम्मेलन वैज्ञानिक समुदाय, नीति-निर्माताओं, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राज्य के सतत, समावेशी और नवाचार-आधारित विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सम्मेलन में लगभग 1,000 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्यमियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की
- आज 25 अक्टुबर को 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में भव्य शुभारंभ हुआ
- वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं सतत विकास पर हुआ मंथन
देहरादून : उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से राज्य और देश की प्रमुख चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि रहे। अपने संबोधन में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्तराखंड तेजी से विकास कर रहा है. उन्होंने कहा हमें अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, अनुसंधान तथा नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति–2026 के प्रमुख उद्देश्यों तथा इसके अंतर्गत विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समन्वय, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल के बारे में जानकारी देते हुए विज्ञान एवं समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, वैज्ञानिक ज्ञान एवं उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में ऐसी पहलों की भूमिका को रेखांकित किया ।
उद्घाटन सत्र में मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, सीएसआईआर–भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून की निदेशक डॉ. दर्शना जोशी, विज्ञानशाला के निदेशक केशव आशीष तथा विज्ञान भारती के संगठन मंत्री सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (Abstract Book) का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, तकनीकी प्रगति तथा क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में उनकी उपयोगिता पर विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन के प्रथम दिवस 13 तकनीकी प्रभागों के अंतर्गत 260 से अधिक शोध-पत्र मौखिक प्रस्तुतियों एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों ने शोध निष्कर्षों के आदान-प्रदान, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन तथा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। तकनीकी सत्रों में कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी; जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान; रासायनिक विज्ञान; भू-विज्ञान; इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी; गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण; गणित एवं सांख्यिकी; कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ; चिकित्सा एवं औषध विज्ञान; भौतिक विज्ञान; ग्रामीण विज्ञान एवं विज्ञान और समाज; प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन तथा ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ (Innovator of the Year) श्रेणी को शामिल किया गया। सम्मेलन में विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास तथा हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों एवं संभावनाओं के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया। साथ ही, सतत विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर भी चर्चा की गई। उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति : विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की भावी दिशा, राज्य के विकास में अनुसंधान की भूमिका तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं प्रख्यात पत्रकारों ने भाग लिया। सत्र में विज्ञान संचार को सरल, सहज एवं जनसुलभ बनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनसंचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं नवाचार को व्यापक पहचान दिलाने तथा वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया, जिसमें माननीय कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों, विशेषकर युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि, सहभागिता एवं वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उत्साह को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से विज्ञान को अधिक संवादात्मक, रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मेलन में ‘लैब ऑन व्हील्स’ (Lab on Wheels) अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। यह पहल वैज्ञानिक प्रयोगों, गतिविधियों एवं ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विद्यार्थियों एवं आमजन में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान पहलों, तकनीकी नवाचारों, उभरते समाधानों तथा उद्यमशीलता से संबंधित प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। इसने प्रतिभागी संस्थानों, शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को अपने कार्यों और उपलब्धियों को प्रस्तुत करने, विचारों का आदान-प्रदान करने तथा संभावित सहयोग के अवसर तलाशने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया। प्रदर्शनी के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों, अनुसंधान आधारित समाधानों तथा नवाचार की संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास किया गया। 21वाँ उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह सम्मेलन अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया एवं नवाचार से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। सम्मेलन के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान, अंतर्विषयक सहयोग, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से उत्तराखंड के हिमालयी भू-भाग, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं अन्य क्षेत्रीय आवश्यकताओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया गया। यह सम्मेलन वैज्ञानिक समुदाय, नीति-निर्माताओं, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राज्य के सतत, समावेशी और नवाचार-आधारित विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सम्मेलन में लगभग 1,000 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्यमियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की
आज 25 अक्टुबर को 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में भव्य शुभारंभ हुआ वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं सतत विकास पर हुआ मंथन देहरादून : उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन…
- ऋषभ पाल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा युवा मोर्चा, उत्तराखंड
देहरादून : महर्षि वाल्मीकि जी केवल एक महर्षि या आदिकवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान, साहित्य और सामाजिक चेतना के ऐसे महान प्रतीक हैं, जिनका योगदान युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी लेखनी ने भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। यदि महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना न की होती, तो भगवान श्रीराम के जीवन की गाथा और उनके आदर्शों का परिचय मानव समाज तक किस रूप में पहुँचता, इसकी कल्पना करना भी कठिन है। नवरात्रों की आस्था, दशहरे में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश और दीपावली के साथ जुड़ी भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की परंपरा भारतीय जनमानस में जिस प्रकार रची-बसी है, उसमें रामायण की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन हमें सिखाता है कि मनुष्य की महानता उसके जन्म या परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, विचारों, कर्मों और समाज को दिए गए योगदान से निर्धारित होती है। उनसे जुड़ी प्रचलित लोककथाएँ आत्मपरिवर्तन, तपस्या और सद्मार्ग की प्रेरणा देती हैं। उनका व्यक्तित्व इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान की शक्ति किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकती है। आज आवश्यकता है कि हम महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन और कृतित्व को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उनके विचारों को अपने आचरण में भी उतारें।
महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण में भगवान श्रीराम के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, न्याय और लोककल्याण के आदर्श प्रस्तुत किए गए हैं। यह महाकाव्य हमें बताता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों की चिंता करे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे और कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से विचलित न हो। यही आदर्श आज के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे।
मेरा मानना है कि महर्षि वाल्मीकि जी के विचारों को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा और संस्कार हैं। जब समाज का प्रत्येक बच्चा शिक्षित होगा, प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बनेगा और प्रत्येक परिवार को सम्मान एवं अवसर प्राप्त होंगे, तभी एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण संभव होगा। समाज में जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता और ऊँच-नीच की भावना के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहाँ किसी भी युवा की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत, चरित्र और उपलब्धियों से हो।
आज का युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। महर्षि वाल्मीकि जी की विरासत हमें प्रेरित करती है कि युवा केवल अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिक्षा, सामाजिक सेवा, राष्ट्र निर्माण और जरूरतमंदों के उत्थान के लिए आगे आना ही सच्ची सामाजिक चेतना है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा में सहभागी बनेगा और प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा।
महर्षि वाल्मीकि जी किसी एक वर्ग या समुदाय की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत हैं। उनका सम्मान करना, उनके साहित्य का अध्ययन करना और उनके आदर्शों को समाज में स्थापित करना हम सभी का दायित्व है। हमें ऐसे आयोजन करने चाहिए, जिनके माध्यम से युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जाए, प्रतिभाओं को सम्मान मिले और समाज में एकता, भाईचारे तथा सद्भाव की भावना मजबूत हो।
इसी भावना के साथ मेरा प्रयास है कि महर्षि वाल्मीकि जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए और युवाओं को ज्ञान, संस्कार, सेवा तथा राष्ट्रवाद के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए। मेरा विश्वास है कि जब हम महर्षि वाल्मीकि जी के विचारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे, तभी सामाजिक समरसता का संकल्प मजबूत होगा और भारत अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के साथ विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।
आइए, हम सभी संकल्प लें कि महर्षि वाल्मीकि जी के ज्ञान और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएँगे, शिक्षा को प्रोत्साहित करेंगे, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान देंगे और जाति तथा क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेंगे। यही आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी के चरणों में हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
- ऋषभ पाल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा युवा मोर्चा, उत्तराखंड
देहरादून : महर्षि वाल्मीकि जी केवल एक महर्षि या आदिकवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान, साहित्य और सामाजिक चेतना के ऐसे महान प्रतीक हैं, जिनका योगदान युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी लेखनी ने भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। यदि महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना न की होती, तो भगवान श्रीराम के जीवन की गाथा और उनके आदर्शों का परिचय मानव समाज तक किस रूप में पहुँचता, इसकी कल्पना करना भी कठिन है। नवरात्रों की आस्था, दशहरे में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश और दीपावली के साथ जुड़ी भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की परंपरा भारतीय जनमानस में जिस प्रकार रची-बसी है, उसमें रामायण की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन हमें सिखाता है कि मनुष्य की महानता उसके जन्म या परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, विचारों, कर्मों और समाज को दिए गए योगदान से निर्धारित होती है। उनसे जुड़ी प्रचलित लोककथाएँ आत्मपरिवर्तन, तपस्या और सद्मार्ग की प्रेरणा देती हैं। उनका व्यक्तित्व इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान की शक्ति किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकती है। आज आवश्यकता है कि हम महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन और कृतित्व को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उनके विचारों को अपने आचरण में भी उतारें।
महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण में भगवान श्रीराम के माध्यम से मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, न्याय और लोककल्याण के आदर्श प्रस्तुत किए गए हैं। यह महाकाव्य हमें बताता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों की चिंता करे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे और कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से विचलित न हो। यही आदर्श आज के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे।
मेरा मानना है कि महर्षि वाल्मीकि जी के विचारों को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा और संस्कार हैं। जब समाज का प्रत्येक बच्चा शिक्षित होगा, प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बनेगा और प्रत्येक परिवार को सम्मान एवं अवसर प्राप्त होंगे, तभी एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण संभव होगा। समाज में जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता और ऊँच-नीच की भावना के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहाँ किसी भी युवा की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत, चरित्र और उपलब्धियों से हो।
आज का युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। महर्षि वाल्मीकि जी की विरासत हमें प्रेरित करती है कि युवा केवल अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिक्षा, सामाजिक सेवा, राष्ट्र निर्माण और जरूरतमंदों के उत्थान के लिए आगे आना ही सच्ची सामाजिक चेतना है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा में सहभागी बनेगा और प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा।
महर्षि वाल्मीकि जी किसी एक वर्ग या समुदाय की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत हैं। उनका सम्मान करना, उनके साहित्य का अध्ययन करना और उनके आदर्शों को समाज में स्थापित करना हम सभी का दायित्व है। हमें ऐसे आयोजन करने चाहिए, जिनके माध्यम से युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जाए, प्रतिभाओं को सम्मान मिले और समाज में एकता, भाईचारे तथा सद्भाव की भावना मजबूत हो।
इसी भावना के साथ मेरा प्रयास है कि महर्षि वाल्मीकि जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए और युवाओं को ज्ञान, संस्कार, सेवा तथा राष्ट्रवाद के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए। मेरा विश्वास है कि जब हम महर्षि वाल्मीकि जी के विचारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे, तभी सामाजिक समरसता का संकल्प मजबूत होगा और भारत अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के साथ विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।
आइए, हम सभी संकल्प लें कि महर्षि वाल्मीकि जी के ज्ञान और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएँगे, शिक्षा को प्रोत्साहित करेंगे, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान देंगे और जाति तथा क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेंगे। यही आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी के चरणों में हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ऋषभ पाल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा युवा मोर्चा, उत्तराखंड देहरादून : महर्षि वाल्मीकि जी केवल एक महर्षि या आदिकवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान, साहित्य और सामाजिक चेतना के ऐसे महान प्रतीक हैं, जिनका योगदान युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी लेखनी ने भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा को जन-जन तक…
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा उत्तराखंड: प्रदीप बत्रा
वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं सतत विकास पर हुआ मंथन देहरादून।उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से राज्य और देश की प्रमुख चुनौतियों के समाधान की दिशा…
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देश पर एमडीडीए का कड़ा एक्शन, अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर शिकंजा, 7 स्थानों पर कार्रवाई – badhtauttarakhand
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देश पर एमडीडीए का कड़ा एक्शन, अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर शिकंजा, 7 स्थानों पर कार्रवाई – badhtauttarakhand
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के राइका देवखाल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों, लैंगिक अपराधों से बचाव और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों पर आयोजित कार्यक्रम में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य शांति राणा ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी। बच्चों को पॉक्सो अधिनियम-2012 के तहत संरक्षण, व्यक्तिगत सुरक्षा और किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में सहायता लेने के बारे में बताया गया। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने तथा निजी जानकारी और पासवर्ड सुरक्षित रखने के तरीके समझाए गए। विद्यार्थियों को नशे से होने वाली शारीरिक, मानसिक और सामाजिक हानियों की जानकारी देते हुए नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। बच्चों को किसी भी तरह के शोषण या उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए भी जागरूक किया गया।
विद्यालय में विद्यार्थियों को लगातार जागरूक करने के लिए नशा विरोधी क्लब और विधिक साक्षरता क्लब गठित हैं। इनके माध्यम से बाल अधिकारों, कानूनी जागरूकता, नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के राइका देवखाल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों, लैंगिक अपराधों से बचाव और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों पर आयोजित कार्यक्रम में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य शांति राणा ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी। बच्चों को पॉक्सो अधिनियम-2012 के तहत संरक्षण, व्यक्तिगत सुरक्षा और किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में सहायता लेने के बारे में बताया गया। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने तथा निजी जानकारी और पासवर्ड सुरक्षित रखने के तरीके समझाए गए। विद्यार्थियों को नशे से होने वाली शारीरिक, मानसिक और सामाजिक हानियों की जानकारी देते हुए नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। बच्चों को किसी भी तरह के शोषण या उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए भी जागरूक किया गया।
विद्यालय में विद्यार्थियों को लगातार जागरूक करने के लिए नशा विरोधी क्लब और विधिक साक्षरता क्लब गठित हैं। इनके माध्यम से बाल अधिकारों, कानूनी जागरूकता, नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के राइका देवखाल में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों, लैंगिक अपराधों से बचाव और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों पर आयोजित कार्यक्रम में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य शांति राणा ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के…
पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ की भावना के अनुरूप जनपद में पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में अभियान के तहत विभागीय टीमें घर-घर पहुंचकर ऐसे पात्र लोगों की पहचान कर रही हैं, जो जानकारी के अभाव, आवश्यक अभिलेखों की कमी अथवा स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाने के कारण पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र व्यक्तियों को पेंशन के लिए स्वयं कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति जानकारी या आवेदन संबंधी कठिनाइयों के कारण योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में घर-घर संपर्क कर छूटे हुए पात्र लोगों की जानकारी जुटायी जा रही है। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के आवश्यक अभिलेख पूरे कराने, ऑनलाइन आवेदन करने, सत्यापन तथा स्वीकृति की प्रक्रिया में भी सहयोग दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी द्वारा जुलाई माह में आयोजित बैठक में समाज कल्याण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि पेंशन योजनाओं का लाभ देने के लिए केवल आवेदनों की प्रतीक्षा न की जाए, बल्कि स्वयं पहल करते हुए पात्र व्यक्तियों की पहचान की जाए और उनके आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत पात्र व्यक्तियों तक पहुंचकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है, जो किसी कारणवश स्वयं आवेदन नहीं कर सकते। विभागीय स्तर पर आवेदन संबंधी औपचारिकताओं में सहयोग देने के साथ ही अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
अभियान के तहत ग्राम विकास अधिकारियों, ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, राजस्व उपनिरीक्षकों एवं अन्य संबंधित कार्मिकों के सहयोग से घर-घर जाकर पेंशन से वंचित पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। इसके बाद सहायक समाज कल्याण अधिकारियों के माध्यम से उनके आवेदन कराए गए तथा आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आवश्यक दस्तावेज जुटाने, अभिलेखों की जांच एवं पात्रता सत्यापन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी की गईं। विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा आवेदनों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया ने बताया कि जनपद में संचालित पेंशन संतृप्तिकरण अभियान के अंतर्गत अब तक 551 पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है। इनमें वृद्धावस्था पेंशन के 397, किसान पेंशन के 49, दिव्यांग पेंशन के 45 तथा निराश्रित विधवा महिला पेंशन के 60 लाभार्थी शामिल हैं। चिन्हित सभी 551 व्यक्तियों के पेंशन आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घर-घर अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए पात्र व्यक्तियों की पहचान और आवेदन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय समन्वय के साथ यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव या आवेदन संबंधी परेशानी के कारण पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।
पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ की भावना के अनुरूप जनपद में पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में अभियान के तहत विभागीय टीमें घर-घर पहुंचकर ऐसे पात्र लोगों की पहचान कर रही हैं, जो जानकारी के अभाव, आवश्यक अभिलेखों की कमी अथवा स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाने के कारण पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र व्यक्तियों को पेंशन के लिए स्वयं कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति जानकारी या आवेदन संबंधी कठिनाइयों के कारण योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में घर-घर संपर्क कर छूटे हुए पात्र लोगों की जानकारी जुटायी जा रही है। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के आवश्यक अभिलेख पूरे कराने, ऑनलाइन आवेदन करने, सत्यापन तथा स्वीकृति की प्रक्रिया में भी सहयोग दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी द्वारा जुलाई माह में आयोजित बैठक में समाज कल्याण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि पेंशन योजनाओं का लाभ देने के लिए केवल आवेदनों की प्रतीक्षा न की जाए, बल्कि स्वयं पहल करते हुए पात्र व्यक्तियों की पहचान की जाए और उनके आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत पात्र व्यक्तियों तक पहुंचकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जा रहा है, जो किसी कारणवश स्वयं आवेदन नहीं कर सकते। विभागीय स्तर पर आवेदन संबंधी औपचारिकताओं में सहयोग देने के साथ ही अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
अभियान के तहत ग्राम विकास अधिकारियों, ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, राजस्व उपनिरीक्षकों एवं अन्य संबंधित कार्मिकों के सहयोग से घर-घर जाकर पेंशन से वंचित पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। इसके बाद सहायक समाज कल्याण अधिकारियों के माध्यम से उनके आवेदन कराए गए तथा आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आवश्यक दस्तावेज जुटाने, अभिलेखों की जांच एवं पात्रता सत्यापन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी की गईं। विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा आवेदनों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया ने बताया कि जनपद में संचालित पेंशन संतृप्तिकरण अभियान के अंतर्गत अब तक 551 पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है। इनमें वृद्धावस्था पेंशन के 397, किसान पेंशन के 49, दिव्यांग पेंशन के 45 तथा निराश्रित विधवा महिला पेंशन के 60 लाभार्थी शामिल हैं। चिन्हित सभी 551 व्यक्तियों के पेंशन आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घर-घर अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए पात्र व्यक्तियों की पहचान और आवेदन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय समन्वय के साथ यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव या आवेदन संबंधी परेशानी के कारण पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।
पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ की भावना के अनुरूप जनपद में पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में अभियान के तहत विभागीय टीमें घर-घर पहुंचकर ऐसे पात्र लोगों की पहचान…
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औषधि विभाग ने शनिवार को केंद्रीय औषधि भंडार गोपेश्वर का निरीक्षण किया। औषधि निरीक्षक हार्दिक भट्ट ने छह औषधियों के नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय विश्लेषणशाला, देहरादून भेजे हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान औषधियों के भंडारण, रख-रखाव और वितरण से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। औषधि निरीक्षक ने दवाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखने और भंडारण व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण और नमूना जांच का उद्देश्य आमजन को गुणवत्तापरक एवं सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराना और निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। निरीक्षण के दौरान मुख्य फार्मेसी अधिकारी रमेश नेगी सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औषधि विभाग ने शनिवार को केंद्रीय औषधि भंडार गोपेश्वर का निरीक्षण किया। औषधि निरीक्षक हार्दिक भट्ट ने छह औषधियों के नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय विश्लेषणशाला, देहरादून भेजे हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान औषधियों के भंडारण, रख-रखाव और वितरण से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। औषधि निरीक्षक ने दवाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखने और भंडारण व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण और नमूना जांच का उद्देश्य आमजन को गुणवत्तापरक एवं सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराना और निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। निरीक्षण के दौरान मुख्य फार्मेसी अधिकारी रमेश नेगी सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औषधि विभाग ने शनिवार को केंद्रीय औषधि भंडार गोपेश्वर का निरीक्षण किया। औषधि निरीक्षक हार्दिक भट्ट ने छह औषधियों के नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय विश्लेषणशाला, देहरादून भेजे हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान औषधियों के…
समर वैली स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप पर कांग्रेस का प्रदर्शन, गेट फांदकर परिसर में घुसे कार्यकर्ता – badhtauttarakhand
समर वैली स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप पर कांग्रेस का प्रदर्शन, गेट फांदकर परिसर में घुसे कार्यकर्ता – badhtauttarakhand
- होटल-रेस्टोरेंटों में घरेलू गैस के दुरुपयोग पर भी शिकंजा, रायवाला थाने में एफआईआर दर्ज; त्योहारों के बीच पूर्ति विभाग का अभियान तेज
देहरादून। घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग के कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन एवं पूर्ति विभाग ने सख्ती तेज कर दी है। शनिवार को देहरादून नगर और छिद्दरवाला क्षेत्र में चलाए गए जांच अभियान के दौरान घरेलू गैस के अनधिकृत इस्तेमाल और अवैध रिफिलिंग के मामलों में कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई के दौरान छिद्दरवाला में 94 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडर जब्त किए गए, जबकि देहरादून नगर के होटल-रेस्टोरेंटों से 10 घरेलू गैस सिलेंडर कब्जे में लिए गए। अवैध रिफिलिंग के मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और थाना रायवाला में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
होटल-रेस्टोरेंटों में घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल पकड़ा
जिला प्रशासन एवं पूर्ति विभाग की प्रवर्तन टीमों ने देहरादून नगर क्षेत्र के विभिन्न होटल और रेस्टोरेंटों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडरों का अनधिकृत उपयोग पाए जाने पर 10 सिलेंडर जब्त किए गए। जब्त सिलेंडरों को संबंधित गैस एजेंसी की सुपुर्दगी में जमा कराया गया है। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य घरेलू गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल रोकना और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
छिद्दरवाला में अवैध रिफिलिंग के कारोबार पर कार्रवाई
छिद्दरवाला क्षेत्र में अवैध गैस रिफिलिंग का मामला सामने आने पर प्रवर्तन टीम ने कार्रवाई करते हुए 94 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडर जब्त किए। मामले में मौके पर मिले संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध थाना रायवाला में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया गया। विभाग अवैध रिफिलिंग और गैस की अनधिकृत बिक्री जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जांच अभियान चला रहा है।
त्योहारों के मद्देनजर बढ़ाई निगरानी
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने कहा कि त्योहारों के दौरान घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग और उपयोग पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल केवल निर्धारित घरेलू प्रयोजनों के लिए किया जाना चाहिए। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडरों का अनधिकृत उपयोग, अवैध रिफिलिंग और गैस की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से औचक निरीक्षण और जांच अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घरेलू गैस के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
लगातार जारी रहेगा जांच अभियान
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग के खिलाफ अभियान निरंतर जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान एसके, एआरओ, रजत नेगी और पूर्ति निरीक्षक नवीन जुयाल सहित विभागीय टीम के सदस्य मौजूद रहे।
- होटल-रेस्टोरेंटों में घरेलू गैस के दुरुपयोग पर भी शिकंजा, रायवाला थाने में एफआईआर दर्ज; त्योहारों के बीच पूर्ति विभाग का अभियान तेज
देहरादून। घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग के कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन एवं पूर्ति विभाग ने सख्ती तेज कर दी है। शनिवार को देहरादून नगर और छिद्दरवाला क्षेत्र में चलाए गए जांच अभियान के दौरान घरेलू गैस के अनधिकृत इस्तेमाल और अवैध रिफिलिंग के मामलों में कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई के दौरान छिद्दरवाला में 94 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडर जब्त किए गए, जबकि देहरादून नगर के होटल-रेस्टोरेंटों से 10 घरेलू गैस सिलेंडर कब्जे में लिए गए। अवैध रिफिलिंग के मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और थाना रायवाला में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
होटल-रेस्टोरेंटों में घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल पकड़ा
जिला प्रशासन एवं पूर्ति विभाग की प्रवर्तन टीमों ने देहरादून नगर क्षेत्र के विभिन्न होटल और रेस्टोरेंटों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडरों का अनधिकृत उपयोग पाए जाने पर 10 सिलेंडर जब्त किए गए। जब्त सिलेंडरों को संबंधित गैस एजेंसी की सुपुर्दगी में जमा कराया गया है। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य घरेलू गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल रोकना और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
छिद्दरवाला में अवैध रिफिलिंग के कारोबार पर कार्रवाई
छिद्दरवाला क्षेत्र में अवैध गैस रिफिलिंग का मामला सामने आने पर प्रवर्तन टीम ने कार्रवाई करते हुए 94 घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडर जब्त किए। मामले में मौके पर मिले संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध थाना रायवाला में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया गया। विभाग अवैध रिफिलिंग और गैस की अनधिकृत बिक्री जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जांच अभियान चला रहा है।
त्योहारों के मद्देनजर बढ़ाई निगरानी
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने कहा कि त्योहारों के दौरान घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग और उपयोग पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल केवल निर्धारित घरेलू प्रयोजनों के लिए किया जाना चाहिए। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडरों का अनधिकृत उपयोग, अवैध रिफिलिंग और गैस की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से औचक निरीक्षण और जांच अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घरेलू गैस के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
लगातार जारी रहेगा जांच अभियान
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग के खिलाफ अभियान निरंतर जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान एसके, एआरओ, रजत नेगी और पूर्ति निरीक्षक नवीन जुयाल सहित विभागीय टीम के सदस्य मौजूद रहे।
होटल-रेस्टोरेंटों में घरेलू गैस के दुरुपयोग पर भी शिकंजा, रायवाला थाने में एफआईआर दर्ज; त्योहारों के बीच पूर्ति विभाग का अभियान तेज देहरादून। घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग के कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन एवं पूर्ति विभाग ने सख्ती तेज कर दी है। शनिवार को देहरादून नगर और छिद्दरवाला क्षेत्र में चलाए…
- उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की कार्यशाला में महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज का संदेश; विशेषज्ञों ने एआई के अवसरों, चुनौतियों और फेक न्यूज के खतरों पर किया मंथन
हरिद्वार : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तथ्यात्मक सटीकता और मानवीय विवेक की अहमियत और बढ़ गई है। मशीनें सूचनाएं और आंकड़े जुटाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन सामाजिक चेतना और सत्य की परख केवल सजग पत्रकार ही कर सकता है। यह बात अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने कही। वह उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की हरिद्वार इकाई की ओर से आयोजित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं पत्रकारिता : चुनौतियां और अवसर’ विषयक कार्यशाला एवं संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
हाईवे स्थित होटल में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल, डीपफेक, फर्जी खबरों और समाचारों के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई पत्रकारों के काम को तेज और प्रभावी बना सकता है, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मानवीय सत्यापन और संपादकीय विवेक अनिवार्य है।
सूचनाएं जुटाने में सक्षम मशीनें, सत्य की कसौटी पर पत्रकार की जिम्मेदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक का नकारात्मक इस्तेमाल समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। पत्रकारिता में एआई का उपयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं की उपलब्धता और सत्य की पहचान दो अलग-अलग बातें हैं। सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और तथ्यों की सही परख पत्रकारिता की बुनियादी ताकत हैं।
एआई से तेज होगी रिपोर्टिंग, लेकिन तथ्य सत्यापन जरूरी
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं एआई विशेषज्ञ पीयूष पांडेय ने पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई आधुनिक पत्रकारिता के लिए एक उपयोगी उपकरण है, जो डेटा विश्लेषण, ऑडियो-वीडियो ट्रांसक्रिप्शन, भाषा अनुवाद और समाचारों के शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने में मददगार साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई के इस्तेमाल से पत्रकारों का समय बचेगा और रिपोर्टिंग की गति बढ़ेगी, लेकिन किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों का मानवीय सत्यापन जरूरी है। डीपफेक और एआई के जरिए तैयार की जा रही फर्जी सामग्री के दौर में पत्रकारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। एआई सहायक उपकरण है, जबकि अंतिम निर्णय और संपादकीय विवेक पत्रकार के पास ही रहना चाहिए।
तकनीकी बदलाव अपनाएं पत्रकार, तभी बढ़ेगी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता में तकनीकी बदलावों को अपनाना समय की जरूरत है। यदि पत्रकार नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे, तो प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता को समाप्त करने के बजाय सही इस्तेमाल होने पर खोजी पत्रकारिता, समाचार संकलन और त्वरित रिपोर्टिंग की क्षमता बढ़ा सकता है।
मुख्य अतिथि राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती और अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य मनोज गौतम ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने पत्रकारिता में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और समाचारों की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संजय आर्य और संजय रावल ने जताया अतिथियों का आभार
यूनियन के जिलाध्यक्ष संजय आर्य, कार्यकारी अध्यक्ष संजय रावल और कार्यक्रम संयोजक अनिरुद्ध भाटी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सच और झूठ के बीच अंतर पहचानना बेहद जरूरी है। पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तथ्यों की जांच, जिम्मेदार रिपोर्टिंग और तकनीक का विवेकपूर्ण इस्तेमाल आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला पत्रकारों को एआई के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में कुंभ मेला सूचना अधिकारी कीर्ति पंवार, जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेंद्र हर्ष, गुलशन नैयर, राधेश्याम विद्याकुल, रजनीकांत शुक्ल, अविक्षित रमन, अवधेश शिवपुरी, त्रिलोक चंद भट्ट, सुदेश आर्य, नरेश दीवान शैली, परमजीत राणा, राजेन्द्रनाथ गोस्वामी, ओम गौतम फक्कड़, ललितेंद्र नाथ, शैलेंद्र सिंह, जगदीश देशप्रेमी, रामेश्वर दयाल, मुदित अग्रवाल, गोपाल कृष्ण पटुवर, संजय आर्य, ऋषि सचदेवा और निशांत गर्ग सहित अन्य लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता किरणपाल वाल्मीकि, एआई विशेषज्ञ पीयूष पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय आर्य, कार्यकारी अध्यक्ष संजय रावल, कार्यक्रम संयोजक अनिरुद्ध भाटी, कोषाध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अविक्षित रमन और प्रदेश उपाध्यक्ष रजनीकांत शुक्ल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यूनियन की ओर से अतिथियों का माल्यार्पण और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रजनीकांत शुक्ल ने किया।
इस अवसर पर जगदीशलाल पाहवा, डॉ. विशाल गर्ग सहित बड़ी संख्या में पत्रकार और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

- उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की कार्यशाला में महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज का संदेश; विशेषज्ञों ने एआई के अवसरों, चुनौतियों और फेक न्यूज के खतरों पर किया मंथन
हरिद्वार : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तथ्यात्मक सटीकता और मानवीय विवेक की अहमियत और बढ़ गई है। मशीनें सूचनाएं और आंकड़े जुटाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन सामाजिक चेतना और सत्य की परख केवल सजग पत्रकार ही कर सकता है। यह बात अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने कही। वह उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की हरिद्वार इकाई की ओर से आयोजित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं पत्रकारिता : चुनौतियां और अवसर’ विषयक कार्यशाला एवं संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
हाईवे स्थित होटल में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल, डीपफेक, फर्जी खबरों और समाचारों के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई पत्रकारों के काम को तेज और प्रभावी बना सकता है, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मानवीय सत्यापन और संपादकीय विवेक अनिवार्य है।
सूचनाएं जुटाने में सक्षम मशीनें, सत्य की कसौटी पर पत्रकार की जिम्मेदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक का नकारात्मक इस्तेमाल समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। पत्रकारिता में एआई का उपयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं की उपलब्धता और सत्य की पहचान दो अलग-अलग बातें हैं। सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और तथ्यों की सही परख पत्रकारिता की बुनियादी ताकत हैं।
एआई से तेज होगी रिपोर्टिंग, लेकिन तथ्य सत्यापन जरूरी
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं एआई विशेषज्ञ पीयूष पांडेय ने पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई आधुनिक पत्रकारिता के लिए एक उपयोगी उपकरण है, जो डेटा विश्लेषण, ऑडियो-वीडियो ट्रांसक्रिप्शन, भाषा अनुवाद और समाचारों के शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने में मददगार साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई के इस्तेमाल से पत्रकारों का समय बचेगा और रिपोर्टिंग की गति बढ़ेगी, लेकिन किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों का मानवीय सत्यापन जरूरी है। डीपफेक और एआई के जरिए तैयार की जा रही फर्जी सामग्री के दौर में पत्रकारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। एआई सहायक उपकरण है, जबकि अंतिम निर्णय और संपादकीय विवेक पत्रकार के पास ही रहना चाहिए।
तकनीकी बदलाव अपनाएं पत्रकार, तभी बढ़ेगी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता में तकनीकी बदलावों को अपनाना समय की जरूरत है। यदि पत्रकार नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे, तो प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता को समाप्त करने के बजाय सही इस्तेमाल होने पर खोजी पत्रकारिता, समाचार संकलन और त्वरित रिपोर्टिंग की क्षमता बढ़ा सकता है।
मुख्य अतिथि राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती और अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य मनोज गौतम ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने पत्रकारिता में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और समाचारों की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संजय आर्य और संजय रावल ने जताया अतिथियों का आभार
यूनियन के जिलाध्यक्ष संजय आर्य, कार्यकारी अध्यक्ष संजय रावल और कार्यक्रम संयोजक अनिरुद्ध भाटी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सच और झूठ के बीच अंतर पहचानना बेहद जरूरी है। पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तथ्यों की जांच, जिम्मेदार रिपोर्टिंग और तकनीक का विवेकपूर्ण इस्तेमाल आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला पत्रकारों को एआई के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में कुंभ मेला सूचना अधिकारी कीर्ति पंवार, जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेंद्र हर्ष, गुलशन नैयर, राधेश्याम विद्याकुल, रजनीकांत शुक्ल, अविक्षित रमन, अवधेश शिवपुरी, त्रिलोक चंद भट्ट, सुदेश आर्य, नरेश दीवान शैली, परमजीत राणा, राजेन्द्रनाथ गोस्वामी, ओम गौतम फक्कड़, ललितेंद्र नाथ, शैलेंद्र सिंह, जगदीश देशप्रेमी, रामेश्वर दयाल, मुदित अग्रवाल, गोपाल कृष्ण पटुवर, संजय आर्य, ऋषि सचदेवा और निशांत गर्ग सहित अन्य लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता किरणपाल वाल्मीकि, एआई विशेषज्ञ पीयूष पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय आर्य, कार्यकारी अध्यक्ष संजय रावल, कार्यक्रम संयोजक अनिरुद्ध भाटी, कोषाध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अविक्षित रमन और प्रदेश उपाध्यक्ष रजनीकांत शुक्ल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यूनियन की ओर से अतिथियों का माल्यार्पण और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रजनीकांत शुक्ल ने किया।
इस अवसर पर जगदीशलाल पाहवा, डॉ. विशाल गर्ग सहित बड़ी संख्या में पत्रकार और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की कार्यशाला में महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज का संदेश; विशेषज्ञों ने एआई के अवसरों, चुनौतियों और फेक न्यूज के खतरों पर किया मंथन हरिद्वार : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता, तथ्यात्मक सटीकता और मानवीय विवेक की अहमियत और बढ़ गई है। मशीनें सूचनाएं…



