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  • परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत।
  • बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर पहले भी उठाए थे सवाल।

नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद नौटियाल के परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकाने, प्रभावित करने या दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही वे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर भी रोक रहेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

मां ने कहा—न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता हेमलता नौटियाल और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने हाईकोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिजनों का कहना है कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी सभी तथ्य सामने आएंगे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को प्रमोद नौटियाल के जेल से रिहा होने की संभावना जताई जा रही है।

कथित बरामदगी को लेकर परिवार ने उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रमोद नौटियाल के परिजनों ने जांच और कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप रहा है कि बदरीनाथ स्थित बीकेटीसी के नीलकंठ विश्राम गृह के एक कक्ष से फर्जी तरीके से बरामदगी दिखाई गई।

परिजनों के अनुसार, जिस कक्ष से कथित बरामदगी दिखाई गई, उसे प्रमोद नौटियाल पहले ही खाली कर उसकी चाबी प्रबंधन को सौंप चुके थे। परिवार ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से जानकारी भी मांगी थी और प्राप्त जवाबों को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप कर रहे थे। परिवार की ओर से जांच समिति के सामने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की गई थी।

प्रोटोकॉल अधिकारी और चढ़ावा गिनती की जिम्मेदारी को लेकर भी उठा था विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जब विपक्षी दलों ने बीकेटीसी और प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद प्रमोद नौटियाल को बदरीनाथ में प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और उन्हें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में क्यों लगाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे। वहीं बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को बहस की चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चला।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को मामले में आरोपी बनाया गया था।

अब हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है और प्रकरण में आगे की जांच तथा न्यायिक कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में सह-आरोपी बताए जा रहे पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद राजेंद्र चौहान की जमानत याचिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उनकी जमानत पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध कानूनी तथ्यों और मामले की सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मामले से जुड़े आरोपों, जांच प्रक्रिया और कथित बरामदगी को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया तथा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से अलंकृत किया।

 

राज्य पुलिस बल की 25 वर्षों की सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में प्रदान किया गया यह निशान उत्तराखण्ड पुलिस के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उत्तराखण्ड यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।

 

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक नारायण सिंह नपलच्याल एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव तथा सराहनीय सेवा के लिए पदक से पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, सहायक सेनानायक प्रतिमा भट्ट एवं सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अभिसूचना सौहकार पुण्डीर को सम्मानित किया। केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के विशेष डाक आवरण एवं पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के प्रत्येक पुलिस अधिकारी और जवान के लिए गौरव का क्षण है। उत्तराखण्ड पुलिस ने अपने सेवा भाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और धार्मिक स्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा तथा चारधाम यात्रा और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों की व्यवस्थाओं का सफल संचालन उत्तराखण्ड पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन पुलिस के जवान पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पुलिस व्यवस्था में आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल प्रणाली को अपनाने से जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली एफआईआर के मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषियों को सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे आम जनता को समयबद्ध न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के उन 206 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 13 हजार जवानों से शुरू हुई उत्तराखण्ड पुलिस की यात्रा आज 26 हजार से अधिक जवानों तक पहुंच चुकी है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं और लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बीच पुलिस ने साहस, संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में पुलिस के जवानों की भूमिका सराहनीय रही है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के प्रयासों में उत्तराखण्ड पुलिस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

उन्होंने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। केंद्र सरकार नशामुक्त भारत के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने नशे के विरुद्ध कार्रवाई और साइबर अपराधों की रोकथाम में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने की दिशा में और प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में उत्तराखण्ड पुलिस के खिलाड़ियों द्वारा 37 पदक अर्जित करने पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने से उत्तराखण्ड पुलिस का मनोबल और बढ़ेगा तथा यह सम्मान पुलिस बल को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना भी आवश्यक है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत करते किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन तथा पुलिस बलों का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखण्ड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा और सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने उत्तराखण्ड पुलिस का नेतृत्व किया, यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पुलिस ने 7 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से उत्तराखण्ड पुलिस को और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।

 

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत एवं डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित विभिन्न दायित्वधारी, जनप्रतिनिधिगण, शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कोटद्वार के प्रमुख बाजारों का पैदल भ्रमण कर क्षेत्रवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

 

इस दौरान उन्होंने दुर्गापुरी बाजार, पटेल मार्ग, बदरीनाथ मार्ग, झंडा चौक, देवी रोड, नजीबाबाद रोड, मालिनी मार्केट और स्टेशन रोड सहित विभिन्न बाजारों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के बीच मिठाई वितरित कर दीपावली की खुशियां साझा कीं।

 

इस अवसर पर नेगी ने कहा कि दीपावली प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का पर्व है। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश से सभी परिवारों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

 

उन्होंने क्षेत्रवासियों से दीपावली सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मनाने की अपील भी की। बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और एक-दूसरे को दीपावली की बधाई दी।

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पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित बैठक आयोजित की जा रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में ग्राम पंचायत प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे।

 

इसी क्रम में पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न समस्याएं और मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

 

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इससे ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सकेगा।

 

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत में ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही समस्याओं के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान तथा गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और शिकायतों का निस्तारण करेंगे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी तथा अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निर्देशों पर प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

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पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने और गांवों में जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पहल की है। विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में अब प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत प्रशासक पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित पहली बैठक में ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचायत संबंधी कुछ कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

पेंशन, सोलर लाइट और जंगली जानवरों से सुरक्षा के मुद्दे उठे

पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

हर माह गांव पहुंचेंगे पंचायत प्रशासक

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान ग्रामीण अपनी समस्याएं और पंचायत से संबंधित कार्य उनके समक्ष रख सकेंगे। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।

प्रधान पद रिक्त होने पर एडीओ पंचायत को सौंपी गई जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। यहां ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है। इसी वजह से पंचायत के नियमित कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासक की व्यवस्था की गई है।

जनता दर्शन में मिली शिकायत के बाद डीएम ने उठाया कदम

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही परेशानियों के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों ने डीएम का जताया आभार

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी और अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं गांव में ही रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

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नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद नौटियाल के परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकाने, प्रभावित करने या दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही वे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर भी रोक रहेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

मां ने कहा—न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता हेमलता नौटियाल और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने हाईकोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिजनों का कहना है कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी सभी तथ्य सामने आएंगे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को प्रमोद नौटियाल के जेल से रिहा होने की संभावना जताई जा रही है।

कथित बरामदगी को लेकर परिवार ने उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रमोद नौटियाल के परिजनों ने जांच और कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप रहा है कि बदरीनाथ स्थित बीकेटीसी के नीलकंठ विश्राम गृह के एक कक्ष से फर्जी तरीके से बरामदगी दिखाई गई।

परिजनों के अनुसार, जिस कक्ष से कथित बरामदगी दिखाई गई, उसे प्रमोद नौटियाल पहले ही खाली कर उसकी चाबी प्रबंधन को सौंप चुके थे। परिवार ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से जानकारी भी मांगी थी और प्राप्त जवाबों को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप कर रहे थे। परिवार की ओर से जांच समिति के सामने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की गई थी।

प्रोटोकॉल अधिकारी और चढ़ावा गिनती की जिम्मेदारी को लेकर भी उठा था विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जब विपक्षी दलों ने बीकेटीसी और प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद प्रमोद नौटियाल को बदरीनाथ में प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और उन्हें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में क्यों लगाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे। वहीं बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को बहस की चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चला।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को मामले में आरोपी बनाया गया था।

अब हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है और प्रकरण में आगे की जांच तथा न्यायिक कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में सह-आरोपी बताए जा रहे पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद राजेंद्र चौहान की जमानत याचिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उनकी जमानत पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध कानूनी तथ्यों और मामले की सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मामले से जुड़े आरोपों, जांच प्रक्रिया और कथित बरामदगी को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

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देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया तथा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से अलंकृत किया।

 

राज्य पुलिस बल की 25 वर्षों की सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में प्रदान किया गया यह निशान उत्तराखण्ड पुलिस के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उत्तराखण्ड यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।

 

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक नारायण सिंह नपलच्याल एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव तथा सराहनीय सेवा के लिए पदक से पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, सहायक सेनानायक प्रतिमा भट्ट एवं सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अभिसूचना सौहकार पुण्डीर को सम्मानित किया। केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के विशेष डाक आवरण एवं पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के प्रत्येक पुलिस अधिकारी और जवान के लिए गौरव का क्षण है। उत्तराखण्ड पुलिस ने अपने सेवा भाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और धार्मिक स्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा तथा चारधाम यात्रा और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों की व्यवस्थाओं का सफल संचालन उत्तराखण्ड पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन पुलिस के जवान पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पुलिस व्यवस्था में आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल प्रणाली को अपनाने से जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली एफआईआर के मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषियों को सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे आम जनता को समयबद्ध न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के उन 206 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 13 हजार जवानों से शुरू हुई उत्तराखण्ड पुलिस की यात्रा आज 26 हजार से अधिक जवानों तक पहुंच चुकी है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं और लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बीच पुलिस ने साहस, संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में पुलिस के जवानों की भूमिका सराहनीय रही है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के प्रयासों में उत्तराखण्ड पुलिस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

उन्होंने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। केंद्र सरकार नशामुक्त भारत के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने नशे के विरुद्ध कार्रवाई और साइबर अपराधों की रोकथाम में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने की दिशा में और प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में उत्तराखण्ड पुलिस के खिलाड़ियों द्वारा 37 पदक अर्जित करने पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने से उत्तराखण्ड पुलिस का मनोबल और बढ़ेगा तथा यह सम्मान पुलिस बल को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना भी आवश्यक है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत करते किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन तथा पुलिस बलों का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखण्ड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा और सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने उत्तराखण्ड पुलिस का नेतृत्व किया, यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पुलिस ने 7 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से उत्तराखण्ड पुलिस को और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।

 

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत एवं डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित विभिन्न दायित्वधारी, जनप्रतिनिधिगण, शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कोटद्वार के प्रमुख बाजारों का पैदल भ्रमण कर क्षेत्रवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

 

इस दौरान उन्होंने दुर्गापुरी बाजार, पटेल मार्ग, बदरीनाथ मार्ग, झंडा चौक, देवी रोड, नजीबाबाद रोड, मालिनी मार्केट और स्टेशन रोड सहित विभिन्न बाजारों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के बीच मिठाई वितरित कर दीपावली की खुशियां साझा कीं।

 

इस अवसर पर नेगी ने कहा कि दीपावली प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का पर्व है। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश से सभी परिवारों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

 

उन्होंने क्षेत्रवासियों से दीपावली सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मनाने की अपील भी की। बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और एक-दूसरे को दीपावली की बधाई दी।

कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री…
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पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित बैठक आयोजित की जा रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में ग्राम पंचायत प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे।

 

इसी क्रम में पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न समस्याएं और मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

 

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इससे ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सकेगा।

 

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत में ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही समस्याओं के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान तथा गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और शिकायतों का निस्तारण करेंगे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी तथा अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निर्देशों पर प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों…
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पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने और गांवों में जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पहल की है। विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में अब प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत प्रशासक पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित पहली बैठक में ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचायत संबंधी कुछ कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

पेंशन, सोलर लाइट और जंगली जानवरों से सुरक्षा के मुद्दे उठे

पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

हर माह गांव पहुंचेंगे पंचायत प्रशासक

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान ग्रामीण अपनी समस्याएं और पंचायत से संबंधित कार्य उनके समक्ष रख सकेंगे। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।

प्रधान पद रिक्त होने पर एडीओ पंचायत को सौंपी गई जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। यहां ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है। इसी वजह से पंचायत के नियमित कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासक की व्यवस्था की गई है।

जनता दर्शन में मिली शिकायत के बाद डीएम ने उठाया कदम

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही परेशानियों के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों ने डीएम का जताया आभार

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी और अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं गांव में ही रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने…
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  • परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत।
  • बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर पहले भी उठाए थे सवाल।

नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद नौटियाल के परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकाने, प्रभावित करने या दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही वे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर भी रोक रहेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

मां ने कहा—न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता हेमलता नौटियाल और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने हाईकोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिजनों का कहना है कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी सभी तथ्य सामने आएंगे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को प्रमोद नौटियाल के जेल से रिहा होने की संभावना जताई जा रही है।

कथित बरामदगी को लेकर परिवार ने उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रमोद नौटियाल के परिजनों ने जांच और कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप रहा है कि बदरीनाथ स्थित बीकेटीसी के नीलकंठ विश्राम गृह के एक कक्ष से फर्जी तरीके से बरामदगी दिखाई गई।

परिजनों के अनुसार, जिस कक्ष से कथित बरामदगी दिखाई गई, उसे प्रमोद नौटियाल पहले ही खाली कर उसकी चाबी प्रबंधन को सौंप चुके थे। परिवार ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से जानकारी भी मांगी थी और प्राप्त जवाबों को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप कर रहे थे। परिवार की ओर से जांच समिति के सामने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की गई थी।

प्रोटोकॉल अधिकारी और चढ़ावा गिनती की जिम्मेदारी को लेकर भी उठा था विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जब विपक्षी दलों ने बीकेटीसी और प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद प्रमोद नौटियाल को बदरीनाथ में प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और उन्हें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में क्यों लगाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे। वहीं बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को बहस की चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चला।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को मामले में आरोपी बनाया गया था।

अब हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है और प्रकरण में आगे की जांच तथा न्यायिक कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में सह-आरोपी बताए जा रहे पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद राजेंद्र चौहान की जमानत याचिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उनकी जमानत पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध कानूनी तथ्यों और मामले की सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मामले से जुड़े आरोपों, जांच प्रक्रिया और कथित बरामदगी को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत। बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर पहले भी उठाए थे सवाल। नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका…

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देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया तथा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से अलंकृत किया।

 

राज्य पुलिस बल की 25 वर्षों की सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में प्रदान किया गया यह निशान उत्तराखण्ड पुलिस के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उत्तराखण्ड यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।

 

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक नारायण सिंह नपलच्याल एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव तथा सराहनीय सेवा के लिए पदक से पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, सहायक सेनानायक प्रतिमा भट्ट एवं सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अभिसूचना सौहकार पुण्डीर को सम्मानित किया। केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के विशेष डाक आवरण एवं पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के प्रत्येक पुलिस अधिकारी और जवान के लिए गौरव का क्षण है। उत्तराखण्ड पुलिस ने अपने सेवा भाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और धार्मिक स्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा तथा चारधाम यात्रा और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों की व्यवस्थाओं का सफल संचालन उत्तराखण्ड पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन पुलिस के जवान पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पुलिस व्यवस्था में आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल प्रणाली को अपनाने से जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली एफआईआर के मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषियों को सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे आम जनता को समयबद्ध न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के उन 206 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 13 हजार जवानों से शुरू हुई उत्तराखण्ड पुलिस की यात्रा आज 26 हजार से अधिक जवानों तक पहुंच चुकी है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं और लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बीच पुलिस ने साहस, संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में पुलिस के जवानों की भूमिका सराहनीय रही है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के प्रयासों में उत्तराखण्ड पुलिस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

उन्होंने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। केंद्र सरकार नशामुक्त भारत के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने नशे के विरुद्ध कार्रवाई और साइबर अपराधों की रोकथाम में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने की दिशा में और प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में उत्तराखण्ड पुलिस के खिलाड़ियों द्वारा 37 पदक अर्जित करने पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने से उत्तराखण्ड पुलिस का मनोबल और बढ़ेगा तथा यह सम्मान पुलिस बल को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना भी आवश्यक है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत करते किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन तथा पुलिस बलों का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखण्ड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा और सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने उत्तराखण्ड पुलिस का नेतृत्व किया, यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पुलिस ने 7 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से उत्तराखण्ड पुलिस को और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।

 

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत एवं डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित विभिन्न दायित्वधारी, जनप्रतिनिधिगण, शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया तथा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस…

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23 साल बाद फिर चर्चा में जैनी प्रकरण, बेटे की पहचान के लिए दोबारा डीएनए जांच की मांग, DGP को सौंपी शिकायत – badhtauttarakhand

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कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कोटद्वार के प्रमुख बाजारों का पैदल भ्रमण कर क्षेत्रवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

 

इस दौरान उन्होंने दुर्गापुरी बाजार, पटेल मार्ग, बदरीनाथ मार्ग, झंडा चौक, देवी रोड, नजीबाबाद रोड, मालिनी मार्केट और स्टेशन रोड सहित विभिन्न बाजारों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के बीच मिठाई वितरित कर दीपावली की खुशियां साझा कीं।

 

इस अवसर पर नेगी ने कहा कि दीपावली प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का पर्व है। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश से सभी परिवारों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

 

उन्होंने क्षेत्रवासियों से दीपावली सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मनाने की अपील भी की। बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और एक-दूसरे को दीपावली की बधाई दी।

कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कोटद्वार के प्रमुख बाजारों का पैदल भ्रमण कर क्षेत्रवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।   इस दौरान उन्होंने दुर्गापुरी बाजार, पटेल मार्ग, बदरीनाथ मार्ग, झंडा चौक, देवी रोड, नजीबाबाद रोड, मालिनी मार्केट और स्टेशन…

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पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित बैठक आयोजित की जा रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में ग्राम पंचायत प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे।

 

इसी क्रम में पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न समस्याएं और मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

 

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इससे ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सकेगा।

 

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत में ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही समस्याओं के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान तथा गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और शिकायतों का निस्तारण करेंगे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी तथा अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निर्देशों पर प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित बैठक आयोजित की जा रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में ग्राम पंचायत प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों…

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पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने और गांवों में जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पहल की है। विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में अब प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत प्रशासक पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित पहली बैठक में ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचायत संबंधी कुछ कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

पेंशन, सोलर लाइट और जंगली जानवरों से सुरक्षा के मुद्दे उठे

पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

हर माह गांव पहुंचेंगे पंचायत प्रशासक

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान ग्रामीण अपनी समस्याएं और पंचायत से संबंधित कार्य उनके समक्ष रख सकेंगे। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।

प्रधान पद रिक्त होने पर एडीओ पंचायत को सौंपी गई जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। यहां ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है। इसी वजह से पंचायत के नियमित कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासक की व्यवस्था की गई है।

जनता दर्शन में मिली शिकायत के बाद डीएम ने उठाया कदम

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही परेशानियों के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों ने डीएम का जताया आभार

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी और अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं गांव में ही रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने और गांवों में जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पहल की है। विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में अब प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत प्रशासक पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे। इस व्यवस्था…

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जलवायु परिवर्तन और आपदा से निपटने में AI बनेगा मददगार, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ – badhtauttarakhand

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उत्तराखंड में सुरक्षित और सतत पर्यटन के लिए आपदा प्रबंधन की प्रभावी तैयारी जरूरी – डॉ. धन सिंह रावत – badhtauttarakhand

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर जवानों को अपने हाथों से खिलाई मिठाई, उनके साथ बाँटी दीपावली की खुशियाँ – badhtauttarakhand

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देहरादून : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से गंभीर रूप से घायल होकर जीवनभर के लिए बिस्तर पर रहने को मजबूर हुए दो आंदोलनकारियों के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब उनकी देखभाल और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से अलग से आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके तहत दोनों आंदोलनकारियों को सहायक रखने के लिए हर महीने 20-20 हजार रुपये मिलेंगे।

 

इस संबंध में गृह विभाग ने आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया है। गृह सचिव शैलेश बगोली की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस सुविधा का लाभ रुड़की निवासी प्रकाश चंद कांति और देहरादून निवासी अमित ओबरॉय को मिलेगा।

 

रामपुर तिराहा कांड में गोली लगने से हुए थे दिव्यांग

दरअसल, उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा कांड में पुलिस की गोलीबारी में दोनों आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना में लगी गोलियों के कारण उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी हो गई कि वे पूरी तरह शय्याग्रस्त हो गए। लंबे समय से उन्हें निरंतर देखभाल और सहायता की आवश्यकता है।

 

ऐसे में उनकी दैनिक देखरेख को आसान बनाने और व्यक्तिगत सहायक की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है।

 

हर महीने 20 हजार रुपये से रख सकेंगे सहायक

सरकार की स्वीकृति के अनुसार, प्रकाश चंद कांति और अमित ओबरॉय को अलग-अलग 20-20 हजार रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। इस धनराशि का उद्देश्य दोनों आंदोलनकारियों के लिए एक-एक सहायक की व्यवस्था करना है, ताकि उन्हें नियमित देखभाल मिल सके और उनके परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त जिम्मेदारी का बोझ भी कुछ कम हो।

 

 

 

इस संबंध में राज्यपाल की ओर से भी प्रत्येक आंदोलनकारी को प्रतिमाह 20 हजार रुपये की सहायता देने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

 

पहले से मिल रही है 30 हजार रुपये की विशेष सम्मान पेंशन

गौरतलब है कि उत्तराखण्ड सरकार पहले ही पूरी तरह शय्याग्रस्त राज्य आंदोलनकारियों के लिए विशेष सम्मान पेंशन की व्यवस्था कर चुकी है। इस योजना के तहत पात्र आंदोलनकारियों को हर महीने 30 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

 

इसी वर्ष फरवरी में जारी शासनादेश के माध्यम से यह व्यवस्था लागू की गई थी। अब सहायक रखने के लिए स्वीकृत 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि से दोनों आंदोलनकारियों को कुल 50 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिलेगी।

 

हालांकि, इसमें 30 हजार रुपये विशेष सम्मान पेंशन के रूप में और 20 हजार रुपये सहायक की व्यवस्था के लिए निर्धारित हैं।

 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से होगा भुगतान

गृह विभाग के शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अतिरिक्त सहायता पर होने वाला व्यय वित्तीय वर्ष 2026-27 में सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य आंदोलनकारी पेंशन मद से वहन किया जाएगा।

 

सरकार के इस निर्णय को उन आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने अलग उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के संघर्ष में गंभीर शारीरिक क्षति झेली। नई व्यवस्था से दोनों आंदोलनकारियों को अपनी देखभाल के लिए सहायक रखने में आर्थिक मदद मिल सकेगी।

देहरादून : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से गंभीर रूप से घायल होकर जीवनभर के लिए बिस्तर पर रहने को मजबूर हुए दो आंदोलनकारियों के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब उनकी देखभाल और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से अलग से आर्थिक सहायता…

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  • परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत।
  • बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर पहले भी उठाए थे सवाल।

नैनीताल/देहरादून। श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण में आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद नौटियाल के परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर जमानत देने के आदेश दिए। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को धमकाने, प्रभावित करने या दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही वे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर भी रोक रहेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

मां ने कहा—न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

प्रमोद नौटियाल की जमानत मंजूर होने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी माता हेमलता नौटियाल और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने हाईकोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परिजनों का कहना है कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी सभी तथ्य सामने आएंगे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार को प्रमोद नौटियाल के जेल से रिहा होने की संभावना जताई जा रही है।

कथित बरामदगी को लेकर परिवार ने उठाए थे सवाल

इस मामले में प्रमोद नौटियाल के परिजनों ने जांच और कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप रहा है कि बदरीनाथ स्थित बीकेटीसी के नीलकंठ विश्राम गृह के एक कक्ष से फर्जी तरीके से बरामदगी दिखाई गई।

परिजनों के अनुसार, जिस कक्ष से कथित बरामदगी दिखाई गई, उसे प्रमोद नौटियाल पहले ही खाली कर उसकी चाबी प्रबंधन को सौंप चुके थे। परिवार ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से जानकारी भी मांगी थी और प्राप्त जवाबों को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप कर रहे थे। परिवार की ओर से जांच समिति के सामने विभिन्न तथ्यों को रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की गई थी।

प्रोटोकॉल अधिकारी और चढ़ावा गिनती की जिम्मेदारी को लेकर भी उठा था विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जब विपक्षी दलों ने बीकेटीसी और प्रदेश सरकार से कई सवाल किए। कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक होने के बावजूद प्रमोद नौटियाल को बदरीनाथ में प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और उन्हें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में क्यों लगाया गया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे। वहीं बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को बहस की चुनौती दी थी। इस मुद्दे पर कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंसों का दौर चला।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावे के रूप में दी जाने वाली नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों से जुड़े कथित हेराफेरी प्रकरण ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद प्रमोद नौटियाल को मामले में आरोपी बनाया गया था।

अब हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है और प्रकरण में आगे की जांच तथा न्यायिक कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में सह-आरोपी बताए जा रहे पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की जमानत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद राजेंद्र चौहान की जमानत याचिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उनकी जमानत पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध कानूनी तथ्यों और मामले की सुनवाई के आधार पर ही किया जाएगा।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मामले से जुड़े आरोपों, जांच प्रक्रिया और कथित बरामदगी को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

परिजनों ने फैसले को बताया न्याय की जीत। बरामदगी और…
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देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड पुलिस के राष्ट्रपति पुलिस निशान अलंकरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया तथा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से अलंकृत किया।

 

राज्य पुलिस बल की 25 वर्षों की सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान में प्रदान किया गया यह निशान उत्तराखण्ड पुलिस के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उत्तराखण्ड यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।

 

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक नारायण सिंह नपलच्याल एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव तथा सराहनीय सेवा के लिए पदक से पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, सहायक सेनानायक प्रतिमा भट्ट एवं सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अभिसूचना सौहकार पुण्डीर को सम्मानित किया। केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के विशेष डाक आवरण एवं पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रदेश के प्रत्येक पुलिस अधिकारी और जवान के लिए गौरव का क्षण है। उत्तराखण्ड पुलिस ने अपने सेवा भाव, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और धार्मिक स्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा तथा चारधाम यात्रा और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों की व्यवस्थाओं का सफल संचालन उत्तराखण्ड पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन पुलिस के जवान पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पुलिस व्यवस्था में आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल प्रणाली को अपनाने से जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली एफआईआर के मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषियों को सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे आम जनता को समयबद्ध न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के उन 206 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 13 हजार जवानों से शुरू हुई उत्तराखण्ड पुलिस की यात्रा आज 26 हजार से अधिक जवानों तक पहुंच चुकी है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं और लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बीच पुलिस ने साहस, संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में पुलिस के जवानों की भूमिका सराहनीय रही है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के प्रयासों में उत्तराखण्ड पुलिस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

उन्होंने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। केंद्र सरकार नशामुक्त भारत के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस ने नशे के विरुद्ध कार्रवाई और साइबर अपराधों की रोकथाम में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने की दिशा में और प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में उत्तराखण्ड पुलिस के खिलाड़ियों द्वारा 37 पदक अर्जित करने पर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने से उत्तराखण्ड पुलिस का मनोबल और बढ़ेगा तथा यह सम्मान पुलिस बल को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना भी आवश्यक है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत करते किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन तथा पुलिस बलों का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखण्ड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा और सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने उत्तराखण्ड पुलिस का नेतृत्व किया, यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पुलिस ने 7 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से उत्तराखण्ड पुलिस को और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।

 

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत एवं डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित विभिन्न दायित्वधारी, जनप्रतिनिधिगण, शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

देहरादून : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं…
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कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कोटद्वार के प्रमुख बाजारों का पैदल भ्रमण कर क्षेत्रवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

 

इस दौरान उन्होंने दुर्गापुरी बाजार, पटेल मार्ग, बदरीनाथ मार्ग, झंडा चौक, देवी रोड, नजीबाबाद रोड, मालिनी मार्केट और स्टेशन रोड सहित विभिन्न बाजारों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के बीच मिठाई वितरित कर दीपावली की खुशियां साझा कीं।

 

इस अवसर पर नेगी ने कहा कि दीपावली प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का पर्व है। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश से सभी परिवारों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

 

उन्होंने क्षेत्रवासियों से दीपावली सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मनाने की अपील भी की। बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और एक-दूसरे को दीपावली की बधाई दी।

कोटद्वार : दीपावली के पावन अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री…
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पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित बैठक आयोजित की जा रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में ग्राम पंचायत प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे।

 

इसी क्रम में पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न समस्याएं और मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

 

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इससे ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से संबंधित छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सकेगा।

 

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत में ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही समस्याओं के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान तथा गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासक प्रत्येक माह की 5 तारीख को गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और शिकायतों का निस्तारण करेंगे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी तथा अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निर्देशों पर प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी : विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में ग्रामीणों…
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पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने और गांवों में जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पहल की है। विकासखंड कल्जीखाल की ग्राम पंचायत डांगी में अब प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत प्रशासक पंचायत भवन में उपस्थित होकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर आयोजित पहली बैठक में ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पंचायत संबंधी कुछ कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

पेंशन, सोलर लाइट और जंगली जानवरों से सुरक्षा के मुद्दे उठे

पंचायत भवन डांगी में प्रशासक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं संशोधन, किसान पेंशन, सोलर लाइट, स्वच्छता के तहत झाड़ियों की कटाई, जंगली जानवरों से सुरक्षा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के रिक्त पदों को भरने सहित विभिन्न मांगें रखीं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य पंचायत संबंधी कार्यों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

हर माह गांव पहुंचेंगे पंचायत प्रशासक

प्रशासक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वह प्रत्येक माह की 5 तारीख को पंचायत भवन में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान ग्रामीण अपनी समस्याएं और पंचायत से संबंधित कार्य उनके समक्ष रख सकेंगे। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।

प्रधान पद रिक्त होने पर एडीओ पंचायत को सौंपी गई जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत डांगी में प्रधान पद रिक्त होने के कारण पंचायत का कार्यभार प्रशासक के रूप में सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरुण रावत को सौंपा गया है। यहां ओबीसी महिला आरक्षित वर्ग के अंतर्गत प्रधान पद रिक्त चल रहा है। इसी वजह से पंचायत के नियमित कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासक की व्यवस्था की गई है।

जनता दर्शन में मिली शिकायत के बाद डीएम ने उठाया कदम

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनता दर्शन कार्यक्रम में ग्राम डांगी में प्रधान पद रिक्त होने और ग्रामीणों को आ रही परेशानियों के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ गांव में विकास कार्यों एवं जनसुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों ने डीएम का जताया आभार

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी और अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रशासक की नियमित उपस्थिति से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं गांव में ही रखने और उनका समाधान कराने की सुविधा मिल रही है।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रजनीश सुंदरियाल, पूर्व प्रधान भगवान सिंह चौहान, वीर सिंह चौहान, वन पंचायत सरपंच मीना देवी, दमयंती देवी, कांति देवी, पुष्पा देवी, ग्राम पंचायत सदस्य वृंदा रावत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पौड़ी। ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने…