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  • डीए और 365 दिन रोजगार की मांग पर सरकार को घेरा
  • मार्च से चल रहा था धरना, जुलाई में आश्वासन के बाद हुआ था स्थगित

देहरादून। छह कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद मांगें कैबिनेट के सामने नहीं रखे जाने से प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीआरडी हित संगठन ने सरकार को आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के जवान व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने बताया कि पीआरडी जवान 18 मार्च से एकता विहार, सहस्रधारा रोड पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे। छह जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्या को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया। मंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक युवा कल्याण एवं पीआरडी ने धरनास्थल पर संगठन से वार्ता की और मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद 7 जुलाई को धरना स्थगित कर दिया गया।

संगठन की मुख्य मांगों में होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) देने और 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

संगठन पदाधिकारियों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दोनों मांगों को आगामी दो कैबिनेट बैठकों में रखा जाएगा। उनका कहना है कि इसके बाद छह कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों को अब तक कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया। इससे प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में नाराजगी बढ़ रही है।

संगठन ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय में मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के पीआरडी जवान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे। संगठन ने आंदोलन की स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत, प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, मीडिया प्रभारी विनोद तोमर, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्येंद्र नौगाई, प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश सैनी, प्रदेश सह-सचिव भगत सिंह दानू, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट और जिला महासचिव पवन किशोर बहुगुणा समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। गढ़भोज दिवस 2026 का विषय- ‘गढ़भोज : स्वस्थ उत्तरााखण्ड की ओर एक सशक्त कदम’ निश्चित किया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सोत्साह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के लिए विषय पर आधारित उत्तरााखण्ड के पारंपरिक व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। व्यंजन प्रतियोगिता में कु. प्रिया बी. ए. 3 सेम ने कंडाली पनीर की सब्जी बनाकर प्रथम स्थान, अमीषा रावत ने आटे का मीठा चीला (लगड़ी) बनाकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

 प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा परिणाम की घोषणा की गई; डॉ. अर्चना नौटियाल, डॉ. अजय रावत एवं डॉ. पवनिका चंदोला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम की सह संयोजक डॉ. दुर्गा रजक ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया एवं संयोजक डॉ. सुमन कुकरेती ने गढ़भोज दिवस मनाने की परंपरा को बताते हुए उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजनों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. संगीता गुप्ता क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून मौजूद रहीं। उन्होंने पारम्परिक व्यंजन बनाने हेतु छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया एवं पारंपरिक व्यंजनों का महत्व बताया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी ने पारंपरिक व्यंजन एवं स्वास्थ्य, युवाओं द्वारा पारंपरिक फसलों एवं व्यंजनों से जुड़कर रोजगार प्राप्त करने के विविध आयामों पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में समस्त शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्रों ने सामूहिक गढ़भोज का आनंद लिया।

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देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से जुड़ाव महज फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और पहाड़ के लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने यहां अपना आशियाना बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।

नाना पाटेकर की उत्तराखण्ड से जुड़ी इसी इच्छा की चर्चा अब एक अधूरे सपने के तौर पर हो रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड में जमीन लेकर घर बनाने की बात कही थी, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी।

 

मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात में कही थी घर बनाने की बात

1 अक्टूबर 2022 को नाना पाटेकर ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था।

मुलाकात के दौरान नाना पाटेकर ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक वातावरण और यहां के लोगों के व्यवहार की जमकर तारीफ की थी। बातचीत में उन्होंने यह इच्छा भी व्यक्त की थी कि वह देवभूमि में अपना घर बनाना चाहते हैं।

उनकी इस बात से साफ था कि उत्तराखंड उनके लिए सिर्फ शूटिंग की लोकेशन नहीं, बल्कि ऐसा स्थान बन चुका था जहां वह भविष्य में कुछ समय बिताना चाहते थे।

 

जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब नौ दिन

नाना पाटेकर इससे पहले चमोली जिले के जोशीमठ और नीती घाटी क्षेत्र में एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान उन्होंने करीब नौ दिन पहाड़ों में बिताए।

इस दौरान उन्हें उत्तराखण्ड के पहाड़ी जीवन को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने यहां के रहन-सहन, खानपान और मौसम के बारे में जानकारी ली। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्थानीय स्तर पर उस समय यह बात सामने आई थी कि नाना पाटेकर उत्तराखण्ड के शांत माहौल से खासे प्रभावित थे और भविष्य में यहां जमीन लेकर घर बनाने की इच्छा रखते थे।

 

पहाड़ों की सादगी ने खींचा था नाना का ध्यान

फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना ने केवल प्राकृतिक नजारों को ही नहीं देखा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली में भी रुचि दिखाई। पहाड़ी भोजन से लेकर आसपास के पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक के बारे में उन्होंने जानकारी ली।

उत्तराखण्ड की यही सादगी और शांत वातावरण उन्हें पसंद आया था। यही वजह रही कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी उनका उत्तराखण्ड से जुड़ाव बना रहा और उन्होंने यहां अपना घर बनाने की इच्छा जताई।

 

देवभूमि में घर बसाने का सपना नहीं हो सका पूरा

नाना पाटेकर के लिए उत्तराखण्ड में घर बनाने की इच्छा महज एक सामान्य पसंद नहीं थी। पहाड़ों में बिताए समय के दौरान उन्होंने जिस अपनापन और सुकून को महसूस किया, उसने उन्हें देवभूमि में बसने के बारे में सोचने पर मजबूर किया था।

हालांकि, उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उत्तराखण्ड की वादियां आज भी उस अभिनेता की उस इच्छा की गवाह हैं, जिसने कभी इन पहाड़ों को अपना घर बनाने के लिए चुना था।

नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से यह रिश्ता उनकी फिल्मों और शूटिंग से आगे बढ़कर एक निजी लगाव में बदल गया था। पहाड़ों में घर बनाने की उनकी इच्छा अब उनके चाहने वालों के लिए एक अधूरे सपने और उत्तराखंड से उनके खास जुड़ाव की याद बनकर रह गई है।

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रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति तथा पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। गढ़भोज में चैंसू, फाणु, कफुली, भट्ट की चुरकाणी सहित अनेक पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे।

अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने कहा कि आज की नई पीढ़ी फास्ट फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। ऐसे समय में पौष्टिक एवं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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  • ‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक दमदार अभिनय की छोड़ी अमिट छाप, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। बताया गया है कि सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास सफल नहीं हो सके। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए लंबे समय तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मामले में मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

विश्वनाथ पाटेकर से बने नाना

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। अभिनय के साथ-साथ वह निर्देशक, लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में भी सक्रिय रहे। अपने सशक्त संवाद अदायगी और अलग-अलग तरह के किरदारों के कारण उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1988 में मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ में उनके अभिनय को सराहा गया। इसके बाद 1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म में गैंगस्टर की भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक बनाई पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए। ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

गंभीर और आक्रामक भूमिकाओं के लिए पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर ने कॉमेडी और व्यावसायिक सिनेमा में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी अभिनय क्षमता का एक अलग पक्ष दर्शकों के सामने रखा।

‘क्रांतिवीर’ ने दिलाया राष्ट्रीय पुरस्कार

वर्ष 1994 में रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका था।

अपने शानदार अभिनय के लिए नाना पाटेकर को कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

निर्देशन में भी आजमाया हाथ

नाना पाटेकर केवल अभिनेता ही नहीं थे। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ प्रमुख रही। मराठी सिनेमा में भी उन्होंने लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।

सेना से भी रहा जुड़ाव

फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर का भारतीय प्रादेशिक सेना से भी जुड़ाव रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1990 में उन्हें भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद कप्तान नियुक्त किया गया था। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में मानद मेजर के तौर पर सेवाएं भी दी थीं।

अभिनय की एक अलग शैली के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

नाना पाटेकर की पहचान केवल उनके निभाए किरदारों से नहीं, बल्कि संवाद बोलने की विशिष्ट शैली, भावनात्मक अभिव्यक्ति और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता से बनी। उन्होंने पर्दे पर नायक, खलनायक, पुलिस अधिकारी, सैनिक, गैंगस्टर और आम आदमी जैसे कई किरदारों को जीवंत किया।

उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ से ‘वेलकम’ तक नाना पाटेकर का फिल्मी सफर भारतीय सिनेमा के यादगार अध्यायों में शामिल रहेगा।

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  • मार्च से चल रहा था धरना, जुलाई में आश्वासन के बाद हुआ था स्थगित

देहरादून। छह कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद मांगें कैबिनेट के सामने नहीं रखे जाने से प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीआरडी हित संगठन ने सरकार को आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के जवान व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने बताया कि पीआरडी जवान 18 मार्च से एकता विहार, सहस्रधारा रोड पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे। छह जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्या को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया। मंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक युवा कल्याण एवं पीआरडी ने धरनास्थल पर संगठन से वार्ता की और मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद 7 जुलाई को धरना स्थगित कर दिया गया।

संगठन की मुख्य मांगों में होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) देने और 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

संगठन पदाधिकारियों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दोनों मांगों को आगामी दो कैबिनेट बैठकों में रखा जाएगा। उनका कहना है कि इसके बाद छह कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों को अब तक कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया। इससे प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में नाराजगी बढ़ रही है।

संगठन ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय में मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के पीआरडी जवान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे। संगठन ने आंदोलन की स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत, प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, मीडिया प्रभारी विनोद तोमर, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्येंद्र नौगाई, प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश सैनी, प्रदेश सह-सचिव भगत सिंह दानू, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट और जिला महासचिव पवन किशोर बहुगुणा समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

डीए और 365 दिन रोजगार की मांग पर सरकार को…
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जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। गढ़भोज दिवस 2026 का विषय- ‘गढ़भोज : स्वस्थ उत्तरााखण्ड की ओर एक सशक्त कदम’ निश्चित किया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सोत्साह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के लिए विषय पर आधारित उत्तरााखण्ड के पारंपरिक व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। व्यंजन प्रतियोगिता में कु. प्रिया बी. ए. 3 सेम ने कंडाली पनीर की सब्जी बनाकर प्रथम स्थान, अमीषा रावत ने आटे का मीठा चीला (लगड़ी) बनाकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

 प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा परिणाम की घोषणा की गई; डॉ. अर्चना नौटियाल, डॉ. अजय रावत एवं डॉ. पवनिका चंदोला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम की सह संयोजक डॉ. दुर्गा रजक ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया एवं संयोजक डॉ. सुमन कुकरेती ने गढ़भोज दिवस मनाने की परंपरा को बताते हुए उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजनों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. संगीता गुप्ता क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून मौजूद रहीं। उन्होंने पारम्परिक व्यंजन बनाने हेतु छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया एवं पारंपरिक व्यंजनों का महत्व बताया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी ने पारंपरिक व्यंजन एवं स्वास्थ्य, युवाओं द्वारा पारंपरिक फसलों एवं व्यंजनों से जुड़कर रोजगार प्राप्त करने के विविध आयामों पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में समस्त शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्रों ने सामूहिक गढ़भोज का आनंद लिया।

जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7…
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देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से जुड़ाव महज फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और पहाड़ के लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने यहां अपना आशियाना बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।

नाना पाटेकर की उत्तराखण्ड से जुड़ी इसी इच्छा की चर्चा अब एक अधूरे सपने के तौर पर हो रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड में जमीन लेकर घर बनाने की बात कही थी, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी।

 

मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात में कही थी घर बनाने की बात

1 अक्टूबर 2022 को नाना पाटेकर ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था।

मुलाकात के दौरान नाना पाटेकर ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक वातावरण और यहां के लोगों के व्यवहार की जमकर तारीफ की थी। बातचीत में उन्होंने यह इच्छा भी व्यक्त की थी कि वह देवभूमि में अपना घर बनाना चाहते हैं।

उनकी इस बात से साफ था कि उत्तराखंड उनके लिए सिर्फ शूटिंग की लोकेशन नहीं, बल्कि ऐसा स्थान बन चुका था जहां वह भविष्य में कुछ समय बिताना चाहते थे।

 

जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब नौ दिन

नाना पाटेकर इससे पहले चमोली जिले के जोशीमठ और नीती घाटी क्षेत्र में एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान उन्होंने करीब नौ दिन पहाड़ों में बिताए।

इस दौरान उन्हें उत्तराखण्ड के पहाड़ी जीवन को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने यहां के रहन-सहन, खानपान और मौसम के बारे में जानकारी ली। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्थानीय स्तर पर उस समय यह बात सामने आई थी कि नाना पाटेकर उत्तराखण्ड के शांत माहौल से खासे प्रभावित थे और भविष्य में यहां जमीन लेकर घर बनाने की इच्छा रखते थे।

 

पहाड़ों की सादगी ने खींचा था नाना का ध्यान

फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना ने केवल प्राकृतिक नजारों को ही नहीं देखा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली में भी रुचि दिखाई। पहाड़ी भोजन से लेकर आसपास के पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक के बारे में उन्होंने जानकारी ली।

उत्तराखण्ड की यही सादगी और शांत वातावरण उन्हें पसंद आया था। यही वजह रही कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी उनका उत्तराखण्ड से जुड़ाव बना रहा और उन्होंने यहां अपना घर बनाने की इच्छा जताई।

 

देवभूमि में घर बसाने का सपना नहीं हो सका पूरा

नाना पाटेकर के लिए उत्तराखण्ड में घर बनाने की इच्छा महज एक सामान्य पसंद नहीं थी। पहाड़ों में बिताए समय के दौरान उन्होंने जिस अपनापन और सुकून को महसूस किया, उसने उन्हें देवभूमि में बसने के बारे में सोचने पर मजबूर किया था।

हालांकि, उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उत्तराखण्ड की वादियां आज भी उस अभिनेता की उस इच्छा की गवाह हैं, जिसने कभी इन पहाड़ों को अपना घर बनाने के लिए चुना था।

नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से यह रिश्ता उनकी फिल्मों और शूटिंग से आगे बढ़कर एक निजी लगाव में बदल गया था। पहाड़ों में घर बनाने की उनकी इच्छा अब उनके चाहने वालों के लिए एक अधूरे सपने और उत्तराखंड से उनके खास जुड़ाव की याद बनकर रह गई है।

देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के…
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रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति तथा पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। गढ़भोज में चैंसू, फाणु, कफुली, भट्ट की चुरकाणी सहित अनेक पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे।

अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने कहा कि आज की नई पीढ़ी फास्ट फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। ऐसे समय में पौष्टिक एवं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति…
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  • ‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक दमदार अभिनय की छोड़ी अमिट छाप, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। बताया गया है कि सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास सफल नहीं हो सके। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए लंबे समय तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मामले में मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

विश्वनाथ पाटेकर से बने नाना

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। अभिनय के साथ-साथ वह निर्देशक, लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में भी सक्रिय रहे। अपने सशक्त संवाद अदायगी और अलग-अलग तरह के किरदारों के कारण उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1988 में मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ में उनके अभिनय को सराहा गया। इसके बाद 1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म में गैंगस्टर की भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक बनाई पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए। ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

गंभीर और आक्रामक भूमिकाओं के लिए पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर ने कॉमेडी और व्यावसायिक सिनेमा में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी अभिनय क्षमता का एक अलग पक्ष दर्शकों के सामने रखा।

‘क्रांतिवीर’ ने दिलाया राष्ट्रीय पुरस्कार

वर्ष 1994 में रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका था।

अपने शानदार अभिनय के लिए नाना पाटेकर को कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

निर्देशन में भी आजमाया हाथ

नाना पाटेकर केवल अभिनेता ही नहीं थे। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ प्रमुख रही। मराठी सिनेमा में भी उन्होंने लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।

सेना से भी रहा जुड़ाव

फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर का भारतीय प्रादेशिक सेना से भी जुड़ाव रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1990 में उन्हें भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद कप्तान नियुक्त किया गया था। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में मानद मेजर के तौर पर सेवाएं भी दी थीं।

अभिनय की एक अलग शैली के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

नाना पाटेकर की पहचान केवल उनके निभाए किरदारों से नहीं, बल्कि संवाद बोलने की विशिष्ट शैली, भावनात्मक अभिव्यक्ति और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता से बनी। उन्होंने पर्दे पर नायक, खलनायक, पुलिस अधिकारी, सैनिक, गैंगस्टर और आम आदमी जैसे कई किरदारों को जीवंत किया।

उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ से ‘वेलकम’ तक नाना पाटेकर का फिल्मी सफर भारतीय सिनेमा के यादगार अध्यायों में शामिल रहेगा।

‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक दमदार अभिनय की छोड़ी अमिट छाप,…
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वोट बचाओ-देश बचाओ के नारों से गूंजा गोपेश्वर, कांग्रेस ने फूंका मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पुतला – badhtauttarakhand

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  • डीए और 365 दिन रोजगार की मांग पर सरकार को घेरा
  • मार्च से चल रहा था धरना, जुलाई में आश्वासन के बाद हुआ था स्थगित

देहरादून। छह कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद मांगें कैबिनेट के सामने नहीं रखे जाने से प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीआरडी हित संगठन ने सरकार को आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के जवान व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने बताया कि पीआरडी जवान 18 मार्च से एकता विहार, सहस्रधारा रोड पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे। छह जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्या को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया। मंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक युवा कल्याण एवं पीआरडी ने धरनास्थल पर संगठन से वार्ता की और मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद 7 जुलाई को धरना स्थगित कर दिया गया।

संगठन की मुख्य मांगों में होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) देने और 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

संगठन पदाधिकारियों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दोनों मांगों को आगामी दो कैबिनेट बैठकों में रखा जाएगा। उनका कहना है कि इसके बाद छह कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों को अब तक कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया। इससे प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में नाराजगी बढ़ रही है।

संगठन ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय में मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के पीआरडी जवान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे। संगठन ने आंदोलन की स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत, प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, मीडिया प्रभारी विनोद तोमर, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्येंद्र नौगाई, प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश सैनी, प्रदेश सह-सचिव भगत सिंह दानू, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट और जिला महासचिव पवन किशोर बहुगुणा समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

डीए और 365 दिन रोजगार की मांग पर सरकार को घेरा मार्च से चल रहा था धरना, जुलाई में आश्वासन के बाद हुआ था स्थगित देहरादून। छह कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद मांगें कैबिनेट के सामने नहीं रखे जाने से प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीआरडी हित संगठन ने…

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जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। गढ़भोज दिवस 2026 का विषय- ‘गढ़भोज : स्वस्थ उत्तरााखण्ड की ओर एक सशक्त कदम’ निश्चित किया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सोत्साह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के लिए विषय पर आधारित उत्तरााखण्ड के पारंपरिक व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। व्यंजन प्रतियोगिता में कु. प्रिया बी. ए. 3 सेम ने कंडाली पनीर की सब्जी बनाकर प्रथम स्थान, अमीषा रावत ने आटे का मीठा चीला (लगड़ी) बनाकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

 प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा परिणाम की घोषणा की गई; डॉ. अर्चना नौटियाल, डॉ. अजय रावत एवं डॉ. पवनिका चंदोला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम की सह संयोजक डॉ. दुर्गा रजक ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया एवं संयोजक डॉ. सुमन कुकरेती ने गढ़भोज दिवस मनाने की परंपरा को बताते हुए उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजनों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. संगीता गुप्ता क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून मौजूद रहीं। उन्होंने पारम्परिक व्यंजन बनाने हेतु छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया एवं पारंपरिक व्यंजनों का महत्व बताया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी ने पारंपरिक व्यंजन एवं स्वास्थ्य, युवाओं द्वारा पारंपरिक फसलों एवं व्यंजनों से जुड़कर रोजगार प्राप्त करने के विविध आयामों पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में समस्त शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्रों ने सामूहिक गढ़भोज का आनंद लिया।

जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। गढ़भोज दिवस 2026 का विषय- ‘गढ़भोज : स्वस्थ उत्तरााखण्ड की ओर एक सशक्त कदम’ निश्चित किया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सोत्साह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के लिए विषय…

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देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से जुड़ाव महज फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और पहाड़ के लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने यहां अपना आशियाना बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।

नाना पाटेकर की उत्तराखण्ड से जुड़ी इसी इच्छा की चर्चा अब एक अधूरे सपने के तौर पर हो रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड में जमीन लेकर घर बनाने की बात कही थी, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी।

 

मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात में कही थी घर बनाने की बात

1 अक्टूबर 2022 को नाना पाटेकर ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था।

मुलाकात के दौरान नाना पाटेकर ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक वातावरण और यहां के लोगों के व्यवहार की जमकर तारीफ की थी। बातचीत में उन्होंने यह इच्छा भी व्यक्त की थी कि वह देवभूमि में अपना घर बनाना चाहते हैं।

उनकी इस बात से साफ था कि उत्तराखंड उनके लिए सिर्फ शूटिंग की लोकेशन नहीं, बल्कि ऐसा स्थान बन चुका था जहां वह भविष्य में कुछ समय बिताना चाहते थे।

 

जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब नौ दिन

नाना पाटेकर इससे पहले चमोली जिले के जोशीमठ और नीती घाटी क्षेत्र में एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान उन्होंने करीब नौ दिन पहाड़ों में बिताए।

इस दौरान उन्हें उत्तराखण्ड के पहाड़ी जीवन को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने यहां के रहन-सहन, खानपान और मौसम के बारे में जानकारी ली। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्थानीय स्तर पर उस समय यह बात सामने आई थी कि नाना पाटेकर उत्तराखण्ड के शांत माहौल से खासे प्रभावित थे और भविष्य में यहां जमीन लेकर घर बनाने की इच्छा रखते थे।

 

पहाड़ों की सादगी ने खींचा था नाना का ध्यान

फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना ने केवल प्राकृतिक नजारों को ही नहीं देखा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली में भी रुचि दिखाई। पहाड़ी भोजन से लेकर आसपास के पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक के बारे में उन्होंने जानकारी ली।

उत्तराखण्ड की यही सादगी और शांत वातावरण उन्हें पसंद आया था। यही वजह रही कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी उनका उत्तराखण्ड से जुड़ाव बना रहा और उन्होंने यहां अपना घर बनाने की इच्छा जताई।

 

देवभूमि में घर बसाने का सपना नहीं हो सका पूरा

नाना पाटेकर के लिए उत्तराखण्ड में घर बनाने की इच्छा महज एक सामान्य पसंद नहीं थी। पहाड़ों में बिताए समय के दौरान उन्होंने जिस अपनापन और सुकून को महसूस किया, उसने उन्हें देवभूमि में बसने के बारे में सोचने पर मजबूर किया था।

हालांकि, उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उत्तराखण्ड की वादियां आज भी उस अभिनेता की उस इच्छा की गवाह हैं, जिसने कभी इन पहाड़ों को अपना घर बनाने के लिए चुना था।

नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से यह रिश्ता उनकी फिल्मों और शूटिंग से आगे बढ़कर एक निजी लगाव में बदल गया था। पहाड़ों में घर बनाने की उनकी इच्छा अब उनके चाहने वालों के लिए एक अधूरे सपने और उत्तराखंड से उनके खास जुड़ाव की याद बनकर रह गई है।

देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से जुड़ाव महज फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और पहाड़ के लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने यहां अपना आशियाना बनाने की इच्छा…

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CEC ज्ञानेश कुमार की Z प्लस सुरक्षा हुई और मजबूत, विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच केंद्र का फैसला – badhtauttarakhand

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रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति तथा पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। गढ़भोज में चैंसू, फाणु, कफुली, भट्ट की चुरकाणी सहित अनेक पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे।

अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने कहा कि आज की नई पीढ़ी फास्ट फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। ऐसे समय में पौष्टिक एवं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति तथा पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी प्रतिभा…

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  • ‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक दमदार अभिनय की छोड़ी अमिट छाप, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। बताया गया है कि सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास सफल नहीं हो सके। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए लंबे समय तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मामले में मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

विश्वनाथ पाटेकर से बने नाना

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। अभिनय के साथ-साथ वह निर्देशक, लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में भी सक्रिय रहे। अपने सशक्त संवाद अदायगी और अलग-अलग तरह के किरदारों के कारण उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1988 में मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे!’ में उनके अभिनय को सराहा गया। इसके बाद 1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म में गैंगस्टर की भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक बनाई पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए। ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

गंभीर और आक्रामक भूमिकाओं के लिए पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर ने कॉमेडी और व्यावसायिक सिनेमा में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी अभिनय क्षमता का एक अलग पक्ष दर्शकों के सामने रखा।

‘क्रांतिवीर’ ने दिलाया राष्ट्रीय पुरस्कार

वर्ष 1994 में रिलीज हुई ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका था।

अपने शानदार अभिनय के लिए नाना पाटेकर को कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

निर्देशन में भी आजमाया हाथ

नाना पाटेकर केवल अभिनेता ही नहीं थे। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ प्रमुख रही। मराठी सिनेमा में भी उन्होंने लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।

सेना से भी रहा जुड़ाव

फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर का भारतीय प्रादेशिक सेना से भी जुड़ाव रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1990 में उन्हें भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद कप्तान नियुक्त किया गया था। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में मानद मेजर के तौर पर सेवाएं भी दी थीं।

अभिनय की एक अलग शैली के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

नाना पाटेकर की पहचान केवल उनके निभाए किरदारों से नहीं, बल्कि संवाद बोलने की विशिष्ट शैली, भावनात्मक अभिव्यक्ति और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता से बनी। उन्होंने पर्दे पर नायक, खलनायक, पुलिस अधिकारी, सैनिक, गैंगस्टर और आम आदमी जैसे कई किरदारों को जीवंत किया।

उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने दशकों तक अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ से ‘वेलकम’ तक नाना पाटेकर का फिल्मी सफर भारतीय सिनेमा के यादगार अध्यायों में शामिल रहेगा।

‘परिंदा’ से ‘वेलकम’ तक दमदार अभिनय की छोड़ी अमिट छाप, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से हुए सम्मानित मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। बताया गया है कि सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट…

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बजाज फाइनेंस ने फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में 40 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी की; वरिष्ठ नागरिक सालाना कमा सकते हैं 8.15% तक ब्याज; रिन्यूअल पर मिलेगा सालाना 0.10% अतिरिक्त ब्याज – badhtauttarakhand

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डीएम स्वाति एस. भदौरिया की पहल से बदलेगी आंगनबाड़ी की तस्वीर, प्रोजेक्ट बचपन से 57 केंद्र आधुनिक – badhtauttarakhand

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उत्तराखंड में मौसम ने बदली करवट, अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं का अनुमान

देहरादून। मौसम विभाग का तेज हवाओं के साथ बारिश का पूर्वानुमान बुधवार को सटीक साबित हुआ। देहरादून समेत प्रदेश के कई जिलों में अचानक मौसम बदला और तेज झोंकेदार हवाओं के साथ बारिश हुई। तेज हवाओं के चलते कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने की सूचनाएं भी सामने आईं। मौसम विभाग ने अब अगले दो दिनों…

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देहरादून। छह कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद मांगें कैबिनेट के सामने नहीं रखे जाने से प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों का धैर्य जवाब देने लगा है। पीआरडी हित संगठन ने सरकार को आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के जवान व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने बताया कि पीआरडी जवान 18 मार्च से एकता विहार, सहस्रधारा रोड पर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे। छह जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्या को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया। मंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक युवा कल्याण एवं पीआरडी ने धरनास्थल पर संगठन से वार्ता की और मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद 7 जुलाई को धरना स्थगित कर दिया गया।

संगठन की मुख्य मांगों में होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) देने और 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

संगठन पदाधिकारियों के अनुसार उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दोनों मांगों को आगामी दो कैबिनेट बैठकों में रखा जाएगा। उनका कहना है कि इसके बाद छह कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों को अब तक कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया। इससे प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में नाराजगी बढ़ रही है।

संगठन ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय में मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के पीआरडी जवान लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे। संगठन ने आंदोलन की स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत, प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, मीडिया प्रभारी विनोद तोमर, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर तोमर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्येंद्र नौगाई, प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश सैनी, प्रदेश सह-सचिव भगत सिंह दानू, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट और जिला महासचिव पवन किशोर बहुगुणा समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

डीए और 365 दिन रोजगार की मांग पर सरकार को…
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जयहरीखाल : भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयहरीखाल में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। गढ़भोज दिवस 2026 का विषय- ‘गढ़भोज : स्वस्थ उत्तरााखण्ड की ओर एक सशक्त कदम’ निश्चित किया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सोत्साह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के लिए विषय पर आधारित उत्तरााखण्ड के पारंपरिक व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। व्यंजन प्रतियोगिता में कु. प्रिया बी. ए. 3 सेम ने कंडाली पनीर की सब्जी बनाकर प्रथम स्थान, अमीषा रावत ने आटे का मीठा चीला (लगड़ी) बनाकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

 प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल द्वारा परिणाम की घोषणा की गई; डॉ. अर्चना नौटियाल, डॉ. अजय रावत एवं डॉ. पवनिका चंदोला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम की सह संयोजक डॉ. दुर्गा रजक ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया एवं संयोजक डॉ. सुमन कुकरेती ने गढ़भोज दिवस मनाने की परंपरा को बताते हुए उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजनों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा की संयुक्त निदेशक डॉ. संगीता गुप्ता क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून मौजूद रहीं। उन्होंने पारम्परिक व्यंजन बनाने हेतु छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया एवं पारंपरिक व्यंजनों का महत्व बताया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. एल. आर. राजवंशी ने पारंपरिक व्यंजन एवं स्वास्थ्य, युवाओं द्वारा पारंपरिक फसलों एवं व्यंजनों से जुड़कर रोजगार प्राप्त करने के विविध आयामों पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में समस्त शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्रों ने सामूहिक गढ़भोज का आनंद लिया।

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देहरादून : अभिनय की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से जुड़ाव महज फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और पहाड़ के लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने यहां अपना आशियाना बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।

नाना पाटेकर की उत्तराखण्ड से जुड़ी इसी इच्छा की चर्चा अब एक अधूरे सपने के तौर पर हो रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड में जमीन लेकर घर बनाने की बात कही थी, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी।

 

मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात में कही थी घर बनाने की बात

1 अक्टूबर 2022 को नाना पाटेकर ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था।

मुलाकात के दौरान नाना पाटेकर ने उत्तराखण्ड के प्राकृतिक वातावरण और यहां के लोगों के व्यवहार की जमकर तारीफ की थी। बातचीत में उन्होंने यह इच्छा भी व्यक्त की थी कि वह देवभूमि में अपना घर बनाना चाहते हैं।

उनकी इस बात से साफ था कि उत्तराखंड उनके लिए सिर्फ शूटिंग की लोकेशन नहीं, बल्कि ऐसा स्थान बन चुका था जहां वह भविष्य में कुछ समय बिताना चाहते थे।

 

जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब नौ दिन

नाना पाटेकर इससे पहले चमोली जिले के जोशीमठ और नीती घाटी क्षेत्र में एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। शूटिंग के दौरान उन्होंने करीब नौ दिन पहाड़ों में बिताए।

इस दौरान उन्हें उत्तराखण्ड के पहाड़ी जीवन को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने यहां के रहन-सहन, खानपान और मौसम के बारे में जानकारी ली। पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्थानीय स्तर पर उस समय यह बात सामने आई थी कि नाना पाटेकर उत्तराखण्ड के शांत माहौल से खासे प्रभावित थे और भविष्य में यहां जमीन लेकर घर बनाने की इच्छा रखते थे।

 

पहाड़ों की सादगी ने खींचा था नाना का ध्यान

फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना ने केवल प्राकृतिक नजारों को ही नहीं देखा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली में भी रुचि दिखाई। पहाड़ी भोजन से लेकर आसपास के पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक के बारे में उन्होंने जानकारी ली।

उत्तराखण्ड की यही सादगी और शांत वातावरण उन्हें पसंद आया था। यही वजह रही कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी उनका उत्तराखण्ड से जुड़ाव बना रहा और उन्होंने यहां अपना घर बनाने की इच्छा जताई।

 

देवभूमि में घर बसाने का सपना नहीं हो सका पूरा

नाना पाटेकर के लिए उत्तराखण्ड में घर बनाने की इच्छा महज एक सामान्य पसंद नहीं थी। पहाड़ों में बिताए समय के दौरान उन्होंने जिस अपनापन और सुकून को महसूस किया, उसने उन्हें देवभूमि में बसने के बारे में सोचने पर मजबूर किया था।

हालांकि, उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उत्तराखण्ड की वादियां आज भी उस अभिनेता की उस इच्छा की गवाह हैं, जिसने कभी इन पहाड़ों को अपना घर बनाने के लिए चुना था।

नाना पाटेकर का उत्तराखण्ड से यह रिश्ता उनकी फिल्मों और शूटिंग से आगे बढ़कर एक निजी लगाव में बदल गया था। पहाड़ों में घर बनाने की उनकी इच्छा अब उनके चाहने वालों के लिए एक अधूरे सपने और उत्तराखंड से उनके खास जुड़ाव की याद बनकर रह गई है।

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रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति तथा पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज उप्रेती द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने उत्तराखण्ड के विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। गढ़भोज में चैंसू, फाणु, कफुली, भट्ट की चुरकाणी सहित अनेक पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे।

अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने कहा कि आज की नई पीढ़ी फास्ट फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। ऐसे समय में पौष्टिक एवं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिखणीखाल : राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में गढ़वाली एवं कुमाऊँनी संस्कृति…