देहरादून – वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर आज रविवार को देहरादून में ‘गज उत्सव’ मनाया गया। इस अवसर पर नेचर्स बड्डी संस्था द्वारा हाथियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक साइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली की शुरुआत सौड़ा सरोली (महाराणा स्पोर्ट्स कॉलेज के पास) से हुई और बडासी पुल तक संपन्न हुई।
इस मार्ग का चयन इसलिए किया गया क्योंकि हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में हाथियों का आवागमन बढ़ा है, और यहाँ लोगों में जागरूकता की अत्यंत आवश्यकता है। रैली के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि हाथी जंगल और पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं, और उनके विचरण क्षेत्र में मानव गतिविधियों को सीमित करना आवश्यक है।
नेचर्स बड्डी संस्था उत्तराखंड के तीन प्रमुख हाथी कॉरिडोरों में संरक्षण कार्य कर रही है। संस्था के सदस्य मोहित ने बताया कि आजकल हाथियों की मृत्यु के दो बड़े कारण रेलवे ट्रैक पर दुर्घटनाएं और विद्युत तारबाड़ (इलेक्ट्रिक फेंस) हैं। उन्होंने कहा कि मानव बस्तियाँ लगातार जंगलों के भीतर या आसपास बढ़ रही हैं, जिससे हाथियों के पारंपरिक मार्ग बाधित हो रहे हैं और मनुष्य-हाथी टकराव बढ़ रहा है।
मोहित ने बताया कि हाथी अपने प्राकृतिक रास्तों को याद रखकर चलते हैं। लेकिन अब जब इन मार्गों पर घर, सड़कें और फ्लाईओवर बन गए हैं, तो वे अनजाने में आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में अतिक्रमण, सड़क चौड़ीकरण, और अनियंत्रित निर्माण कार्य केवल हाथियों ही नहीं, बल्कि पूरे वन्य तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए हानिकारक हैं।
पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में हाथियों की संख्या घटकर लगभग 1,839 रह गई है। वहीं, पिछले सप्ताह हरिद्वार में तीन हाथियों की मृत्यु की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। यह स्थिति तब है जब राज्य के 65% से अधिक क्षेत्र जंगलों से ढके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी जंगल के इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे न केवल जंगल में नए रास्ते बनाते हैं, बल्कि उनके द्वारा उत्सर्जित मल (डंग) मिट्टी को उर्वरक बनाता है और पौधों को पोषण देता है।
वर्तमान में उत्तराखंड में सरकार द्वारा 11 हाथी कॉरिडोरों की पहचान की गई है, जिनमें राजाजी-कार्बेट (रवासन-सोननदी), शिवालिक, चीला-मोतीचूर, किलपुरा-सुराई, कोसी नदी और चिलकिया-कोटा जैसे प्रमुख कॉरिडोर शामिल हैं।
आयोजकों ने अपील की कि हाथियों के विचरण मार्गों पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न किया जाए और जंगलों के अतिक्रमण पर सख्त रोक लगाई जाए।
