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देश की जल समस्याओं के समाधान में एनआईएच के वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण: डोभाल

देश की जल समस्याओं के समाधान में एनआईएच के वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण: डोभाल

रुड़की। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच), रुड़की ने अपना 48वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। संस्थान की स्थापना 16 दिसंबर 1978 को एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी, जिसे वर्ष 1987 में भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी संगठन का दर्जा प्रदान किया गया।

स्थापना दिवस के अवसर पर उ‌द्घाटन समारोह, विचार-मंथन सत्र, प्रेरक वार्ताएं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उ‌द्घाटन सत्र में संस्थान द्वारा अब तक किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘NIH-धारा’ (डिज़ाइन हाइड्रोलॉजी एंड एडवांस्ड रेनफॉल एनालिसिस) सॉफ्टवेयर का भी विमोचन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति एवं उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने संबोधन में कहा कि देश में संस्थागत विखंडन की स्थिति यह है कि कई संस्थान विविध विषयों और अनेक एजेंडों पर कार्यरत हैं, जबकि राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो पूरी तरह एक ही एजेंडा, अर्थात जल, पर केंद्रित होकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि देश की जल समस्याओं के समाधान में एनआईएच के वैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. डोभाल ने जल और मानव स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अधिकांश बीमारियां जलजनित होती हैं, इसलिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नवीन तकनीकों का विकास आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में हो रहे बदलाव तथा तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के जलवैज्ञानिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तृत शोध करने का आह्वान भी किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. वाई. आर. एस. राव ने जलविज्ञान परिवार के सभी सदस्यों को 48वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संस्थान में पूर्व में कार्यरत वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सतत प्रयासों के कारण ही आज संस्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर सका है। डॉ. राव ने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक पूरी निष्ठा से कार्य करते हुए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सौंपे गए दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।

इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुहास खोब्रागडे ने मंत्रालय द्वारा संस्थान को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जल शक्ति हैकथॉन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से आम नागरिक भी अपने नवाचारों द्वारा देश की जल समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. शरद जैन, डॉ. जयवीर त्यागी, डॉ. सुधीर कुमार एवं डॉ. एम. के. गोयल ने भी अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। नगर के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव बजाज ने हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वहीं, आईटीसी लिमिटेड, हरिद्वार के एचआर प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने मानव व्यवहार और कार्य वातावरणविषय पर एक प्रेरक व्याख्यान दिया।

शाम के सत्र में संस्थान के वैज्ञानिकों, स्टाफ तथा कौशिक पब्लिक स्कूल, इमलीखेड़ा के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम समिति के संयोजक डॉ. ए. आर. सेंथिल कुमार रहे, जबकि मंच संचालन डॉ. दीपक सिंह बिष्ट एवं डॉ कालजंग छोड़ेन ने किया। इस अवसर पर संस्थान के रुड़की मुख्यालय एवं इसके सात क्षेत्रीय केंद्रों पर कार्यरत वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं परियोजना स्टाफ की उपस्थिति रही।

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