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जनजागरुकता ही विज्ञान की वास्तविक सार्थकता: प्रो. दुर्गेश पंत

जनजागरुकता ही विज्ञान की वास्तविक सार्थकता: प्रो. दुर्गेश पंत


देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में आज पृथ्वी दिवस का आयोजन “Our Power, Our Planet” थीम के अंतर्गत उत्साह, जागरूकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय एवं उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने परिषद की महत्वपूर्ण ‘विज्ञान सेतु’ पहल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका उद्देश्य यूकॉस्ट की वैज्ञानिक गतिविधियों, शोध उपलब्धियों एवं नवाचारों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता ही विज्ञान की वास्तविक सार्थकता है। साथ ही उन्होंने देहरादून में प्रस्तावित साइंस सिटी एवं प्रत्येक जिले में स्थापित किए जाने वाले विज्ञान केंद्रों की जानकारी साझा की तथा सभी प्रतिभागियों को पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर विज्ञान संचार अनुभाग के अंतर्गत संचालित ‘विज्ञान सेतु’ की प्रमुख गतिविधियों, विज्ञान वाणी विज्ञान रेडियो, विज्ञान दृष्यम एवं विज्ञान धारा, की जानकारी भी दी गई। इन पहलों के माध्यम से वैज्ञानिक विषयों का प्रसार, व्याख्यानों का दस्तावेजीकरण तथा समसामयिक वैज्ञानिक मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्य व्याख्यान यूपीईएस, देहरादून के केमिकल एवं पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भालचंद्र शिंगन द्वारा “भारत के लिए सतत ऊर्जा: सभी ऊर्जा स्रोतों के समन्वित दृष्टिकोण” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सतत ऊर्जा के विभिन्न आयामों, सौर एवं पवन ऊर्जा, प्राकृतिक गैस, सरकारी नीतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। व्याख्यान के उपरांत आयोजित परस्पर संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे एवं अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुशासन विभाग के वित्त नियंत्रक डॉ. तन्ज़ीम अली ने ‘ग्रीन बजट’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए पृथ्वी दिवस के महत्व एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव आर्थिक एवं सामाजिक जीवन दोनों पर पड़ता है।

समापन सत्र में संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने पृथ्वी दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, परिषद के उद्देश्यों एवं उसकी विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए प्रेरक विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पियूष जोशी ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट की वैज्ञानिक अधिकारी जागृति उनियाल द्वारा किया गया।

इस आयोजन में तुलास इंस्टीट्यूट, डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट फॉर पैरामेडिकल साइंसेज, एसजीआरआर विश्वविद्यालय एवं उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। यूकॉस्ट के अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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