Home » हरिद्वार। सरस्वती विद्या मंदिर सेक्टर 2 भेल रानीपुर हरिद्वार की एनएसएस इकाई द्वारा 24 सितंबर, एनएसएस स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं एनएसएस लक्ष्य गीत से हुआ। स्वयंसेवियों द्वारा स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देते हुए स्वच्छता अभियान रैली निकाली गई।इस अवसर पर स्वयंसेवियों ने अपने अभिभावकों के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। स्वयंसेवियों ने भाषण सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं समाजसेवा का संदेश दिया।कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।

हरिद्वार। सरस्वती विद्या मंदिर सेक्टर 2 भेल रानीपुर हरिद्वार की एनएसएस इकाई द्वारा 24 सितंबर, एनएसएस स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं एनएसएस लक्ष्य गीत से हुआ। स्वयंसेवियों द्वारा स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देते हुए स्वच्छता अभियान रैली निकाली गई।


इस अवसर पर स्वयंसेवियों ने अपने अभिभावकों के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। स्वयंसेवियों ने भाषण सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं समाजसेवा का संदेश दिया।


कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।


कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।


कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।


कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।

एनएसएस स्थापना दिवस पर सरस्वती विद्या मंदिर में विविध कार्यक्रम, स्वच्छता रैली व पौधारोपण कर दिया सेवा का संदेश

हरिद्वार। सरस्वती विद्या मंदिर सेक्टर 2 भेल रानीपुर हरिद्वार की एनएसएस इकाई द्वारा 24 सितंबर, एनएसएस स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं एनएसएस लक्ष्य गीत से हुआ। स्वयंसेवियों द्वारा स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देते हुए स्वच्छता अभियान रैली निकाली गई।

इस अवसर पर स्वयंसेवियों ने अपने अभिभावकों के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। स्वयंसेवियों ने भाषण सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं समाजसेवा का संदेश दिया।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।

कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।

कार्यक्रम अधिकारी दीपक धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय सेवा योजना की शुरुआत 24 सितंबर 1969 को महात्मा गांधी जी की जन्म शताब्दी के वर्ष में की गई थी। इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यार्थियों में समाज सेवा के जरिए व्यक्तित्व का विकास करना है। शुरुआत से ही इस संगठन ने युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।इसका आदर्श वाक्य: “स्वयं से पहले आप” है। यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। यह हमें समाज के हर व्यक्ति के प्रति सहानुभूति और समर्पण की भावना रखना सिखाता है।समाज सेवा और व्यक्तित्व विकासजब हम पढ़ाई के साथ एनएसएस से जुड़ते हैं, तो हमें असल समाज को करीब से देखने का मौका मिलता है। हम गाँवों और बस्तियों में जाकर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता और साक्षरता जैसे कार्य करते हैं। इससे हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता , टीम में काम करने का हुनर और समस्याओं को सुलझाने की समझ विकसित होती है।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री लोकेंद्र दत्त जी , कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक कुमार धीमान एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करना रहा।

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