नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नैनीताल में आयोजित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने महोत्सव में उपस्थित माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों, युवाओं एवं बच्चों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा की छत्रछाया में उपस्थित होना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। मंगलवार के अवसर पर उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी को भी नमन किया और कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने माता सीता का संदेश प्रभु श्रीराम तक पहुंचाया, उसी प्रकार वे सभी का प्रणाम प्रभु श्रीराम के चरणों तक पहुंचाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह के साथ “जय श्रीराम” का जयघोष भी किया।
नंदा देवी महोत्सव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का उत्सवः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव कोई सामान्य मेला अथवा उत्सव नहीं है। यह हमारी आस्था, उत्तराखंड की संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं सहित लोक संस्कृति की विविध परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति पर गर्व होता है, वही समाज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं, आस्था और अध्यात्म की भी भूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल को दुनिया उसकी खूबसूरत झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए जानती है, लेकिन नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं है। यह आस्था और अध्यात्म की भी भूमि है।
उन्होंने कहा कि यहां माँ नैना देवी का पावन धाम है, हनुमानगढ़ी में बजरंगबली विराजमान हैं, कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज की तपोभूमि है और मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है। प्रकृति और अध्यात्म का यह अद्भुत संगम नैनीताल को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव कोई सामान्य मेला अथवा उत्सव नहीं है। यह हमारी आस्था, उत्तराखंड की संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं सहित लोक संस्कृति की विविध परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति पर गर्व होता है, वही समाज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं, आस्था और अध्यात्म की भी भूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल को दुनिया उसकी खूबसूरत झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए जानती है, लेकिन नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं है। यह आस्था और अध्यात्म की भी भूमि है।
उन्होंने कहा कि यहां माँ नैना देवी का पावन धाम है, हनुमानगढ़ी में बजरंगबली विराजमान हैं, कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज की तपोभूमि है और मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है। प्रकृति और अध्यात्म का यह अद्भुत संगम नैनीताल को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
नंदा देवी महोत्सव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का उत्सवः मुख्यमंत्री


