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USSTC-2026: उत्तराखण्ड में अनुसंधान एवं विकास की संभावनाओं पर मंथन

USSTC-2026: उत्तराखण्ड में अनुसंधान एवं विकास की संभावनाओं पर मंथन


देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम में आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) के दूसरे दिन विमर्श सभागार में “उत्तराखण्ड में अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य” विषय पर विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया गया।

सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के प्रो. नवीन कुमार नवानी और सह-अध्यक्षता आईसीएफएआई विश्वविद्यालय देहरादून की प्रो. अल्का एन. चौधरी ने की। कार्यक्रम का समन्वय यूकॉस्ट की आरएंडडी डिवीजन के  समन्वयक डॉ. एमएस रावत द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोध संस्थानों, तकनीकी संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, कृषि, भू-विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञ, शोधकर्ता एवं परियोजना प्रभारी मौजूद रहे। विचार-मंथन का उद्देश्य उत्तराखण्ड की स्थानीय आवश्यकताओं, हिमालयी पारिस्थितिकी, आपदा जोखिम, जल संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण, पारंपरिक ज्ञान तथा ग्रामीण तकनीक से जुड़े अनुसंधान विषयों की पहचान करना था। यूकॉस्ट की आरएंडडी योजना में राज्य-विशिष्ट तथा उपयोग-उन्मुख अनुसंधान परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है।

सत्र में विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्तराखण्ड के लिए व्यावहारिक शोध प्रस्ताव, अनुसंधान अंतराल, संभावित सहयोगी संस्थानों तथा स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाने वाले तकनीकी समाधानों पर अपने विचार रखे। आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जल, स्वास्थ्य एवं पोषण, कृषि-बागवानी, नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, हिमालयी जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, ग्रामीण तकनीक, महिलाओं के श्रम-न्यूनीकरण तथा पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण जैसे विषयों पर विशेष रुप से चर्चा की गई।

यूकॉस्ट द्वारा अनुसंधान परियोजनाओं, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, उद्यमिता विकास कार्यक्रमों एवं अंतर्राष्ट्रीय यात्रा अनुदान हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समन्वयक डॉ. एमएस रावत ने बताया कि इस विचार-मंथन सत्र के माध्यम से राज्य के शोध संस्थानों एवं महाविद्यालयों के बीच सहयोग को मजबूत करते हुए उत्तराखण्ड की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नए अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में ठोस सुझाव प्राप्त हुए।

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