चमोली जिले के माणा में हिमस्खलन से सुरक्षित निकाले गए श्रमिकों की अब घर लौटने की चिंता बढ़ गई है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अधिकांश श्रमिकों के पास न पैसा है, न कपड़े, न ही दस्तावेज। उनका सब कुछ बर्फ में दब गया। फिलहाल कार्यदायी कंपनी ने उन्हें हरिद्वार तक भेजने की व्यवस्था की है, लेकिन वहां से आगे की यात्रा उन्हें खुद तय करनी है।
बिहार के जयेंद्र प्रसाद और जितेश कुमार जैसे श्रमिकों का कहना है कि तन पर सिर्फ वही कपड़े हैं, जो बचाव के वक्त पहने थे। कोई साधन नहीं बचा। कंपनी ने हरिद्वार तक तो भेज दिया, लेकिन आगे की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही।
कंपनी प्रबंधन ने दावा किया है कि हरिद्वार में जरूरी सहयोग दिया जाएगा, जबकि प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि श्रमिकों की घर वापसी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि इन पीड़ितों को जल्द राहत कैसे मिलती है।