उत्तराखंड – उत्तराखंड के सूबेदार अंकुर रावत ने 18 मई 2025 को सुबह 3:05 बजे माउंट एवरेस्ट की चोटी पर दूसरी बार तिरंगा फहराकर नया कीर्तिमान रच दिया। भारतीय सेना के इस पर्वतारोही ने 38 सदस्यीय एनसीसी टीम के साथ दक्षिणी कोल रूट से यह चढ़ाई पूरी की। इस उपलब्धि के साथ रावत अब उत्तराखंड से ऐसे पहले पर्वतारोही बन गए हैं जिन्होंने दो बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतह की है।
रुड़की के विनीत नगर निवासी और मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के पीपला गांव के रहने वाले सूबेदार रावत 2016 में पहली बार एवरेस्ट और 2019 में दुनिया की पांचवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मकालू (8485 मीटर) फतह कर चुके हैं। अब तक वे देश-विदेश की 27 से अधिक ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहरा चुके हैं।
एनसीसी एवरेस्ट अभियान 2025 में उनके साथ कुल 38 सदस्य थे, जिनमें पर्वतारोही राजनीश जोशी, बलकार सिंह, जोगमैथ नामग्याल, दीपक कुमार, दावा त्सेतेन भूटिया, रिगजिन डोरजय, कृतिका शर्मा, प्रतिमा राय, रिफाइनेस वर्जरी, मोनिका, आबीदा आफरीन, मोहित कनाठिया, पदमा नामग्याल, मुकुल बंगवाल, वीरेंद्र सिंह सामंत और सचिन कुमार शामिल थे। टीम के साथ अनुभवी शेर्पा गाइड्स भी मौजूद थे।
इस अभियान को 3 अप्रैल 2025 को दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद टीम काठमांडू पहुंची और 10 अप्रैल से ट्रेक की शुरुआत कर 18 अप्रैल को बेस कैंप पहुंची। 23 अप्रैल को टीम ने माउंट लोबुचे (6119 मीटर) पर चढ़ाई की और acclimatization के लिए कैंप 3 तक 25 अप्रैल से 5 मई तक अभ्यास किया गया। 15 मई को समिट पुश की शुरुआत हुई और 18 मई को सफलता पूर्वक एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी की गई।
सूबेदार रावत को 2024 में इस अभियान की कोर टीम में शामिल किया गया था। उन्होंने माउंट अबी गामिन और सियाचिन ग्लेशियर पर कैडेट्स को प्रशिक्षण भी दिया। उनके नेतृत्व और अनुभव से प्रेरित होकर युवा कैडेट्स ने एवरेस्ट अभियान में अनुशासन और साहस का परिचय दिया।
यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है, जिसमें सेना और एनसीसी की साझा ताकत व समर्पण की झलक साफ नजर आई।